एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का घाटा वित्त वर्ष 26 में दोगुना, ₹22,238 करोड़ पर पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से ₹22,238 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ — जो पिछले वित्त वर्ष के ₹10,859 करोड़ के घाटे की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसी अवधि में दोनों एयरलाइंस की संयुक्त आय में भी करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वित्तीय आँकड़े: क्या कहती है वार्षिक रिपोर्ट
एयरलाइंस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 26 में दोनों कंपनियों की संयुक्त आय ₹71,870 करोड़ रही। इनमें से एयर इंडिया ने ₹51,452 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जबकि उसका शुद्ध घाटा ₹15,368 करोड़ रहा। वहीं, एयर इंडिया एक्सप्रेस का राजस्व ₹19,088 करोड़ और शुद्ध घाटा ₹6,767 करोड़ रहा।
शेयरधारिता का ढाँचा
वर्तमान में एयर इंडिया में 73.82 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा संस, 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सिंगापुर एयरलाइंस और 1.08 प्रतिशत हिस्सेदारी कर्मचारियों की है। कर्मचारियों की यह हिस्सेदारी 2022 में एयरलाइन के निजीकरण के दौरान शुरू की गई शेयर लाभ योजना के तहत दी गई थी।
चेयरमैन चंद्रशेखरन का बयान
शेयरधारकों को संबोधित करते हुए एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि एयरलाइन के कायाकल्प को दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, 'इतिहास की हर महान एयरलाइन दशकों में बनी है, कुछ तिमाहियों में नहीं।'
चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि एयर इंडिया का पुनरुद्धार 5 से 10 वर्षों की यात्रा है। उन्होंने बताया कि जब टाटा समूह ने एयरलाइन का अधिग्रहण किया था, तब उसकी स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी।
परिवर्तन की राह में चुनौतियाँ
चंद्रशेखरन के अनुसार, विमानों के पुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला में दीर्घकालिक बाधाएँ, पुराने सिस्टम और प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण, विमान बेड़े का नवीनीकरण, संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव और बड़ी संख्या में कुशल तकनीकी व विमानन पेशेवरों को तैयार करना — ये सभी इस परिवर्तन के अभिन्न अंग हैं।
गौरतलब है कि टाटा समूह ने 2022 में सरकार से एयरलाइन का अधिग्रहण करने के बाद इसके पुनरुद्धार के लिए कई अरब डॉलर का निवेश जारी रखा है। चंद्रशेखरन के बयान से संकेत मिलता है कि टर्नअराउंड में शुरुआती अनुमान से अधिक समय लग सकता है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज़ है और ईंधन लागत व परिचालन खर्चों का दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों की नज़र इस बात पर होगी कि टाटा समूह अगले वित्त वर्ष में घाटे की रफ्तार को थामने के लिए क्या रणनीतिक कदम उठाता है।