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सीसीआई ने कमिटमेंट आवेदन की समयसीमा 45 से बढ़ाकर 60 दिन की, नए विनियम 2026 अधिसूचित

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सीसीआई ने कमिटमेंट आवेदन की समयसीमा 45 से बढ़ाकर 60 दिन की, नए विनियम 2026 अधिसूचित

सारांश

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने कमिटमेंट आवेदन प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए समयसीमाएँ बढ़ाई हैं — आवेदन के लिए 60 दिन और निपटारे के लिए 180 दिन। इंडिगो और गूगल के लंबित प्रस्तावों के बीच ये बदलाव प्रतिस्पर्धा कानून के क्रियान्वयन की दिशा में एक अहम कदम हैं।

मुख्य बातें

CCI ने 18 अगस्त 2026 को कमिटमेंट आवेदन के लिए संशोधित विनियम, 2026 अधिसूचित किए।
आवेदन दाखिल करने की समयसीमा 45 दिन से बढ़ाकर 60 दिन की गई; प्रारंभिक विचार के लिए समय 7 से 15 कार्य दिवस हुआ।
पूरे मामले के निपटारे की अधिकतम सीमा 130 दिन से बढ़ाकर 180 दिन की गई।
इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और गूगल के कमिटमेंट प्रस्ताव वर्तमान में CCI के समक्ष विचाराधीन हैं।
कार्टेल मामलों को कमिटमेंट व्यवस्था से बाहर रखा गया है; यह सुविधा केवल प्रभुत्व के दुरुपयोग की जांच में उपलब्ध है।
महानिदेशक की जांच रिपोर्ट से पहले किसी भी चरण पर आवेदन की अनुमति देने का हितधारकों का सुझाव CCI ने अस्वीकार कर दिया।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 18 अगस्त 2026 को प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े मामलों में कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) आवेदन के लिए संशोधित विनियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिनके तहत कंपनियों को आवेदन दाखिल करने की समयसीमा 45 दिनों से बढ़ाकर 60 दिन कर दी गई है। ये बदलाव कार्यान्वयन के दौरान सामने आई प्रशासनिक और प्रक्रियागत खामियों को दूर करने के लिए किए गए हैं।

मुख्य बदलाव क्या हैं

नए विनियमों के तहत तीन प्रमुख संशोधन किए गए हैं। पहला, कमिटमेंट आवेदन दाखिल करने की समयसीमा 45 दिन से बढ़ाकर 60 दिन की गई है। दूसरा, आयोग द्वारा ऐसे आवेदनों पर प्रारंभिक विचार के लिए उपलब्ध समय 7 कार्य दिवसों से बढ़ाकर 15 कार्य दिवस किया गया है। तीसरा, पूरे मामले के निपटारे की अधिकतम समयसीमा 130 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दी गई है।

कमिटमेंट व्यवस्था की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से कानून में धारा 48ए और 48बी जोड़ी गई थीं। इन प्रावधानों के तहत जिन कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों — विशेषकर बाज़ार में प्रभुत्व के दुरुपयोग — के आरोपों की जांच चल रही हो, वे स्वेच्छा से सुधारात्मक कदम या शर्तें प्रस्तावित कर मामले का समाधान कर सकती हैं। यह व्यवस्था लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई थी।

विचाराधीन प्रमुख मामले

वर्तमान में CCI के समक्ष दो महत्वपूर्ण कमिटमेंट प्रस्ताव लंबित हैं। पहला प्रस्ताव इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो एयरलाइन की मूल कंपनी) का है, जो दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ान व्यवधान के बाद शुरू हुई प्रभुत्व के दुरुपयोग संबंधी जांच से जुड़ा है। दूसरा प्रस्ताव गूगल द्वारा दायर किया गया है, जो प्ले स्टोर पर रियल मनी गेमिंग ऐप्स की सूचीबद्धता से संबंधित कथित अनुचित कारोबारी व्यवहार की जांच से संबंधित है। दोनों मामलों पर सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम निर्णय CCI को लेना है।

