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क्या भारत फास्ट पेमेंट में ग्लोबल लीडर है? जुलाई में कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन 19 अरब के पार

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क्या भारत फास्ट पेमेंट में ग्लोबल लीडर है? जुलाई में कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन 19 अरब के पार

सारांश

भारत ने फास्ट पेमेंट में वैश्विक नेतृत्व हासिल किया है। जुलाई में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 19 अरब को पार कर गई, जो डिजिटल भुगतान के लिए एक नया मानक स्थापित कर रही है। जानें यूपीआई की इस सफलता की कहानी और इसके पीछे के रहस्यों को!

मुख्य बातें

यूपीआई की लोकप्रियता में तेजी से वृद्धि हो रही है।
जुलाई में 19.47 अरब लेनदेन हुए।
यूपीआई ने वीजा को पीछे छोड़ दिया है।
बैंकिंग सिस्टम में 675 बैंक शामिल हैं।
भारत का यूपीआई दुनिया का नंबर वन रियल-टाइम भुगतान सिस्टम है।

मुंबई, 3 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मोबाइल के माध्यम से दिन के चौबीसों घंटे और साल के 365 दिन तुरंत मनी ट्रांसफर की सुविधा के साथ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई के माध्यम से लेनदेन की संख्या बीते महीने जुलाई में 19.47 अरब के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई, जो कि सालाना आधार पर 35 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

इसी तरह, यूपीआई के जरिए लेनदेन का कुल मूल्य 25.08 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो मई में दर्ज 25.14 लाख करोड़ रुपए के बाद दूसरा उच्चतम स्तर था। लेनदेन के मूल्य में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

एनपीसीआई के अनुसार, जुलाई में यूपीआई के जरिए एवरेज डेली ट्रांजैक्शन काउंट 628 मिलियन और एवरेज डेली ट्रांजैक्शन अमाउंट 80,919 करोड़ रुपए दर्ज किया गया।

अकेले जून 2025 में यूपीआई के जरिए 24.04 लाख करोड़ रुपए से अधिक के भुगतान किए गए और कुल 18.40 अरब लेनदेन किए गए। बीते साल इसी महीने 13.88 अरब लेन-देन की तुलना में हुई यह प्रगति स्पष्ट है। केवल एक वर्ष में इसमें लगभग 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से हाल ही में जारी किए गए नोट, 'ग्रॉइंग रिटेल डिजिटल पेमेंट्स: द वैल्यू ऑफ इंटरऑपरेबिलिटी' के अनुसार, भारत फास्ट पेमेंट में ग्लोबल लीडर बनकर उभरा है। इस बदलाव का मूल आधार यूपीआई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से 2016 में लॉन्च किए गए यूपीआई ने देश में लोगों के पैसे भेजने और प्राप्त करने के तरीके को बदल दिया है।

यूपीआई सिस्टम अब 491 मिलियन लोगों और 65 मिलियन कारोबारियों को सेवाएं देती है। यह 675 बैंक को एक ही मंच पर जोड़ता है, जिससे लोग बिना किसी चिंता के आसानी से भुगतान कर सकते हैं, बिना यह सोचे कि वे किस बैंक के ग्राहक हैं।

भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस दुनिया का नंबर वन रियल-टाइम भुगतान सिस्टम भी बन गया है। यूपीआई ने रोजाना लेनदेन की प्रोसेसिंग में वीजा को पीछे छोड़ते हुए बढ़त हासिल कर ली है। वीजा के 63 करोड़ 90 लाख ट्रांजैक्शन के मुकाबले यूपीआई हर दिन 64 करोड़ से अधिक लेनदेन संभालता है। यूपीआई ने यह उपलब्धि केवल नौ वर्षों में हासिल की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह आर्थिक समावेशिता को भी बढ़ावा देता है। हमें इस दिशा में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई के कितने यूजर्स हैं?
वर्तमान में यूपीआई सिस्टम 491 मिलियन लोगों को सेवाएं देती है।
यूपीआई लेनदेन की संख्या में वृद्धि का क्या कारण है?
यूपीआई की सरलता और सुविधा के कारण इसकी लोकप्रियता में तेजी से वृद्धि हुई है।
भारत में यूपीआई का महत्व क्या है?
यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को सरल और सुलभ बना दिया है, जिससे आर्थिक विकास में सहायता मिली है।
यूपीआई के जरिए लेनदेन का कुल मूल्य क्या है?
जुलाई में यूपीआई के जरिए लेनदेन का कुल मूल्य 25.08 लाख करोड़ रुपए था।
राष्ट्र प्रेस
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