अप्रैल 2026 में 8 प्रमुख इंफ्रा उद्योगों की वृद्धि दर 1.7%, सीमेंट में 9.5% की छलांग
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा 20 मई 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के 8 प्रमुख बुनियादी ढाँचा उद्योगों के संयुक्त सूचकांक (आईसीआई) में अप्रैल 2026 में पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 1.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सीमेंट, स्टील और बिजली क्षेत्रों ने इस बढ़त को मुख्य रूप से गति दी, जबकि कोयला, कच्चा तेल और उर्वरक उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई।
मुख्य घटनाक्रम
मार्च 2026 में इन आठ प्रमुख उद्योगों की अंतिम वृद्धि दर 1.2 प्रतिशत रही थी, जो अप्रैल में बढ़कर 1.7 प्रतिशत हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल से मार्च) की संपूर्ण अवधि के लिए इन उद्योगों की संचयी वृद्धि दर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2.7 प्रतिशत रही।
गौरतलब है कि आठ प्रमुख उद्योगों का यह सूचकांक औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के कुल भार का 40.27 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जिससे यह देश की समग्र औद्योगिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण अग्रणी संकेतक बन जाता है।
सकारात्मक प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र
सीमेंट क्षेत्र ने अप्रैल में 9.5 प्रतिशत की मज़बूत वृद्धि दर्ज की। आंकड़ों के अनुसार, इसका मुख्य कारण राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे जैसी बड़ी सरकारी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं से उत्पन्न निरंतर माँग बताई गई है।
स्टील उत्पादन में भी अप्रैल के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। बिजली उत्पादन में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो ऊर्जा क्षेत्र में स्थिर माँग को दर्शाती है।
गिरावट दर्ज करने वाले क्षेत्र
इस अवधि में कोयला उत्पादन में 8.7 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट आई। कच्चे तेल का उत्पादन 3.9 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस उत्पादन 4.3 प्रतिशत घटा। रिफाइनरी उत्पादों में 0.5 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज हुई।
उर्वरक उत्पादन में अप्रैल के दौरान 8.6 प्रतिशत की गिरावट आई। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मध्य पूर्व संघर्ष के कारण कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है।
आईसीआई का दायरा और महत्व
आठ प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (आईसीआई) कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली — इन आठ क्षेत्रों के संयुक्त और व्यक्तिगत उत्पादन प्रदर्शन को मापता है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार बुनियादी ढाँचे पर पूँजीगत व्यय को प्राथमिकता दे रही है।
आगे की दिशा
सीमेंट और स्टील की मज़बूत वृद्धि सरकारी पूँजीगत व्यय के ज़मीनी असर का संकेत देती है, लेकिन कोयला और उर्वरक क्षेत्र में लगातार दबाव आपूर्ति-श्रृंखला की कमज़ोरियों को उजागर करता है। विश्लेषकों की नज़र अब मई 2026 के आईआईपी आंकड़ों पर होगी, जो इस मिश्रित तस्वीर की पुष्टि या खंडन करेंगे।