25 अगस्त 2026
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सी-डॉट के 43वें स्थापना दिवस पर सिंधिया का आह्वान: 'मेड इन इंडिया' दूरसंचार तकनीक को विश्व बाज़ार तक पहुँचाएं

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सी-डॉट के 43वें स्थापना दिवस पर सिंधिया का आह्वान: 'मेड इन इंडिया' दूरसंचार तकनीक को विश्व बाज़ार तक पहुँचाएं

सारांश

सी-डॉट के 43वें स्थापना दिवस पर सिंधिया का संदेश साफ था — 'मेड इन इंडिया' अब केवल घरेलू ज़रूरत नहीं, वैश्विक निर्यात की महत्वाकांक्षा है। एक लाख टावरों पर तैनात स्वदेशी 4जी स्टैक की नींव पर भारत अब 6जी नेतृत्व का दावेदार बनने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 25 अगस्त 2026 को सी-डॉट के 43वें स्थापना दिवस पर स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
सी-डॉट का स्वदेशी 4जी तकनीकी स्टैक देशभर में लगभग एक लाख मोबाइल टावरों पर तैनात, लाखों उपभोक्ताओं को सेवा दे रहा है।
सिंधिया ने 6जी, AI, क्वांटम प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा को भारत की अगली प्राथमिकता बताया।
सी-डॉट में 1,565 कर्मचारी कार्यरत; आधे से अधिक की आयु 40 वर्ष से कम — मंत्री ने इसे संस्था की सबसे बड़ी ताकत बताया।
मंत्री ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ते हुए सी-डॉट को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) के 43वें स्थापना दिवस समारोह में स्पष्ट संदेश दिया कि भारत में विकसित स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों को अब केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें वैश्विक बाज़ारों में प्रतिस्पर्धी उत्पादों के रूप में उतारना होगा। उन्होंने कहा कि अनुसंधान एवं विकास को व्यावसायिक रूप से सफल उत्पादों में बदलना अब सी-डॉट की प्राथमिकता होनी चाहिए।

मुख्य घोषणाएँ और दिशानिर्देश

सिंधिया ने समारोह में कहा, 'हमें ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी जो भारत को केवल 'मेड इन इंडिया' तक सीमित न रखे, बल्कि 'मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड' की दिशा में आगे बढ़ाए।' उन्होंने 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा को उन उभरते क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया जिनमें भारत को अपनी स्थिति शीघ्र मज़बूत करनी है।

मंत्री ने जोर दिया कि इन क्षेत्रों में विकसित होने वाली तकनीकें किफायती, भरोसेमंद, विस्तार-योग्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए — केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं।

स्वदेशी 4जी स्टैक की उपलब्धि

सिंधिया ने सी-डॉट द्वारा विकसित स्वदेशी 4जी तकनीकी स्टैक का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह तकनीक देशभर में लगभग एक लाख मोबाइल टावरों पर तैनात की जा चुकी है और लाखों उपभोक्ताओं को सेवाएँ दे रही है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जो अपनी खुद की 4जी तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं।

उन्होंने इस सफलता का श्रेय सी-डॉट के इंजीनियरों को देते हुए कहा कि अब इसी नींव पर 5जी क्षमताओं को सुदृढ़ करना और 6जी मानकों के निर्धारण में सक्रिय भूमिका निभाना अगला स्वाभाविक कदम है।

4जी से 6जी तक का सफर

सिंधिया ने स्वीकार किया कि भारत 4जी युग में वैश्विक अग्रणी देशों से पीछे रहा, किंतु 5जी के दौर में देश ने अंतरराष्ट्रीय प्रगति के साथ कदम मिलाया है। उन्होंने कहा कि अब 6जी तकनीक में नेतृत्व करना भारत के लिए एक यथार्थवादी और महत्वाकांक्षी लक्ष्य बन सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोपीय संघ पहले से ही 6जी मानक-निर्धारण की प्रक्रिया में सक्रिय हैं। गौरतलब है कि 6जी के व्यावसायिक परिनियोजन का अनुमानित समय 2030 के बाद का है, जिससे भारत के पास तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण विंडो है।

