सी-डॉट के 43वें स्थापना दिवस पर सिंधिया का आह्वान: 'मेड इन इंडिया' दूरसंचार तकनीक को विश्व बाज़ार तक पहुँचाएं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) के 43वें स्थापना दिवस समारोह में स्पष्ट संदेश दिया कि भारत में विकसित स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों को अब केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें वैश्विक बाज़ारों में प्रतिस्पर्धी उत्पादों के रूप में उतारना होगा। उन्होंने कहा कि अनुसंधान एवं विकास को व्यावसायिक रूप से सफल उत्पादों में बदलना अब सी-डॉट की प्राथमिकता होनी चाहिए।
मुख्य घोषणाएँ और दिशानिर्देश
सिंधिया ने समारोह में कहा, 'हमें ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी जो भारत को केवल 'मेड इन इंडिया' तक सीमित न रखे, बल्कि 'मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड' की दिशा में आगे बढ़ाए।' उन्होंने 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा को उन उभरते क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया जिनमें भारत को अपनी स्थिति शीघ्र मज़बूत करनी है।
मंत्री ने जोर दिया कि इन क्षेत्रों में विकसित होने वाली तकनीकें किफायती, भरोसेमंद, विस्तार-योग्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए — केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं।
स्वदेशी 4जी स्टैक की उपलब्धि
सिंधिया ने सी-डॉट द्वारा विकसित स्वदेशी 4जी तकनीकी स्टैक का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह तकनीक देशभर में लगभग एक लाख मोबाइल टावरों पर तैनात की जा चुकी है और लाखों उपभोक्ताओं को सेवाएँ दे रही है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जो अपनी खुद की 4जी तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं।
उन्होंने इस सफलता का श्रेय सी-डॉट के इंजीनियरों को देते हुए कहा कि अब इसी नींव पर 5जी क्षमताओं को सुदृढ़ करना और 6जी मानकों के निर्धारण में सक्रिय भूमिका निभाना अगला स्वाभाविक कदम है।
4जी से 6जी तक का सफर
सिंधिया ने स्वीकार किया कि भारत 4जी युग में वैश्विक अग्रणी देशों से पीछे रहा, किंतु 5जी के दौर में देश ने अंतरराष्ट्रीय प्रगति के साथ कदम मिलाया है। उन्होंने कहा कि अब 6जी तकनीक में नेतृत्व करना भारत के लिए एक यथार्थवादी और महत्वाकांक्षी लक्ष्य बन सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोपीय संघ पहले से ही 6जी मानक-निर्धारण की प्रक्रिया में सक्रिय हैं। गौरतलब है कि 6जी के व्यावसायिक परिनियोजन का अनुमानित समय 2030 के बाद का है, जिससे भारत के पास तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण विंडो है।
सी-डॉट का युवा कार्यबल और विज़न 2047
मंत्री ने बताया कि सी-डॉट में वर्तमान में लगभग 1,565 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें आधे से अधिक की आयु 40 वर्ष से कम है। उन्होंने इस युवा कार्यबल को संस्था की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता निर्माण के लिए यह एक अमूल्य संसाधन है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का संदर्भ देते हुए सिंधिया ने कहा कि सी-डॉट को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनने के लिए साहस, नवाचार, स्वामित्व की भावना और दृढ़ता के साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा, 'अनुसंधान के लिए धैर्य चाहिए, इंजीनियरिंग के लिए लगातार सुधार की आवश्यकता होती है और वैश्विक नेतृत्व के लिए दीर्घकालिक सहयोग तथा निरंतर योगदान अनिवार्य है।'
भविष्य के दूरसंचार नेटवर्क केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहेंगे — उन्हें सुरक्षित, विश्वसनीय, लचीला और बुद्धिमान भी होना होगा, ऐसा सिंधिया ने कहा। सी-डॉट की अगली पीढ़ी की तकनीकें इसी दिशा में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरतों को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।