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कैपिटल ग्रुप ने अदाणी पोर्ट्स, पावर, ग्रीन में ₹16,600 करोड़ से अधिक लगाए, रिलायंस में हिस्सेदारी घटाई

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कैपिटल ग्रुप ने अदाणी पोर्ट्स, पावर, ग्रीन में ₹16,600 करोड़ से अधिक लगाए, रिलायंस में हिस्सेदारी घटाई

सारांश

अमेरिकी दिग्गज निवेश फर्म कैपिटल ग्रुप ने अदाणी पोर्ट्स, पावर और ग्रीन एनर्जी में 2 अरब डॉलर लगाए — और रिलायंस में हिस्सेदारी 2017 के शिखर से 80% से अधिक घटा दी। यह भारत के दो सबसे बड़े कारोबारी समूहों में विदेशी संस्थागत भरोसे का साफ़ विभाजन दर्शाता है।

मुख्य बातें

कैपिटल ग्रुप ने अदाणी पोर्ट्स (APSEZ) , अदाणी पावर और अदाणी ग्रीन एनर्जी में कुल 2 अरब डॉलर (लगभग ₹16,600 करोड़ ) की हिस्सेदारी हासिल की।
5 मई को ओपन मार्केट से APSEZ में करीब 2% हिस्सेदारी ₹7,486 करोड़ ( 776 मिलियन डॉलर ) में खरीदी गई।
रिलायंस इंडस्ट्रीज में कैपिटल ग्रुप की हिस्सेदारी मार्च 2017 के शिखर 75.5 करोड़ शेयर से घटकर अब लगभग 14.2 करोड़ शेयर रह गई है।
RIL के शेयर में बीते एक वर्ष में 8.36% की गिरावट दर्ज की गई है।
कैपिटल ग्रुप और अदाणी समूह दोनों ने रिपोर्टों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

अमेरिका की दिग्गज निवेश फर्म कैपिटल ग्रुप ने अदाणी समूह की तीन प्रमुख कंपनियों — अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ), अदाणी पावर और अदाणी ग्रीन एनर्जी — में कुल 2 अरब डॉलर (लगभग ₹16,600 करोड़) की हिस्सेदारी हासिल की है। इसके साथ ही, रिपोर्टों के अनुसार फर्म ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में अपना निवेश पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से घटाया है। यह जानकारी 22 मई 2025 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में सामने आई।

अदाणी समूह में निवेश का ब्यौरा

रिपोर्टों के अनुसार, कैपिटल ग्रुप ने 5 मई को खुले बाज़ार (ओपन मार्केट) से APSEZ में करीब दो प्रतिशत हिस्सेदारी ₹7,486 करोड़ (776 मिलियन डॉलर) में खरीदी। मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया कि अदाणी पावर और अदाणी ग्रीन एनर्जी में भी फर्म की हिस्सेदारी बढ़ाई गई है, जिससे तीनों कंपनियों में कुल निवेश 2 अरब डॉलर के पार पहुँच गया।

कैपिटल ग्रुप और अदाणी समूह — दोनों में से किसी ने भी इन रिपोर्टों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालाँकि, कैपिटल ग्रुप के प्रवक्ता ने कहा कि वे 'व्यक्तिगत शेयरों या शेयरधारिता पर टिप्पणी करने में असमर्थ हैं।'

अदाणी शेयरों में तेजी और निवेशकों का लौटता भरोसा

रिपोर्ट में अदाणी समूह के शेयरों में हाल की तेजी का संदर्भ दिया गया, जो महीनों की नियामक जाँच के समाप्त होने के बाद निवेशकों के विश्वास की वापसी का संकेत माना जा रहा है। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ आरोपों को वापस लेने के अमेरिकी निर्णय को विशेषज्ञों ने समूह के लिए एक 'बड़ी जीत' बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैश्विक पूंजी बाज़ारों तक समूह की पहुँच आसान होगी और संस्थागत निवेशकों का भरोसा और मज़बूत होगा।

गौरतलब है कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद 2023 की शुरुआत में अदाणी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आई थी। उसके बाद से समूह ने अपने वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और ऋण घटाने पर ज़ोर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप संस्थागत निवेशकों की वापसी देखी जा रही है।

