वडिनार शिप रिपेयर परियोजना: CCEA ने ₹1,570 करोड़ की मंजूरी दी, 300 मीटर तक के जहाजों की मरम्मत होगी देश में
सारांश
मुख्य बातें
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने मंगलवार, 5 मई 2026 को गुजरात के वडिनार में अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित करने के लिए ₹1,570 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस निर्णय को देश के समुद्री क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस परियोजना को दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड संयुक्त रूप से क्रियान्वित करेंगे।
परियोजना में क्या शामिल है
CCEA के बाद जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना ब्राउनफील्ड मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसमें 650 मीटर लंबी जेट्टी, दो बड़े फ्लोटिंग ड्राई डॉक, वर्कशॉप और अन्य समुद्री अवसंरचना शामिल होगी। यह सुविधा 300 मीटर तक के जहाजों की मरम्मत करने में सक्षम होगी, जो भारत में अभी तक उपलब्ध नहीं थी।
गौरतलब है कि फिलहाल देश में 230 मीटर से बड़े जहाजों की मरम्मत के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं है, जिससे बड़े जहाजों को मरम्मत के लिए विदेश भेजना पड़ता है। यह नई सुविधा इस कमी को सीधे तौर पर दूर करेगी और विदेशी मुद्रा की बचत सुनिश्चित करेगी।
वडिनार को क्यों चुना गया
वडिनार की गहरी समुद्री गहराई, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से सीधी कनेक्टिविटी और मुंद्रा व कांडला जैसे प्रमुख बंदरगाहों से निकटता इसे बड़े और विदेशी जहाजों की मरम्मत के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है। पश्चिमी तट पर इस सुविधा के आने से भारतीय बंदरगाहों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और जहाजों के टर्नअराउंड टाइम में भी उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।
रोजगार और आर्थिक प्रभाव
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 290 प्रत्यक्ष और करीब 1,100 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। ये रोजगार जहाज मरम्मत, लॉजिस्टिक्स और संबंधित उद्योगों में होंगे। इसके अलावा, परियोजना कौशल विकास के नए अवसर भी सृजित करेगी और एमएसएमई तथा समुद्री सहायक सेवाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
राष्ट्रीय समुद्री लक्ष्यों से जुड़ाव
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने दीर्घकालिक समुद्री विजन को साकार करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है। बयान में स्पष्ट किया गया है कि वडिनार परियोजना 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' और 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' दोनों के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगी। यह पहल क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी गति देगी और भारत को वैश्विक जहाज मरम्मत बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।