इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग बनी भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी, उद्योग ₹13 लाख करोड़ के पार: वैष्णव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 18 जून 2026 को घोषणा की कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अब भारत से होने वाले वस्तु-निर्यात की श्रेणियों में तीसरे सबसे बड़े स्थान पर पहुँच गया है। यह मील का पत्थर तब सामने आया जब मंत्री ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ पुणे के रंजनगांव में वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनी जैबिल की अत्याधुनिक उत्पादन इकाई का उद्घाटन किया।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा उद्योग
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग अब ₹13 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच चुका है। वैष्णव ने बताया कि इस क्षेत्र की यात्रा उल्लेखनीय रही है — शुरुआत में लक्ष्य केवल शीर्ष-10 निर्यात श्रेणियों में जगह बनाने का था, लेकिन यह क्षेत्र क्रमशः 9वें, 7वें, 5वें, 4वें और अब तीसरे स्थान तक पहुँच गया है। यह प्रगति उस दौर की तुलना में असाधारण है जब भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात की कल्पना भी कठिन मानी जाती थी।
जैबिल इकाई: क्या बनेगा रंजनगांव में
पुणे के रंजनगांव में स्थापित जैबिल की यह इकाई एक उच्च-तकनीक विनिर्माण केंद्र है जो एआई सिस्टम, एआई-आधारित डेटा सेंटर उपकरण, 5जी नेटवर्किंग उपकरण, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल उत्पादों का निर्माण करेगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता घरेलू जरूरतों के साथ-साथ वैश्विक निर्यात के लिए भी पर्याप्त है।
रोज़गार और एमएसएमई को सीधा लाभ
सरकार के सक्रिय सहयोग से यह परियोजना स्थानीय स्तर पर लगभग 11,000 लोगों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित करेगी। इसके अतिरिक्त, एक गहन स्थानीयकरण कार्यक्रम के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और घरेलू आपूर्ति शृंखला को सीधे वैश्विक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ा जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला पुनर्गठन का लाभ उठाने की कोशिश में है।
एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर और 'मेक इन इंडिया' की भूमिका
वैष्णव ने कहा कि एआई डेटा सेंटर आज दुनिया भर में विकास का प्रमुख इंजन बन चुके हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन्हें चलाने वाले इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण भारत में ही हो। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मेक इन इंडिया' नीति को इस बदलाव का आधार बताया। गौरतलब है कि डेटा सेंटर उपकरणों का घरेलू उत्पादन भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम आगे ले जाता है।
आगे की राह
इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों, तैयार उत्पादों और स्थानीय आपूर्ति शृंखला को एकीकृत करने वाला यह नया तंत्र देश को दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक लाभ पहुँचाने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह गति बनी रही तो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आने वाले वर्षों में भारत के शीर्ष-2 निर्यात क्षेत्रों में भी जगह बना सकता है।