सी-डॉट का युवा कार्यबल और विज़न 2047

मंत्री ने बताया कि सी-डॉट में वर्तमान में लगभग 1,565 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें आधे से अधिक की आयु 40 वर्ष से कम है। उन्होंने इस युवा कार्यबल को संस्था की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता निर्माण के लिए यह एक अमूल्य संसाधन है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का संदर्भ देते हुए सिंधिया ने कहा कि सी-डॉट को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनने के लिए साहस, नवाचार, स्वामित्व की भावना और दृढ़ता के साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा, 'अनुसंधान के लिए धैर्य चाहिए, इंजीनियरिंग के लिए लगातार सुधार की आवश्यकता होती है और वैश्विक नेतृत्व के लिए दीर्घकालिक सहयोग तथा निरंतर योगदान अनिवार्य है।'

भविष्य के दूरसंचार नेटवर्क केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहेंगे — उन्हें सुरक्षित, विश्वसनीय, लचीला और बुद्धिमान भी होना होगा, ऐसा सिंधिया ने कहा। सी-डॉट की अगली पीढ़ी की तकनीकें इसी दिशा में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरतों को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सी-डॉट के पास वाणिज्यिक निर्यात के लिए ज़रूरी बाज़ार-प्रवेश तंत्र, मानकीकरण साझेदारियाँ और बौद्धिक संपदा रणनीति है। एक लाख टावरों पर 4जी स्टैक की तैनाती निस्संदेह ऐतिहासिक है, किंतु घरेलू परिनियोजन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच की खाई को पाटना एक अलग और कहीं अधिक जटिल चुनौती है। वैश्विक दूरसंचार बाज़ार में Huawei, Ericsson और Nokia जैसी कंपनियों के दशकों पुराने पारिस्थितिकी तंत्र के सामने 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को स्थापित करने के लिए केवल तकनीकी उत्कृष्टता नहीं, बल्कि आक्रामक कूटनीतिक और व्यापारिक रणनीति भी चाहिए — जिसका विवरण इस घोषणा में अनुपस्थित है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सी-डॉट का 43वाँ स्थापना दिवस समारोह क्यों चर्चा में है?
25 अगस्त 2026 को आयोजित इस समारोह में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सी-डॉट को स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने और अनुसंधान को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने 6जी, AI और क्वांटम प्रौद्योगिकी में भारत के नेतृत्व की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
सी-डॉट का स्वदेशी 4जी स्टैक क्या है और इसे कहाँ तैनात किया गया है?
सी-डॉट द्वारा विकसित स्वदेशी 4जी तकनीकी स्टैक एक पूर्ण भारतीय दूरसंचार नेटवर्क समाधान है, जिसे देशभर में लगभग एक लाख मोबाइल टावरों पर तैनात किया जा चुका है। इसके ज़रिये लाखों उपभोक्ता नेटवर्क सेवाएँ प्राप्त कर रहे हैं और भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो अपनी स्वयं की 4जी तकनीक विकसित करने में सक्षम हैं।
भारत 6जी तकनीक में नेतृत्व कैसे करने की योजना बना रहा है?
सिंधिया के अनुसार, 4जी स्टैक की सफलता को आधार बनाकर सी-डॉट को 5जी क्षमताएँ सुदृढ़ करनी होंगी और 6जी मानक-निर्धारण प्रक्रिया में सक्रिय योगदान देना होगा। चूँकि 6जी का व्यावसायिक परिनियोजन 2030 के बाद अपेक्षित है, भारत के पास तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण समय-सीमा उपलब्ध है।
सी-डॉट में कितने कर्मचारी हैं और उनकी विशेषता क्या है?
सी-डॉट में वर्तमान में लगभग 1,565 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें आधे से अधिक की आयु 40 वर्ष से कम है। सिंधिया ने इस युवा कार्यबल को संस्था की सबसे बड़ी ताकत बताया और कहा कि यह नई पीढ़ी की तकनीकों में भारत की क्षमता निर्माण के लिए एक अमूल्य संसाधन है।
'मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड' दूरसंचार रणनीति से किसे लाभ होगा?
इस रणनीति का लक्ष्य भारतीय दूरसंचार उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात करना है, जिससे भारतीय तकनीकी कंपनियों, सी-डॉट के इंजीनियरों और व्यापक दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होगा। दीर्घकालिक रूप से, यह भारत को तकनीक के उपभोक्ता से वैश्विक आपूर्तिकर्ता की भूमिका में ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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