सीसीआई ने कमिटमेंट आवेदन की समयसीमा 45 से बढ़ाकर 60 दिन की, नए विनियम 2026 अधिसूचित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 18 अगस्त 2026 को प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े मामलों में कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) आवेदन के लिए संशोधित विनियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिनके तहत कंपनियों को आवेदन दाखिल करने की समयसीमा 45 दिनों से बढ़ाकर 60 दिन कर दी गई है। ये बदलाव कार्यान्वयन के दौरान सामने आई प्रशासनिक और प्रक्रियागत खामियों को दूर करने के लिए किए गए हैं।
मुख्य बदलाव क्या हैं
नए विनियमों के तहत तीन प्रमुख संशोधन किए गए हैं। पहला, कमिटमेंट आवेदन दाखिल करने की समयसीमा 45 दिन से बढ़ाकर 60 दिन की गई है। दूसरा, आयोग द्वारा ऐसे आवेदनों पर प्रारंभिक विचार के लिए उपलब्ध समय 7 कार्य दिवसों से बढ़ाकर 15 कार्य दिवस किया गया है। तीसरा, पूरे मामले के निपटारे की अधिकतम समयसीमा 130 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दी गई है।
कमिटमेंट व्यवस्था की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से कानून में धारा 48ए और 48बी जोड़ी गई थीं। इन प्रावधानों के तहत जिन कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों — विशेषकर बाज़ार में प्रभुत्व के दुरुपयोग — के आरोपों की जांच चल रही हो, वे स्वेच्छा से सुधारात्मक कदम या शर्तें प्रस्तावित कर मामले का समाधान कर सकती हैं। यह व्यवस्था लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई थी।
विचाराधीन प्रमुख मामले
वर्तमान में CCI के समक्ष दो महत्वपूर्ण कमिटमेंट प्रस्ताव लंबित हैं। पहला प्रस्ताव इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो एयरलाइन की मूल कंपनी) का है, जो दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ान व्यवधान के बाद शुरू हुई प्रभुत्व के दुरुपयोग संबंधी जांच से जुड़ा है। दूसरा प्रस्ताव गूगल द्वारा दायर किया गया है, जो प्ले स्टोर पर रियल मनी गेमिंग ऐप्स की सूचीबद्धता से संबंधित कथित अनुचित कारोबारी व्यवहार की जांच से संबंधित है। दोनों मामलों पर सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम निर्णय CCI को लेना है।
हितधारकों के सुझाव और आयोग का रुख
CCI ने इन संशोधनों पर हितधारकों से सुझाव भी मांगे थे। कुछ पक्षों ने सिफारिश की थी कि महानिदेशक की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत होने से पहले किसी भी चरण पर कमिटमेंट आवेदन की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि आयोग ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया — आयोग का मानना है कि ऐसा करने से जांच प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ सकती है और मामलों के निपटारे में देरी हो सकती है।
सीमाएँ और आगे की राह
यह सुविधा केवल उन मामलों में उपलब्ध है जहाँ बाज़ार में प्रभुत्व के दुरुपयोग की जांच चल रही हो। कार्टेल (गुप्त सांठगांठ) से जुड़े मामलों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। CCI के अनुसार, संशोधित विनियम न केवल आयोग और उसके महानिदेशक के संसाधनों की बचत करेंगे, बल्कि कंपनियों को भी लंबी जांच और मुकदमेबाजी से राहत देंगे। विस्तारित समयसीमाओं के साथ यह देखना होगा कि लंबित मामलों में निपटारे की गति वास्तव में तेज होती है या नहीं।