4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बेंगलुरु को डीप-टेक का ग्लोबल हब बनाएगा कर्नाटक: CM डीके शिवकुमार का 'बेंगलुरु इंडिया नैनो 2026' में ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बेंगलुरु को डीप-टेक का ग्लोबल हब बनाएगा कर्नाटक: CM डीके शिवकुमार का 'बेंगलुरु इंडिया नैनो 2026' में ऐलान

सारांश

बेंगलुरु की 'सिलिकॉन वैली' पहचान अब डीप-टेक की ओर विस्तार पा रही है। CM डीके शिवकुमार ने 'बेंगलुरु इंडिया नैनो 2026' में AI, नैनो-टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और क्वांटम साइंस में बेंगलुरु को वैश्विक केंद्र बनाने का संकल्प लिया — IISc की ऐतिहासिक विरासत से प्रेरणा लेकर।

मुख्य बातें

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 4 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में 'बेंगलुरु इंडिया नैनो 2026' सम्मेलन का उद्घाटन किया।
राज्य सरकार ने AI, नैनो-टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी और क्वांटम टेक्नोलॉजी में बेंगलुरु को ग्लोबल डीप-टेक हब बनाने का संकल्प लिया।
शिवकुमार ने 1893 में जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद की ऐतिहासिक भेंट और IISc की स्थापना का उल्लेख कर बेंगलुरु की वैज्ञानिक विरासत को रेखांकित किया।
महाराजा कृष्ण राजा वाडियार चतुर्थ द्वारा दान की गई 370 एकड़ भूमि पर स्थापित IISc को डीप-टेक महत्वाकांक्षा की नींव बताया गया।
सरकार एकेडेमिया, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोग से वैज्ञानिक विचारों को प्रयोगशाला से बाज़ार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध।
राव के वैज्ञानिक योगदान को श्रद्धांजलि दी गई।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 4 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नैनो-टेक्नोलॉजी सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 'बेंगलुरु इंडिया नैनो 2026' का उद्घाटन करते हुए घोषणा की कि कर्नाटक सरकार नैनो-टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसी डीप-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बेंगलुरु को वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य का सुदृढ़ इकोसिस्टम — जिसमें अग्रणी शोध संस्थान, स्टार्टअप, बहुराष्ट्रीय R&D केंद्र और विश्वविद्यालय शामिल हैं — बेंगलुरु को डीप-टेक इनोवेशन का वैश्विक गंतव्य बनाने में सक्षम बनाता है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री ने उद्घाटन भाषण में स्पष्ट किया कि नैनो-टेक्नोलॉजी अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा, 'नैनो-टेक्नोलॉजी अब सिर्फ रिसर्च लैबोरेटरी तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी बुनियादी टेक्नोलॉजी बन गई है जो हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एनर्जी, एग्रीकल्चर, मोबिलिटी, एयरोस्पेस, डिफेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में बदलाव ला रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य AI, नैनो-टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मटीरियल्स के संयोजन से निर्मित होगा।

बेंगलुरु की वैज्ञानिक विरासत

शिवकुमार ने बेंगलुरु की ऐतिहासिक वैज्ञानिक नींव को रेखांकित करते हुए 1893 में जापान से अमेरिका जाने वाले जहाज पर उद्योगपति जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद के बीच हुई ऐतिहासिक भेंट का स्मरण कराया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक शोध और राष्ट्र-निर्माण पर उस संवाद की परिणति इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की स्थापना के रूप में हुई। यह संस्थान तत्कालीन मैसूर साम्राज्य के सहयोग से साकार हुआ, जहाँ महाराजा कृष्ण राजा वाडियार चतुर्थ ने बेंगलुरु में लगभग 370 एकड़ भूमि दान की और संस्थान को वित्तीय एवं आधारभूत ढाँचागत सहायता प्रदान की।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कर्नाटक की महत्वाकांक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश केवल निवेश के लिए नहीं, बल्कि वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जो भी एडवांस्ड मटीरियल्स, नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और AI-आधारित मैन्युफैक्चरिंग में आगे रहेगा, वही आने वाले दशकों की वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देगा। कर्नाटक उन अग्रणियों में शामिल होना चाहता है।' उन्होंने वैश्विक कंपनियों से बेंगलुरु में रूटीन कार्यों से आगे बढ़कर मूलभूत नवाचार में निवेश करने का आग्रह किया।

