सिल्वर बार्स अब 'रिस्ट्रिक्टेड' कैटेगरी में: DGFT की अधिसूचना 17/2026-27 से चांदी आयात पर सख्त नियंत्रण

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सिल्वर बार्स अब 'रिस्ट्रिक्टेड' कैटेगरी में: DGFT की अधिसूचना 17/2026-27 से चांदी आयात पर सख्त नियंत्रण

सारांश

DGFT की अधिसूचना 17/2026-27 ने सिल्वर बार्स समेत चांदी की कई श्रेणियों को 'फ्री' से 'रिस्ट्रिक्टेड' आयात सूची में डाल दिया — अब सरकारी मंजूरी अनिवार्य। यह कदम तब आया जब सोने का आयात बिल 24% बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुँचा। उद्योग तस्करी बढ़ने की आशंका जता रहा है।

मुख्य बातें

DGFT अधिसूचना संख्या 17/2026-27 के तहत सिल्वर बार्स (ITC HS कोड 71069221, 71069229) को 'फ्री' से 'रिस्ट्रिक्टेड' आयात श्रेणी में रखा गया।
अनरिफाइंड चांदी, सेमी-मैन्युफैक्चर्ड चांदी और चांदी के पाउडर पर भी आयात नियम कड़े किए गए।
AA योजना के तहत प्रति लाइसेंस अधिकतम 100 किलोग्राम सोने की आयात सीमा तय; पुराने लाइसेंसधारकों को 50% निर्यात दायित्व पहले पूरा करना होगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24% से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुँचा।
GJC सहित उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी कि सख्त नियमों से ग्रे मार्केट और तस्करी बढ़ सकती है ।
ड्यूटी-फ्री गोल्ड आयातकों को अब हर 15 दिन में CA-प्रमाणित रिपोर्ट जमा करनी होगी।

केंद्र सरकार ने 16 मई 2026 को चांदी के आयात पर बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए सिल्वर बार्स समेत कई चांदी उत्पादों को 'फ्री' से 'रिस्ट्रिक्टेड' आयात श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या 17/2026-27 के बाद अब इन वस्तुओं के आयात के लिए सरकारी अनुमति अनिवार्य हो गई है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात बिल 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुँच गया है।

अधिसूचना में क्या बदला

ITC (HS) कोड 71069221 और 71069229 के अंतर्गत आने वाली सिल्वर बार्स पर नई शर्तें लागू हुई हैं। पहले इनका आयात भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों के अधीन 'फ्री' श्रेणी में होता था, अब इन्हें 'रिस्ट्रिक्टेड' सूची में रखा गया है।

केवल सिल्वर बार्स ही नहीं — बिना ढली हुई चांदी (अनरिफाइंड सिल्वर), अर्ध-निर्मित चांदी (सेमी-मैन्युफैक्चर्ड सिल्वर) और चांदी के पाउडर पर भी आयात प्रतिबंध कड़े किए गए हैं। कुछ श्रेणियों में आयात को अतिरिक्त रूप से RBI के दिशा-निर्देशों के अधीन भी रखा गया है।

सोने के आयात पर पहले से चल रही सख्ती

गौरतलब है कि यह कदम अकेला नहीं है। इससे पहले सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। रत्न एवं आभूषण निर्यातकों के लिए एडवांस ऑथराइजेशन (AA) योजना के तहत ड्यूटी-फ्री गोल्ड इंपोर्ट के नियम भी कड़े किए गए थे।

नए नियमों के तहत AA योजना में प्रति लाइसेंस अधिकतम 100 किलोग्राम सोने के आयात की सीमा निर्धारित की गई है। पहली बार आवेदन करने वाली कंपनियों के लिए निर्माण इकाइयों का फिजिकल निरीक्षण अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, पुराने लाइसेंस के तहत कम से कम 50 प्रतिशत निर्यात दायित्व पूरा करने के बाद ही नई अनुमति मिलेगी।

ड्यूटी-फ्री गोल्ड आयात करने वाले निर्यातकों को अब हर 15 दिन में चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित आयात-निर्यात रिपोर्ट जमा करनी होगी — यह पारदर्शिता के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

आयात बिल और विदेशी मुद्रा दबाव

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुँच गया। हालाँकि आयात की मात्रा अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज़ी के कारण कुल आयात बिल में भारी वृद्धि हुई।

