बेंगलुरु 2035 तक दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला शहर बनेगा: सैविल्स रिपोर्ट

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बेंगलुरु 2035 तक दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला शहर बनेगा: सैविल्स रिपोर्ट

सारांश

सैविल्स की 245 शहरों वाली रिपोर्ट में बेंगलुरु को 2035 तक दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला बड़ा शहर बताया गया है। GCC विस्तार, युवा कार्यबल और बढ़ते निजी इक्विटी निवेश — जो 2026 की पहली तिमाही में 66% उछलकर $1.2 अरब पहुँचा — इस उभार के पीछे हैं।

मुख्य बातें

सैविल्स की रिपोर्ट में 245 शहरों के विश्लेषण के बाद बेंगलुरु को 2035 तक दुनिया का सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला बड़ा शहर बताया गया।
शीर्ष 20 सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले शहरों में से 85% एशिया प्रशांत क्षेत्र के हैं; शीर्ष 50 में तीन-चौथाई भी इसी क्षेत्र से।
भारत , वियतनाम और चीन इंडेक्स में अग्रणी; इंडेक्स में केवल $50 अरब + GDP वाले शहर शामिल।
भारत के रियल एस्टेट में निजी इक्विटी निवेश 2026 की पहली तिमाही में 66% बढ़कर $1.2 अरब हुआ।
GCC विस्तार और ग्रेड-A कार्यस्थलों की माँग भारत में कार्यालय बाज़ार को मज़बूत बनाए हुए है।

बेंगलुरु को 2035 तक दुनिया का सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला बड़ा शहर बनने का दर्जा मिल सकता है। प्रॉपर्टी कंसल्टिंग फर्म सैविल्स की ताज़ा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है, जिसमें 245 शहरों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का तेज़ी से विस्तार और उच्च-कुशल प्रतिभाओं की उपलब्धता बेंगलुरु की इस असाधारण वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।

इंडेक्स में भारत की मज़बूत उपस्थिति

सैविल्स के इस इंडेक्स में शीर्ष 20 शहरों में कई भारतीय शहरों को स्थान मिला है। रिपोर्ट में पाया गया कि सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले शहरों में से 85 प्रतिशत एशिया प्रशांत क्षेत्र के हैं। शीर्ष 50 शहरों में से तीन-चौथाई भी इसी क्षेत्र से हैं, जिनमें भारत, वियतनाम और चीन अग्रणी भूमिका में हैं। गौरतलब है कि इस इंडेक्स में केवल उन्हीं शहरों को शामिल किया गया जिनकी GDP 2025 में $50 अरब या उससे अधिक थी।

विकास के प्रमुख चालक

रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष बीस में शामिल भारतीय शहरों की वृद्धि के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं। युवा और कुशल कार्यबल, बढ़ता आंतरिक प्रवासन और $70,000 से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों की संख्या में वृद्धि इन शहरों को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना रही है। शहरों का मूल्यांकन 2035 तक GDP वृद्धि, व्यक्तिगत संपत्ति वृद्धि, जनसंख्या निर्भरता अनुपात और आंतरिक प्रवासन जैसे आर्थिक संकेतकों के आधार पर किया गया।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

सैविल्स इंडिया के रिसर्च एंड कंसल्टिंग के प्रबंध निदेशक अरविंद नंदन ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में देखना ज़रूरी है — 'सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला' होने का अर्थ यह नहीं कि विकास समावेशी या टिकाऊ है। बेंगलुरु पहले से ही जलसंकट, यातायात जाम और बुनियादी ढाँचे की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। GCC और रियल एस्टेट बूम से जो समृद्धि आ रही है, वह मुख्यतः उच्च-कुशल तबके तक सीमित है, जबकि शहर का बड़ा हिस्सा बुनियादी सेवाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। असली सवाल यह है कि क्या नीति-निर्माता इस विकास को शहर की क्षमता के अनुरूप ढाल पाएँगे — या बेंगलुरु महज़ एक चमकदार इंडेक्स नंबर बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैविल्स रिपोर्ट में बेंगलुरु को 2035 तक सबसे तेज़ शहर क्यों बताया गया?
सैविल्स के 245 शहरों के इंडेक्स में बेंगलुरु को GCC का तेज़ विस्तार, युवा और कुशल कार्यबल तथा उच्च आय वाले परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण शीर्ष स्थान दिया गया है। ये कारक मिलकर शहर को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाते हैं।
सैविल्स के इंडेक्स में किन शहरों को शामिल किया गया?
इंडेक्स में केवल उन्हीं शहरों को शामिल किया गया जिनकी GDP 2025 में $50 अरब या उससे अधिक थी। कुल 245 शहरों का आकलन किया गया, जिनमें से शीर्ष 20 में कई भारतीय शहर शामिल हैं।
भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश कितना बढ़ा?
सैविल्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में निजी इक्विटी निवेश 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 66 प्रतिशत बढ़कर $1.2 अरब हो गया। यह वृद्धि GCC विस्तार और ग्रेड-A कार्यस्थलों की बढ़ती माँग से प्रेरित है।
एशिया प्रशांत क्षेत्र के शहर इस इंडेक्स में इतने आगे क्यों हैं?
सैविल्स के अनुसार, सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले शहरों में से 85 प्रतिशत एशिया प्रशांत क्षेत्र के हैं। इसके पीछे युवा जनसंख्या, बढ़ता शहरीकरण, आंतरिक प्रवासन और भारत, वियतनाम व चीन जैसे देशों में वैश्विक कंपनियों का बढ़ता निवेश प्रमुख कारण हैं।
बेंगलुरु में GCC का विस्तार रियल एस्टेट को कैसे प्रभावित कर रहा है?
GCC विस्तार के कारण बेंगलुरु में कार्यालय स्थानों की माँग मज़बूत बनी हुई है, और कंपनियाँ ग्रेड-A, टिकाऊ कार्यस्थलों को प्राथमिकता दे रही हैं। इससे रियल एस्टेट बाज़ार में निवेशकों और डेवलपर्स के लिए मज़बूत अवसर पैदा हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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