एप्पल का भारत के रिन्यूएबल एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹100 करोड़ निवेश का ऐलान, 150 MW क्षमता का लक्ष्य

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एप्पल का भारत के रिन्यूएबल एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹100 करोड़ निवेश का ऐलान, 150 MW क्षमता का लक्ष्य

सारांश

एप्पल ने भारत में ₹100 करोड़ का रिन्यूएबल एनर्जी दांव लगाया है — क्लीनमैक्स के साथ 150 मेगावाट क्षमता, 1.5 लाख घरों को बिजली, और 2030 कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य। यह महज़ ESG घोषणा नहीं, बल्कि भारत में तेज़ी से बढ़ती आपूर्ति श्रृंखला को हरित बनाने की रणनीतिक ज़रूरत है।

मुख्य बातें

एप्पल ने 7 मई 2026 को भारत के रिन्यूएबल एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹100 करोड़ निवेश की घोषणा की।
निवेश क्लीनमैक्स के सहयोग से होगा, जिससे 150 मेगावाट से अधिक नई स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बनेगी।
नई क्षमता लगभग 1.5 लाख भारतीय घरों को प्रतिवर्ष बिजली देने में सक्षम होगी।
यह पहल एप्पल के 2030 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के वैश्विक लक्ष्य का हिस्सा है।
एप्पल WWF-India और Acumen के साथ प्लास्टिक प्रदूषण और हरित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी साझेदारी कर रही है।

अमेरिकी टेक्नोलॉजी दिग्गज एप्पल ने 7 मई 2026 को भारत के रिन्यूएबल एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹100 करोड़ के निवेश की घोषणा की, जो कंपनी के 2030 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के वैश्विक लक्ष्य का हिस्सा है। यह निवेश रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी क्लीनमैक्स के सहयोग से किया जाएगा, जिससे देशभर में 150 मेगावाट से अधिक की नई स्वच्छ ऊर्जा क्षमता तैयार होगी।

निवेश में क्या शामिल है

एप्पल के अनुसार, प्रस्तावित 150 मेगावाट से अधिक की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता लगभग 1.5 लाख भारतीय घरों को प्रतिवर्ष बिजली देने के लिए पर्याप्त होगी। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में इस क्षमता को और विस्तार दिया जा सकता है। यह पहल विशेष रूप से भारत में एप्पल की आपूर्ति श्रृंखला को रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित करने पर केंद्रित है।

क्लीनमैक्स के साथ पुरानी साझेदारी का विस्तार

गौरतलब है कि एप्पल और क्लीनमैक्स के बीच यह पहली साझेदारी नहीं है। इससे पहले दोनों कंपनियों ने रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम किया था, जिसके तहत भारत में एप्पल के कार्यालयों और खुदरा स्टोरों को 100 प्रतिशत रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित करने की व्यवस्था की गई थी। नया निवेश इसी रिश्ते को एक बड़े औद्योगिक पैमाने पर ले जाता है।

पर्यावरण प्रतिबद्धता पर एप्पल का बयान

एप्पल की पर्यावरण और आपूर्ति श्रृंखला नवाचार की उपाध्यक्ष सारा चैंडलर ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

आपूर्ति श्रृंखला को कार्बन-अनुपालक बनाना यूरोपीय और अमेरिकी नियामक दबाव के लिहाज़ से ज़रूरी हो गया है। हालाँकि ₹100 करोड़ की राशि एप्पल के वैश्विक राजस्व के सामने नगण्य है, लेकिन क्लीनमैक्स जैसी स्थानीय कंपनी के साथ संरचित साझेदारी यह दर्शाती है कि यह एक दीर्घकालिक रणनीतिक कदम है, न कि महज़ PR अभ्यास। असली परीक्षण यह होगा कि क्या यह 150 मेगावाट क्षमता वास्तव में आपूर्तिकर्ताओं तक पहुँचती है या सिर्फ एप्पल के अपने परिचालन तक सीमित रहती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एप्पल भारत में रिन्यूएबल एनर्जी में कितना निवेश कर रहा है?
एप्पल ने भारत के रिन्यूएबल एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹100 करोड़ निवेश करने की घोषणा की है। यह निवेश क्लीनमैक्स के सहयोग से किया जाएगा और इससे 150 मेगावाट से अधिक नई स्वच्छ ऊर्जा क्षमता तैयार होगी।
एप्पल और क्लीनमैक्स की साझेदारी क्या है?
एप्पल और क्लीनमैक्स पहले भी रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स पर साझेदारी कर चुके हैं, जिसके तहत भारत में एप्पल के कार्यालयों और खुदरा स्टोरों को 100 प्रतिशत रिन्यूएबल एनर्जी से चलाया जा रहा है। नया ₹100 करोड़ का निवेश इस साझेदारी को बड़े औद्योगिक पैमाने पर ले जाता है।
एप्पल का 2030 कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य क्या है?
एप्पल ने 2030 तक अपने पूरे परिचालन क्षेत्र — उत्पाद निर्माण से लेकर आपूर्ति श्रृंखला तक — को कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य रखा है। भारत में यह रिन्यूएबल एनर्जी निवेश उसी वैश्विक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
इस निवेश से भारत को क्या फायदा होगा?
150 मेगावाट से अधिक की नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता लगभग 1.5 लाख भारतीय घरों को प्रतिवर्ष बिजली दे सकती है। इसके अलावा, एप्पल WWF-India और Acumen के साथ मिलकर प्लास्टिक प्रदूषण कम करने और हरित उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी काम करेगी।
एप्पल भारत में पर्यावरण के लिए और क्या कर रही है?
रिन्यूएबल एनर्जी निवेश के अलावा, एप्पल WWF-India के साथ रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट प्रबंधन पहलों पर काम कर रही है। साथ ही, Acumen के साथ साझेदारी में अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्योजी कृषि और चक्रीय अर्थव्यवस्था क्षेत्र में काम करने वाले शुरुआती हरित उद्यमों को अनुदान और मार्गदर्शन दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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