मई 2026 में आठ मुख्य इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज की विकास दर 0.5%, सीमेंट-स्टील-बिजली में तेज़ी
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा 22 जून 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, भारत की आठ मुख्य इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज के संयुक्त सूचकांक (ICI) की विकास दर मई 2026 में सालाना आधार पर 0.5 प्रतिशत रही। समग्र वृद्धि भले ही सीमित रही हो, परंतु सीमेंट, स्टील और बिजली क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जो सरकार के बड़े पूँजीगत व्यय कार्यक्रम की निरंतरता को दर्शाता है।
मुख्य क्षेत्रों का प्रदर्शन
सीमेंट उत्पादन में मई के दौरान 8.4 प्रतिशत की मज़बूत वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी प्रमुख वजह हाईवे, पोर्ट और रेलवे जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सरकार का भारी निवेश है, जिसने इन सामग्रियों की माँग को बनाए रखा। स्टील उत्पादन में भी पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही।
बिजली उत्पादन में सालाना आधार पर 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो औद्योगिक और घरेलू माँग दोनों में सुधार का संकेत है।
ऊर्जा क्षेत्र में गिरावट
इसके विपरीत, ऊर्जा उत्पादन के कई क्षेत्रों में संकुचन देखा गया। कोयले का उत्पादन 9.3 प्रतिशत घटा, जबकि कच्चे तेल के उत्पादन में 4.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। प्राकृतिक गैस उत्पादन 4.9 प्रतिशत गिरा और रिफाइनरी उत्पादों में 8.7 प्रतिशत की गिरावट आई।
उर्वरक उत्पादन में 0.9 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही। आँकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे माल की आपूर्ति में व्यवधान इसकी एक प्रमुख वजह रही।
संशोधित आँकड़े और संचयी प्रदर्शन
मंत्रालय ने अप्रैल 2026 के लिए आठ मुख्य उद्योगों की वृद्धि दर को संशोधित कर 1.8 प्रतिशत कर दिया है। अप्रैल-मई 2026-27 की संचयी अवधि में इन उद्योगों की कुल वृद्धि दर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 1.1 प्रतिशत रही।
ICI का महत्त्व
आठ मुख्य इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज का संयुक्त सूचकांक — जिसमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं — औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40.27 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। इसलिए इसकी दिशा समग्र औद्योगिक स्वास्थ्य का एक महत्त्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार पूँजीगत व्यय के ज़रिये विकास को गति देने की कोशिश में है — आगामी महीनों में मानसून का रुख और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की स्थिति इस सूचकांक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।