3 अगस्त 2026
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इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग बनी भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी, उद्योग ₹13 लाख करोड़ के पार: वैष्णव

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इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग बनी भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी, उद्योग ₹13 लाख करोड़ के पार: वैष्णव

सारांश

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र ₹13 लाख करोड़ के पार पहुँचकर देश की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी बन गया है। पुणे के रंजनगांव में जैबिल की नई एआई और 5जी उपकरण इकाई इस उभरते पारिस्थितिकी तंत्र की अगली कड़ी है, जो 11,000 रोज़गार और एमएसएमई को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने का वादा करती है।

मुख्य बातें

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी वस्तु-निर्यात कैटेगरी बन गई है।
उद्योग का आकार ₹13 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे के रंजनगांव में जैबिल की उच्च-तकनीक इकाई का उद्घाटन किया।
संयंत्र में एआई सिस्टम, 5जी उपकरण, डेटा सेंटर हार्डवेयर और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण होगा।
परियोजना से लगभग 11,000 स्थानीय रोज़गार सृजित होंगे और एमएसएमई को वैश्विक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ा जाएगा।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 18 जून 2026 को घोषणा की कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अब भारत से होने वाले वस्तु-निर्यात की श्रेणियों में तीसरे सबसे बड़े स्थान पर पहुँच गया है। यह मील का पत्थर तब सामने आया जब मंत्री ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ पुणे के रंजनगांव में वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनी जैबिल की अत्याधुनिक उत्पादन इकाई का उद्घाटन किया।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा उद्योग

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग अब ₹13 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच चुका है। वैष्णव ने बताया कि इस क्षेत्र की यात्रा उल्लेखनीय रही है — शुरुआत में लक्ष्य केवल शीर्ष-10 निर्यात श्रेणियों में जगह बनाने का था, लेकिन यह क्षेत्र क्रमशः 9वें, 7वें, 5वें, 4वें और अब तीसरे स्थान तक पहुँच गया है। यह प्रगति उस दौर की तुलना में असाधारण है जब भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात की कल्पना भी कठिन मानी जाती थी।

जैबिल इकाई: क्या बनेगा रंजनगांव में

पुणे के रंजनगांव में स्थापित जैबिल की यह इकाई एक उच्च-तकनीक विनिर्माण केंद्र है जो एआई सिस्टम, एआई-आधारित डेटा सेंटर उपकरण, 5जी नेटवर्किंग उपकरण, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल उत्पादों का निर्माण करेगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता घरेलू जरूरतों के साथ-साथ वैश्विक निर्यात के लिए भी पर्याप्त है।

रोज़गार और एमएसएमई को सीधा लाभ

सरकार के सक्रिय सहयोग से यह परियोजना स्थानीय स्तर पर लगभग 11,000 लोगों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित करेगी। इसके अतिरिक्त, एक गहन स्थानीयकरण कार्यक्रम के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और घरेलू आपूर्ति शृंखला को सीधे वैश्विक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ा जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन का लाभ उठाने की कोशिश में है।

एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर और 'मेक इन इंडिया' की भूमिका

वैष्णव ने कहा कि एआई डेटा सेंटर आज दुनिया भर में विकास का प्रमुख इंजन बन चुके हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन्हें चलाने वाले इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण भारत में ही हो। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मेक इन इंडिया' नीति को इस बदलाव का आधार बताया। गौरतलब है कि डेटा सेंटर उपकरणों का घरेलू उत्पादन भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम आगे ले जाता है।

आगे की राह

इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों, तैयार उत्पादों और स्थानीय आपूर्ति शृंखला को एकीकृत करने वाला यह नया तंत्र देश को दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक लाभ पहुँचाने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह गति बनी रही तो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आने वाले वर्षों में भारत के शीर्ष-2 निर्यात क्षेत्रों में भी जगह बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह वृद्धि केवल असेंबली पर टिकी है या गहरे घरेलू मूल्य-संवर्धन पर। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में स्मार्टफोन असेंबली की हिस्सेदारी बड़ी है, जहाँ मुख्य पुर्जे अभी भी आयात होते हैं। जैबिल जैसी इकाइयाँ डेटा सेंटर हार्डवेयर के घरेलू उत्पादन की दिशा में सही कदम हैं, पर एमएसएमई को वास्तव में वैश्विक आपूर्ति शृंखला में एकीकृत करना — न केवल कागज़ पर — वह पड़ाव है जहाँ अब तक सबसे अधिक चुनौतियाँ रही हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग तीसरी सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी कैसे बनी?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र ने क्रमशः 9वें, 7वें, 5वें और 4वें स्थान से होते हुए अब तीसरा स्थान हासिल किया है। 'मेक इन इंडिया' नीति और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजनाओं को इस उछाल का मुख्य कारण बताया गया है।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग अभी किस आकार का है?
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग अब ₹13 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। यह उस समय से बड़ा बदलाव है जब इस क्षेत्र से उल्लेखनीय निर्यात की कल्पना भी कठिन मानी जाती थी।
पुणे में जैबिल की नई इकाई में क्या बनेगा?
रंजनगांव, पुणे में स्थापित जैबिल की इकाई में एआई सिस्टम, एआई-आधारित डेटा सेंटर उपकरण, 5जी नेटवर्किंग उपकरण, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण होगा। यह संयंत्र घरेलू जरूरतों के साथ-साथ वैश्विक निर्यात के लिए भी उत्पादन करेगा।
जैबिल की पुणे इकाई से कितने रोज़गार मिलेंगे?
सरकार के सक्रिय सहयोग से यह परियोजना स्थानीय स्तर पर लगभग 11,000 लोगों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित करेगी। इसके अलावा, एमएसएमई को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखला से सीधे जोड़ने का कार्यक्रम भी इसके साथ चलेगा।
एआई डेटा सेंटर और भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स नीति का क्या संबंध है?
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि एआई डेटा सेंटर वैश्विक विकास का बड़ा इंजन बन चुके हैं और इन्हें संचालित करने वाले इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण भारत में होना तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए आवश्यक है। जैबिल जैसी इकाइयाँ इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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