आम जनता और उद्योग पर असर

शिवकुमार ने नैनो-टेक्नोलॉजी के व्यापक सामाजिक प्रभावों की चर्चा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में टारगेटेड ड्रग डिलीवरी और प्रिसिजन मेडिसिन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति लाने, स्मार्ट फर्टिलाइजर और कुशल जल प्रबंधन से कृषि को उन्नत करने तथा स्वच्छ ऊर्जा और सतत मैन्युफैक्चरिंग को सक्षम बनाने की अपार संभावनाएँ हैं। राज्य सरकार एकेडेमिया, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोग को प्रोत्साहित कर वैज्ञानिक विचारों को प्रयोगशाला से बाज़ार तक पहुँचाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्रद्धांजलि और युवाओं को संदेश

मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिक उत्कृष्टता में भारत रत्न प्रोफेसर सी.एन.आर. राव के आजीवन योगदान को नमन करते हुए कहा कि उनका दृष्टिकोण शोधकर्ताओं की पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। युवा वैज्ञानिकों और छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने बड़े सपने देखने और चुनौतीपूर्ण वैज्ञानिक समस्याओं पर कार्य करने का आह्वान किया तथा सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे बेंगलुरु ने सॉफ्टवेयर इनोवेशन में भारत की 'सिलिकॉन वैली' की पहचान बनाई, वैसे ही इसका अगला अध्याय डीप-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लिखा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ एक परिचित प्रश्न भी उठता है — नीतिगत इरादे और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई। भारत के सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक क्षेत्र अभी वैश्विक प्रतिस्पर्धियों — ताइवान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका — से काफी पीछे हैं, और केवल इकोसिस्टम की मौजूदगी पर्याप्त नहीं है। असली परीक्षा यह है कि क्या राज्य सरकार 'लैब-टू-मार्केट' पाइपलाइन के लिए ठोस वित्तपोषण तंत्र, नियामक सरलीकरण और प्रतिभा-प्रतिधारण नीतियाँ प्रस्तुत करती है। IISc की विरासत गर्व का स्रोत है, पर भविष्य की दौड़ में प्रेरणा से अधिक निवेश और जवाबदेही की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु इंडिया नैनो 2026 सम्मेलन क्या है?
'बेंगलुरु इंडिया नैनो 2026' भारत का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नैनो-टेक्नोलॉजी सम्मेलन एवं प्रदर्शनी है, जिसका आयोजन 4 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में हुआ। इसका उद्घाटन कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किया और इसमें डीप-टेक इनोवेशन पर केंद्रित चर्चाएँ और प्रदर्शनियाँ शामिल रहीं।
कर्नाटक सरकार बेंगलुरु को डीप-टेक हब कैसे बनाएगी?
कर्नाटक सरकार एकेडेमिया, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर वैज्ञानिक विचारों को प्रयोगशाला से व्यावसायिक उत्पाद तक पहुँचाने की प्रक्रिया को गति देने की योजना बना रही है। राज्य के मौजूदा इकोसिस्टम में IISc जैसे शोध संस्थान, बहुराष्ट्रीय R&D केंद्र और स्टार्टअप शामिल हैं जो इस लक्ष्य की नींव हैं।
CM शिवकुमार ने IISc की स्थापना का ज़िक्र क्यों किया?
मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु की वैज्ञानिक विरासत को रेखांकित करने के लिए 1893 में जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद की ऐतिहासिक भेंट का उल्लेख किया, जिससे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की स्थापना की प्रेरणा मिली। महाराजा कृष्ण राजा वाडियार चतुर्थ ने इसके लिए 370 एकड़ भूमि दान की थी।
नैनो-टेक्नोलॉजी से आम जनता को क्या फायदा होगा?
नैनो-टेक्नोलॉजी टारगेटेड ड्रग डिलीवरी और प्रिसिजन मेडिसिन के ज़रिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, स्मार्ट फर्टिलाइजर और जल प्रबंधन से कृषि को उन्नत करने और स्वच्छ ऊर्जा व सतत मैन्युफैक्चरिंग को संभव बनाने में सहायक हो सकती है। ये सभी क्षेत्र आम नागरिकों के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
बेंगलुरु को डीप-टेक हब बनाने की यह पहल पहले की घोषणाओं से कैसे अलग है?
CM शिवकुमार ने इस बार AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक और नैनो-टेक्नोलॉजी को एकीकृत रूप से संबोधित किया, जो पहले की अलग-अलग क्षेत्रीय नीतियों से व्यापक है। हालाँकि, ठोस वित्तीय आवंटन या समयसीमा की घोषणा इस अवसर पर नहीं की गई, जिससे क्रियान्वयन की रूपरेखा अभी स्पष्ट होनी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले