29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का घाटा वित्त वर्ष 26 में दोगुना, ₹22,238 करोड़ पर पहुँचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का घाटा वित्त वर्ष 26 में दोगुना, ₹22,238 करोड़ पर पहुँचा

सारांश

टाटा समूह के लिए एयर इंडिया का पुनरुद्धार अपेक्षा से कहीं अधिक महँगा साबित हो रहा है — वित्त वर्ष 26 में ₹22,238 करोड़ का संयुक्त घाटा और आय में 9% की गिरावट इस बात का संकेत है। चेयरमैन चंद्रशेखरन का कहना है कि यह 5 से 10 साल की यात्रा है, कुछ तिमाहियों की नहीं।

मुख्य बातें

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त शुद्ध घाटा ₹22,238 करोड़ रहा।
यह पिछले वित्त वर्ष के ₹10,859 करोड़ के घाटे से दोगुने से भी अधिक है।
दोनों एयरलाइंस की संयुक्त आय ₹71,870 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9% कम है।
एयर इंडिया का अकेले राजस्व ₹51,452 करोड़ और शुद्ध घाटा ₹15,368 करोड़ ; एयर इंडिया एक्सप्रेस का राजस्व ₹19,088 करोड़ और घाटा ₹6,767 करोड़ ।
चंद्रशेखरन ने कहा कि एयरलाइन का कायाकल्प 5 से 10 वर्षों की प्रक्रिया है।
टाटा संस की हिस्सेदारी 73.82% , सिंगापुर एयरलाइंस की 25.1% और कर्मचारियों की 1.08% ।

टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से ₹22,238 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ — जो पिछले वित्त वर्ष के ₹10,859 करोड़ के घाटे की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसी अवधि में दोनों एयरलाइंस की संयुक्त आय में भी करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

वित्तीय आँकड़े: क्या कहती है वार्षिक रिपोर्ट

एयरलाइंस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 26 में दोनों कंपनियों की संयुक्त आय ₹71,870 करोड़ रही। इनमें से एयर इंडिया ने ₹51,452 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जबकि उसका शुद्ध घाटा ₹15,368 करोड़ रहा। वहीं, एयर इंडिया एक्सप्रेस का राजस्व ₹19,088 करोड़ और शुद्ध घाटा ₹6,767 करोड़ रहा।

शेयरधारिता का ढाँचा

वर्तमान में एयर इंडिया में 73.82 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा संस, 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सिंगापुर एयरलाइंस और 1.08 प्रतिशत हिस्सेदारी कर्मचारियों की है। कर्मचारियों की यह हिस्सेदारी 2022 में एयरलाइन के निजीकरण के दौरान शुरू की गई शेयर लाभ योजना के तहत दी गई थी।

चेयरमैन चंद्रशेखरन का बयान

शेयरधारकों को संबोधित करते हुए एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि एयरलाइन के कायाकल्प को दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, 'इतिहास की हर महान एयरलाइन दशकों में बनी है, कुछ तिमाहियों में नहीं।'

चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि एयर इंडिया का पुनरुद्धार 5 से 10 वर्षों की यात्रा है। उन्होंने बताया कि जब टाटा समूह ने एयरलाइन का अधिग्रहण किया था, तब उसकी स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी।

परिवर्तन की राह में चुनौतियाँ

चंद्रशेखरन के अनुसार, विमानों के पुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला में दीर्घकालिक बाधाएँ, पुराने सिस्टम और प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण, विमान बेड़े का नवीनीकरण, संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव और बड़ी संख्या में कुशल तकनीकी व विमानन पेशेवरों को तैयार करना — ये सभी इस परिवर्तन के अभिन्न अंग हैं।

गौरतलब है कि टाटा समूह ने 2022 में सरकार से एयरलाइन का अधिग्रहण करने के बाद इसके पुनरुद्धार के लिए कई अरब डॉलर का निवेश जारी रखा है। चंद्रशेखरन के बयान से संकेत मिलता है कि टर्नअराउंड में शुरुआती अनुमान से अधिक समय लग सकता है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज़ है और ईंधन लागत व परिचालन खर्चों का दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों की नज़र इस बात पर होगी कि टाटा समूह अगले वित्त वर्ष में घाटे की रफ्तार को थामने के लिए क्या रणनीतिक कदम उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

238 करोड़ का यह घाटा महज़ एक वित्तीय आँकड़ा नहीं — यह टाटा समूह की एयर इंडिया दांव की वास्तविक लागत का पहला पूर्ण वार्षिक आकलन है। चंद्रशेखरन का '5 से 10 साल' वाला बयान ईमानदार है, लेकिन यह उस कथा को भी चुनौती देता है जिसमें निजीकरण को त्वरित टर्नअराउंड की गारंटी के रूप में पेश किया गया था। असली सवाल यह है कि आपूर्ति श्रृंखला बाधाएँ और बेड़े के नवीनीकरण की लागत कब तक घाटे को खींचती रहेगी — और क्या सिंगापुर एयरलाइंस जैसे अल्पसंख्यक शेयरधारक इस दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ धैर्य बनाए रखेंगे।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का वित्त वर्ष 26 में कुल घाटा कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों एयरलाइंस का संयुक्त शुद्ध घाटा ₹22,238 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹10,859 करोड़ के घाटे से दोगुने से भी अधिक है। इसी दौरान दोनों की संयुक्त आय में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज की गई।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का अलग-अलग घाटा कितना है?
एयर इंडिया का वित्त वर्ष 26 में राजस्व ₹51,452 करोड़ और शुद्ध घाटा ₹15,368 करोड़ रहा। एयर इंडिया एक्सप्रेस का राजस्व ₹19,088 करोड़ और शुद्ध घाटा ₹6,767 करोड़ रहा।
एयर इंडिया में टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस की कितनी हिस्सेदारी है?
वर्तमान में टाटा संस की एयर इंडिया में 73.82 प्रतिशत, सिंगापुर एयरलाइंस की 25.1 प्रतिशत और कर्मचारियों की 1.08 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कर्मचारियों की यह हिस्सेदारी 2022 के निजीकरण के दौरान शुरू की गई शेयर लाभ योजना के तहत दी गई थी।
एयर इंडिया का टर्नअराउंड कब तक होगा?
एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के अनुसार, एयरलाइन का कायाकल्प 5 से 10 वर्षों की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास की हर महान एयरलाइन दशकों में बनी है, कुछ तिमाहियों में नहीं।
एयर इंडिया के घाटे के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
चंद्रशेखरन ने विमानों के पुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ, पुराने सिस्टम का आधुनिकीकरण, विमान बेड़े का नवीनीकरण, संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव और कुशल पेशेवरों की तैयारी को प्रमुख चुनौतियाँ बताया। टाटा समूह 2022 में अधिग्रहण के बाद से एयरलाइन में कई अरब डॉलर का निवेश कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले