एडवांस टैक्स की पहली किस्त: 15 जून 2026 है आखिरी मौका, जानें कौन भरेगा और किसे मिली छूट
सारांश
मुख्य बातें
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की पहली किस्त जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 है। जिन करदाताओं की टीडीएस और टीसीएस समायोजन के बाद कुल अनुमानित कर देनदारी ₹10,000 से अधिक बनती है, उन्हें इस तारीख से पहले अपनी देनदारी का निर्धारित हिस्सा जमा करना अनिवार्य है। यह व्यवस्था 'पे ऐज यू अर्न' के सिद्धांत पर टिकी है — यानी आय अर्जित होते ही टैक्स का भुगतान, न कि वर्ष के अंत में एकमुश्त।
किसे देना होगा एडवांस टैक्स
आयकर नियमों के अनुसार, वेतनभोगी कर्मचारी, फ्रीलांसर, सलाहकार, कारोबारी और निवेशक — जिनकी कुल कर देनदारी ₹10,000 से अधिक है — इस दायरे में आते हैं। यदि किसी वेतनभोगी कर्मचारी की पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन), किराये या ब्याज से अतिरिक्त आय के कारण कुल देनदारी इस सीमा को पार करती है, तो उसे भी एडवांस टैक्स जमा करना होगा — भले ही नियोक्ता पहले से टीडीएस काट रहा हो। फिक्स्ड डिपॉजिट से अधिक ब्याज कमाने वाले निवेशक और मकान मालिक भी इस श्रेणी में शामिल हैं।
किसे मिली है छूट
60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को एडवांस टैक्स से छूट प्राप्त है — परंतु केवल तब, जब उनकी कोई व्यावसायिक या पेशेवर आय न हो। यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की आय व्यवसाय या प्रोफेशन से भी आती है, तो वे भी अन्य करदाताओं के समान एडवांस टैक्स के दायरे में आएंगे। इसके अलावा, प्रिजम्पटिव टैक्सेशन योजना के तहत पंजीकृत छोटे कारोबारी और कुछ पेशेवर करदाताओं को पूरे वर्ष का 100 प्रतिशत एडवांस टैक्स एकमुश्त 15 मार्च 2027 तक जमा करने की सुविधा है।
चार किस्तों में होगा भुगतान
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स चार चरणों में जमा करना होगा। 15 जून 2026 तक कुल देनदारी का 15 प्रतिशत, 15 सितंबर 2026 तक 45 प्रतिशत, 15 दिसंबर 2026 तक 75 प्रतिशत और 15 मार्च 2027 तक 100 प्रतिशत भुगतान अनिवार्य है। प्रिजम्पटिव योजना के करदाता 31 मार्च 2027 तक भी संपूर्ण टैक्स चुका सकते हैं।
देरी पर लगेगा ब्याज
समय पर भुगतान न करने पर करदाताओं को ब्याज का बोझ उठाना पड़ सकता है। यदि 31 मार्च तक कुल देनदारी का कम से कम 90 प्रतिशत नहीं चुकाया गया, तो आयकर अधिनियम की धारा 424 (पूर्व में धारा 234बी) के तहत बकाया राशि पर 1 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज देना होगा। वहीं, तिमाही समय-सीमा चूकने पर धारा 425 (पूर्व में धारा 234सी) के तहत भी 1 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज लागू होता है।
ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया
करदाता आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन कर 'ई-पे टैक्स' विकल्प के ज़रिये भुगतान कर सकते हैं। 'न्यू पेमेंट' पर क्लिक करने के बाद आयकर श्रेणी और वित्त वर्ष 2026-27 चुनें, फिर 'एडवांस टैक्स' (कोड 100) का चयन करें। आवश्यक विवरण भरने के बाद पसंदीदा भुगतान माध्यम से टैक्स जमा किया जा सकता है। कर विशेषज्ञों के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष की संभावित आय का पहले से अनुमान लगाकर समय पर किस्तें जमा करना न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करता है, बल्कि अनावश्यक ब्याज और जुर्माने से भी बचाता है।