जेवर में ₹6,750 करोड़ के PCB प्लांट का शिलान्यास, वैष्णव बोले — हर बोर्ड बचाएगा विदेशी मुद्रा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 28 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के यमुना सिटी, जेवर में दो प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं का शिलान्यास किया, जिनकी कुल निवेश राशि ₹6,750 करोड़ है। इन परियोजनाओं का लक्ष्य भारत में उन्नत प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) का घरेलू उत्पादन शुरू करना और देश की ₹40,000 करोड़ वार्षिक PCB आयात निर्भरता को कम करना है।
मुख्य परियोजनाएँ और निवेश
शिलान्यास समारोह में दो अलग-अलग परियोजनाओं की घोषणा की गई। पहली परियोजना, एसेंट-के सर्किट, दक्षिण कोरिया की KCC के साथ संयुक्त उद्यम के तहत ₹3,250 करोड़ की लागत से एक एडवांस्ड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित करेगी। यह सुविधा इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए हाई-डेंसिटी और मल्टी-लेयर PCB का निर्माण करेगी।
दूसरी परियोजना में एम्बर एंटरप्राइजेज ₹3,500 करोड़ का स्वतंत्र निवेश करेगी, जिससे HVAC कंपोनेंट्स और PCB असेंबली के लिए एक अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग सुविधा तैयार होगी।
वैष्णव का बयान और एक्स पर पोस्ट
वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में एक नया चैप्टर। एम्बर और एसेंट इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट एडवांस्ड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड बनाएगा, जिससे भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस मजबूत होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि यहाँ बनने वाला हर PCB विदेशी मुद्रा की बचत करेगा, रुपये को मज़बूत करेगा और भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को बेहतर बनाएगा।
यह शिलान्यास उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ, जो इस क्षेत्र में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की राज्य सरकार की प्राथमिकता को रेखांकित करता है।
आयात निर्भरता और घरेलू उत्पादन का महत्व
वैष्णव ने पहले स्पष्ट किया था कि भारत प्रतिवर्ष लगभग ₹40,000 करोड़ के PCB का आयात करता है। गौरतलब है कि PCB किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण — स्मार्टफोन से लेकर औद्योगिक मशीनरी तक — की रीढ़ होता है, और इसके घरेलू उत्पादन के अभाव में भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली मुख्यतः चीन व ताइवान से आयातित बोर्डों पर निर्भर रहती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव के कारण आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन की माँग तेज़ हो गई है।
जेवर का उभरता औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र
वैष्णव ने जेवर क्षेत्र की भौगोलिक और बुनियादी ढाँचागत विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परिचालन में आ चुके नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की बेहतर कनेक्टिविटी और प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना इस इलाके को वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना रहे हैं।
मंत्री के अनुसार, आधुनिक बुनियादी ढाँचे और मैन्युफैक्चरिंग निवेश से समर्थित यह उभरता औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र भारत को एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा और स्थानीय रोज़गार सृजन को भी बढ़ावा देगा।
आगे की राह
ये दोनों परियोजनाएँ भारत सरकार की व्यापक 'मेक इन इंडिया' और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI) नीति के अनुरूप हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च-स्तरीय PCB का घरेलू उत्पादन न केवल आयात बिल घटाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला में ऊपर ले जाने का अवसर भी देगा। परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और रोज़गार लक्ष्यों का विस्तृत ब्यौरा आने वाले समय में सामने आने की उम्मीद है।