रिलायंस में घटती हिस्सेदारी

रिपोर्टों में संकलित आँकड़ों के अनुसार, कैपिटल ग्रुप के पास अभी रिलायंस इंडस्ट्रीज के लगभग 14.2 करोड़ शेयर हैं, जबकि छह साल पहले यह संख्या करीब 50 करोड़ थी। मार्च 2017 में फर्म की RIL में हिस्सेदारी 75.5 करोड़ शेयरों के शिखर पर थी। यानी पिछले आठ वर्षों में यह हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में बीते एक वर्ष में 8.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। RIL के टेलीकॉम और रिटेल कारोबार में वृद्धि की रफ़्तार धीमी पड़ने और नए ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की लंबी समयसीमा को कुछ विश्लेषक इस सतर्क रुख के पीछे का कारण मानते हैं।

भारतीय बाज़ार में विदेशी निवेश का बदलता रुझान

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक संस्थागत निवेशक भारत के बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा क्षेत्र में अवसर तलाश रहे हैं। कैपिटल ग्रुप का अदाणी के बंदरगाह, बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा व्यवसायों पर दाँव लगाना इस व्यापक प्रवृत्ति के अनुरूप है, जहाँ दीर्घकालिक अवसंरचना परिसंपत्तियाँ वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।

आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य बड़े विदेशी संस्थागत निवेशक भी अदाणी समूह में अपनी उपस्थिति बढ़ाते हैं, और क्या RIL अपने शेयर मूल्य में गिरावट को रोकने के लिए कोई नई रणनीतिक घोषणा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या यह एकल फर्म का निर्णय है या व्यापक संस्थागत पुनर्मूल्यांकन की शुरुआत। रिलायंस के लिए चिंता की बात यह है कि हिस्सेदारी में यह कटौती धीरे-धीरे, वर्षों में हुई है — जो किसी एकमुश्त निकासी से अधिक गहरे संरचनात्मक पुनर्विचार की ओर इशारा करती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि RIL के नए ऊर्जा और रिटेल दांव की दीर्घकालिक अनिश्चितता ने विदेशी संस्थागत निवेशकों को सतर्क किया है, जबकि अदाणी की अवसंरचना-केंद्रित संपत्तियाँ स्थिर नकदी प्रवाह के कारण आकर्षक बन रही हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैपिटल ग्रुप ने अदाणी समूह में कितना निवेश किया है?
रिपोर्टों के अनुसार, कैपिटल ग्रुप ने अदाणी पोर्ट्स (APSEZ), अदाणी पावर और अदाणी ग्रीन एनर्जी में मिलाकर कुल 2 अरब डॉलर (लगभग ₹16,600 करोड़) की हिस्सेदारी हासिल की है। इसमें से 5 मई को APSEZ में ₹7,486 करोड़ में करीब 2% हिस्सेदारी ओपन मार्केट से खरीदी गई।
कैपिटल ग्रुप ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में हिस्सेदारी क्यों घटाई?
रिपोर्टों के अनुसार, कैपिटल ग्रुप का रिलायंस में निवेश 'पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से घटा है।' RIL के शेयर में बीते एक वर्ष में 8.36% की गिरावट भी दर्ज हुई है। कैपिटल ग्रुप ने इस पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज में कैपिटल ग्रुप के शेयर कितने रह गए हैं?
संकलित आँकड़ों के अनुसार, कैपिटल ग्रुप के पास अभी RIL के लगभग 14.2 करोड़ शेयर हैं। मार्च 2017 में यह संख्या 75.5 करोड़ के शिखर पर थी, यानी आठ वर्षों में 80% से अधिक की कमी आई है।
अदाणी समूह में विदेशी निवेशकों का भरोसा क्यों लौट रहा है?
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ आरोपों को वापस लेने के अमेरिकी निर्णय और महीनों की नियामक जाँच के समाप्त होने के बाद निवेशकों का विश्वास फिर से बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे समूह के लिए वैश्विक पूंजी जुटाने का मार्ग खुलेगा।
क्या कैपिटल ग्रुप और अदाणी समूह ने इन रिपोर्टों की पुष्टि की है?
नहीं, दोनों में से किसी ने भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कैपिटल ग्रुप के प्रवक्ता ने कहा कि वे 'व्यक्तिगत शेयरों या शेयरधारिता पर टिप्पणी करने में असमर्थ हैं।' अदाणी समूह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
राष्ट्र प्रेस
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