भारत में सबसे अधिक सोना स्विट्जरलैंड से आयात किया गया, जबकि यूएई और दक्षिण अफ्रीका क्रमशः दूसरे और तीसरे बड़े स्रोत रहे। कीमती धातुओं का बढ़ता आयात बिल विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बनाता है, और सरकार इसी दबाव को कम करने की कोशिश में है।

उद्योग की चिंताएँ

ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) सहित कई उद्योग संगठनों ने इन कदमों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अधिक आयात शुल्क और कड़े प्रतिबंधों से ग्रे मार्केट गतिविधियाँ और तस्करी बढ़ सकती है — जो उद्योग के लिए एक गंभीर जोखिम है।

आलोचकों का कहना है कि यदि वैध आयात महँगा और जटिल हो जाए, तो अनौपचारिक चैनलों से धातु की आवक बढ़ती है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और बाज़ार में अस्थिरता आती है।

आगे क्या होगा

सरकार का मानना है कि इन उपायों से कीमती धातुओं के आयात पर बेहतर नियंत्रण स्थापित होगा और बढ़ते आयात बिल को संतुलित करने में मदद मिलेगी। नई अधिसूचना लागू होने के साथ, आयातकों को अब DGFT से पूर्व-अनुमति लेने की प्रक्रिया से गुज़रना होगा। उद्योग जगत की नज़र इस बात पर है कि सरकार अनुपालन प्रक्रिया को कितना सरल बनाती है, ताकि वैध व्यापार बाधित न हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन GJC की तस्करी-वृद्धि की चेतावनी को खारिज नहीं किया जा सकता — 2013 में सोने पर 10% आयात शुल्क लगाने के बाद तस्करी में तीव्र उछाल आया था, जो इतिहास की याद दिलाता है। असली सवाल यह है कि 'रिस्ट्रिक्टेड' श्रेणी की अनुमति प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और त्वरित होगी — यदि मंजूरी में देरी हुई, तो वैध व्यापारी अनौपचारिक रास्ते अपनाने को मजबूर हो सकते हैं। आयात बिल में वृद्धि मात्रा में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज़ी के कारण है — ऐसे में आयात प्रतिबंध मूल कारण को नहीं, बल्कि लक्षण को संबोधित करते हैं।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DGFT की नई अधिसूचना से सिल्वर बार्स के आयात पर क्या असर पड़ेगा?
अधिसूचना संख्या 17/2026-27 के बाद सिल्वर बार्स को 'फ्री' से 'रिस्ट्रिक्टेड' आयात श्रेणी में रखा गया है, यानी अब इनके आयात के लिए सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य होगा। पहले ये RBI के नियमों के अधीन बिना अलग मंजूरी के आयात हो सकती थीं।
चांदी की कौन-कौन सी श्रेणियाँ प्रतिबंधित हुई हैं?
सिल्वर बार्स (ITC HS कोड 71069221 और 71069229) के अलावा अनरिफाइंड चांदी, सेमी-मैन्युफैक्चर्ड चांदी और चांदी के पाउडर पर भी आयात नियम कड़े किए गए हैं। इन सभी के लिए अब संबंधित सरकारी अनुमति आवश्यक होगी।
एडवांस ऑथराइजेशन योजना में क्या नए बदलाव किए गए हैं?
AA योजना के तहत प्रति लाइसेंस अधिकतम 100 किलोग्राम सोने के आयात की सीमा तय की गई है। पहली बार आवेदन करने वाली कंपनियों का फिजिकल निरीक्षण अनिवार्य होगा, और पुराने लाइसेंसधारकों को कम से कम 50% निर्यात दायित्व पूरा करने के बाद ही नई अनुमति मिलेगी।
उद्योग जगत ने इन नियमों पर क्या आपत्ति जताई है?
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) सहित कई संगठनों का कहना है कि अधिक आयात शुल्क और कड़े प्रतिबंधों से ग्रे मार्केट गतिविधियाँ और तस्करी बढ़ सकती है। उनके अनुसार वैध आयात महँगा और जटिल होने पर अनौपचारिक चैनलों से धातु की आवक बढ़ती है।
भारत का कीमती धातुओं का आयात बिल कितना बढ़ा है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुँच गया। आयात की मात्रा अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज़ी के कारण कुल बिल बढ़ गया।
राष्ट्र प्रेस
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