जनरेटिव एआई के बाद युवा रोजगार में 2.85 लाख की गिरावट, बैंक ऑफ कोरिया की रिपोर्ट में चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
बैंक ऑफ कोरिया (बीओके) की 18 अगस्त 2026 को जारी एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, जनरेटिव एआई तकनीकों — विशेषकर चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट्स — के व्यापक प्रसार के बाद दक्षिण कोरिया में एआई-प्रभावित क्षेत्रों में युवा रोजगार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जून 2022 से जून 2026 के बीच 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के कुल रोजगार में 2.85 लाख की कमी आई, जिसमें से 94 प्रतिशत गिरावट सीधे एआई-संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़ी रही।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के अनुसार, घटे कुल रोजगारों में से 2.68 लाख नौकरियाँ एआई-प्रभावित क्षेत्रों से थीं। इनमें आईटी सेवाएं, प्रकाशन (सॉफ्टवेयर और वेब डिजाइन सहित), कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज प्रमुख हैं। बीओके ने 2022 को अध्ययन का आधार वर्ष इसलिए चुना क्योंकि उसी वर्ष के अंत में चैटजीपीटी लॉन्च हुआ था, जिसके बाद जनरेटिव एआई का वैश्विक उपयोग तेजी से बढ़ा।
क्षेत्रवार आँकड़े स्थिति की गंभीरता उजागर करते हैं। आईटी सेवाओं में युवा रोजगार 31.4 प्रतिशत घटा — सर्वाधिक गिरावट। प्रकाशन क्षेत्र में 27.4 प्रतिशत, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में 16.6 प्रतिशत और प्रोफेशनल सर्विसेज में 11.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
वरिष्ठ कर्मचारियों पर असर उलटा
जहाँ युवा रोजगार सिकुड़ा, वहीं 50 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के रोजगार में इसी अवधि में 2.30 लाख की वृद्धि हुई। इनमें से 1.73 लाख नौकरियाँ एआई-प्रभावित क्षेत्रों में ही बढ़ीं। आँकड़ों के अनुसार, यह प्रवृत्ति संकेत देती है कि एआई के दौर में अनुभव और विशेषज्ञता वाले कर्मचारियों की माँग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
शिक्षा और बेरोजगारी का बदलता समीकरण
रिपोर्ट में शिक्षा-आधारित बेरोजगारी के आँकड़े भी चौंकाने वाले हैं। 2019 से 2022 के बीच स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों की औसत बेरोजगारी दर 8.2 प्रतिशत थी, जबकि माध्यमिक या जूनियर कॉलेज स्तर तक पढ़े युवाओं की दर 8 प्रतिशत थी — अंतर मामूली था।
लेकिन 2022 के बाद यह समीकरण पलट गया। उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत रही, जबकि कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं में यह 5.4 प्रतिशत रही — दोनों के बीच अंतर 1.6 प्रतिशत अंक तक बढ़ गया। यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा को रोजगार-सुरक्षा का सबसे बड़ा ढाल माना जाता था।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बीओके के शोध विभाग के शोधकर्ता ओह सैम-इल ने कहा, 'एआई युवा कर्मचारियों की उत्पादकता को काफी बढ़ा सकता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि इन्हें एआई द्वारा प्रतिस्थापित भी किया जा सकता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युवा रोजगार में कमी के लिए पूरी तरह एआई को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन यह उस प्रवृत्ति को निश्चित रूप से तेज कर रहा है जिसमें युवाओं के लिए पारंपरिक करियर सीढ़ी धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।
बैंक ऑफ कोरिया ने यह भी रेखांकित किया कि देश की लगातार घटती जनसंख्या भी युवा रोजगार में बदलाव का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है, हालाँकि एआई के आगमन ने इस प्रवृत्ति को और गहरा कर दिया है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह रिपोर्ट केवल कोरिया की नहीं, बल्कि वैश्विक श्रम बाजार की एक बड़ी प्रवृत्ति का प्रारंभिक संकेत मानी जा रही है। एआई-आधारित ऑटोमेशन और कंटेंट जनरेशन टूल्स के बढ़ते उपयोग के बीच नीति-निर्माताओं के सामने यह चुनौती है कि वे युवाओं को ऐसे कौशल से लैस करें जो एआई-प्रतिरोधी हों। अगले कुछ वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अनुभव और विशेषज्ञता का यह प्रीमियम टिकाऊ साबित होता है, या एआई वरिष्ठ कर्मचारियों की भूमिकाओं को भी चुनौती देने लगता है।