हितधारकों के सुझाव और आयोग का रुख

CCI ने इन संशोधनों पर हितधारकों से सुझाव भी मांगे थे। कुछ पक्षों ने सिफारिश की थी कि महानिदेशक की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत होने से पहले किसी भी चरण पर कमिटमेंट आवेदन की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि आयोग ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया — आयोग का मानना है कि ऐसा करने से जांच प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ सकती है और मामलों के निपटारे में देरी हो सकती है।

सीमाएँ और आगे की राह

यह सुविधा केवल उन मामलों में उपलब्ध है जहाँ बाज़ार में प्रभुत्व के दुरुपयोग की जांच चल रही हो। कार्टेल (गुप्त सांठगांठ) से जुड़े मामलों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। CCI के अनुसार, संशोधित विनियम न केवल आयोग और उसके महानिदेशक के संसाधनों की बचत करेंगे, बल्कि कंपनियों को भी लंबी जांच और मुकदमेबाजी से राहत देंगे। विस्तारित समयसीमाओं के साथ यह देखना होगा कि लंबित मामलों में निपटारे की गति वास्तव में तेज होती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या लंबी प्रक्रिया वास्तव में बेहतर परिणाम देती है या केवल अनिश्चितता को लंबा खींचती है। इंडिगो और गूगल जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में जनता की परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अंतिम निर्णय अभी बाकी है — यह दर्शाता है कि समयसीमा से अधिक, निर्णय की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर ध्यान देना ज़रूरी है। कार्टेल मामलों को बाहर रखना उचित है, पर प्रभुत्व के दुरुपयोग की परिभाषा की व्यापकता को देखते हुए यह भी देखना होगा कि कंपनियाँ इस व्यवस्था का उपयोग जांच को टालने के औज़ार के रूप में न करें।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीसीआई के नए कमिटमेंट विनियम 2026 में क्या बदला है?
CCI ने 18 अगस्त 2026 को अधिसूचित नए विनियमों में कमिटमेंट आवेदन की समयसीमा 45 से बढ़ाकर 60 दिन, प्रारंभिक विचार की अवधि 7 से 15 कार्य दिवस और पूरे मामले के निपटारे की सीमा 130 से 180 दिन कर दी है। ये बदलाव कार्यान्वयन के दौरान सामने आई प्रशासनिक खामियों को दूर करने के लिए किए गए हैं।
कमिटमेंट व्यवस्था क्या है और यह कब लागू होती है?
कमिटमेंट व्यवस्था प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 48ए और 48बी के तहत लागू है, जिसके तहत जांच के दौरान कंपनियाँ स्वेच्छा से सुधारात्मक उपाय प्रस्तावित कर मामला सुलझा सकती हैं। यह सुविधा केवल प्रभुत्व के दुरुपयोग के मामलों में उपलब्ध है; कार्टेल मामले इससे बाहर हैं।
इंडिगो और गूगल के CCI मामले किससे संबंधित हैं?
इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) का मामला दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ान व्यवधान के बाद शुरू हुई प्रभुत्व के दुरुपयोग संबंधी जांच से जुड़ा है। गूगल का मामला प्ले स्टोर पर रियल मनी गेमिंग ऐप्स की सूचीबद्धता से संबंधित कथित अनुचित कारोबारी व्यवहार की जांच से जुड़ा है। दोनों पर सार्वजनिक परामर्श पूरा हो चुका है।
क्या महानिदेशक की रिपोर्ट से पहले कमिटमेंट आवेदन किया जा सकता है?
नहीं। CCI ने हितधारकों के उस सुझाव को अस्वीकार कर दिया है जिसमें महानिदेशक की जांच रिपोर्ट से पहले किसी भी चरण पर आवेदन की अनुमति माँगी गई थी। आयोग का मानना है कि ऐसा करने से जांच प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ेगी और मामलों के निपटारे में देरी होगी।
इन नए नियमों से कंपनियों को क्या फायदा होगा?
विस्तारित समयसीमाएँ कंपनियों को जांच के दौरान सुधारात्मक उपाय तैयार करने और प्रस्तुत करने के लिए अधिक समय देती हैं, जिससे लंबी कानूनी प्रक्रिया और मुकदमेबाजी से राहत मिलती है। साथ ही आयोग के संसाधनों की भी बचत होती है और बाज़ार में जल्द सुधार सुनिश्चित होता है।
राष्ट्र प्रेस
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