स्टील इंडस्ट्री में AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी अनिवार्य: कुमारस्वामी, 2030 तक 300 MT क्षमता का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्टील और भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 24 जून 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत की स्टील इंडस्ट्री के दीर्घकालिक अस्तित्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए डिजिटलाइजेशन अब एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अपरिहार्य आवश्यकता बन चुकी है। स्टील मंत्रालय द्वारा आयोजित 'स्टील सेक्टर में डिजिटलाइजेशन पर चिंतन शिविर 2026' को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री ने कहा कि स्टील इंडस्ट्री का भविष्य केवल उत्पादन क्षमता से नहीं, बल्कि इंटेलिजेंट, कनेक्टेड और डेटा-आधारित मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की उसकी योग्यता से तय होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन का उल्लेख करते हुए स्टील इंडस्ट्री को देश के आर्थिक रूपांतरण का एक अहम स्तंभ बताया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, शहरीकरण, परिवहन और रक्षा उत्पादन को सीधे सहारा देती है।
उत्पादन और खपत के आँकड़े
कुमारस्वामी ने बताया कि 2018 से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक बना हुआ है — और यह तब है जब कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में माँग घट रही है। वित्त वर्ष 2022 से कच्चे स्टील के उत्पादन में औसतन सालाना लगभग 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि तैयार स्टील की खपत सालाना लगभग 13 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्टील बाज़ार में चीन की अधिक आपूर्ति और यूरोपीय माँग में सुस्ती से दबाव बना हुआ है।
2030 और 2035 का विजन
मंत्री ने सरकार के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का भी उल्लेख किया जिसके तहत 2030 तक भारत की स्टील उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन और 2035 तक 400 मिलियन टन तक पहुँचाना है। गौरतलब है कि यह लक्ष्य मौजूदा क्षमता से दोगुने से भी अधिक का विस्तार दर्शाता है, जिसके लिए डिजिटल दक्षता को केंद्रीय भूमिका में रखा गया है।
AI और उभरती टेक्नोलॉजी की भूमिका
कुमारस्वामी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IIoT), डिजिटल ट्विन्स, रोबोटिक्स और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स को वैश्विक स्टील मैन्युफैक्चरिंग को पुनर्परिभाषित करने वाली प्रमुख तकनीकों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'ये टेक्नोलॉजी बिना योजना के काम रुकने को कम करने, इंसानी गलतियों को घटाने और काम की जगह पर सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।'
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए
स्टील मंत्रालय द्वारा आयोजित इस चिंतन शिविर में सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ता, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ, स्टार्टअप प्रतिनिधि और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL), NMDC तथा MOIL जैसी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन नीति-निर्माण और उद्योग के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बना।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि चिंतन शिविर में उभरे सुझाव किस हद तक ठोस नीतिगत कदमों में तब्दील होते हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील कंपनियाँ डिजिटल रूपांतरण को किस गति से अपनाती हैं।