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कोयंबटूर तमिलनाडु में जीपीएस इंस्टॉलेशन में अग्रणी, 4,200 खनिज ट्रकों में लगे उपकरण

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कोयंबटूर तमिलनाडु में जीपीएस इंस्टॉलेशन में अग्रणी, 4,200 खनिज ट्रकों में लगे उपकरण

सारांश

तमिलनाडु में खनिज ट्रकों में जीपीएस लगाने की 31 अक्टूबर की समय सीमा से पहले ही कोयंबटूर ने 4,200 वाहनों में उपकरण स्थापित कर राज्य में पहला स्थान हासिल किया। केरल सीमा से सटे इस जिले में 13 चेक पोस्ट हैं, जो इसे अवैध खनिज आवाजाही रोकने का अहम केंद्र बनाती हैं।

मुख्य बातें

कोयंबटूर खनिज परिवहन ट्रकों में जीपीएस लगाने के मामले में तमिलनाडु का अग्रणी जिला बन गया है।
जिले के 7,000 में से 4,200 वाहनों (लगभग 60% ) में जीपीएस उपकरण स्थापित।
राज्य सरकार की अंतिम समय सीमा 31 अक्टूबर 2026 ; न मानने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी।
कोयंबटूर-केरल सीमा पर 13 चेक पोस्ट — अवैध खनिज आवाजाही रोकने के लिए सक्रिय।
कुछ अन्य जिलों में 12,000 ट्रकों में से केवल 2,000 में ही जीपीएस लगाए गए।
खनिज संसाधन विभाग , राजस्व विभाग और पुलिस का संयुक्त प्रवर्तन अभियान जारी।

तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले ने खनिज परिवहन वाहनों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरण स्थापित करने के मामले में राज्य के अन्य जिलों को पीछे छोड़ दिया है। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 31 अक्टूबर 2026 की अंतिम समय सीमा से पूर्व ही जिले के 4,200 वाहनों में जीपीएस डिवाइस स्थापित किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि अवैध खनिज परिवहन पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

जिले में जीपीएस अनुपालन की स्थिति

कोयंबटूर जिले में लगभग 7,000 ट्रक खनिज पदार्थों के परिवहन में संलग्न हैं। इनमें से 60 प्रतिशत वाहनों में जीपीएस उपकरण लग चुके हैं। अधिकारियों ने शेष ट्रक मालिकों के साथ चर्चा कर इंस्टॉलेशन प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं, ताकि माह के अंत तक शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, 'ट्रक मालिकों को इंस्टॉलेशन प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक 4,200 वाहनों में जीपीएस डिवाइस लगाए जा चुके हैं।' शेष वाहनों में महीने के अंत तक इंस्टॉलेशन पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

अन्य जिलों की तुलना में कोयंबटूर आगे

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के कुछ जिलों में खनिज परिवहन में लगे 12,000 तक ट्रक हैं, लेकिन उनमें से केवल लगभग 2,000 में ही अब तक जीपीएस उपकरण स्थापित किए गए हैं। इसकी तुलना में कोयंबटूर की 60 प्रतिशत उपलब्धि उल्लेखनीय है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार खनिज संसाधनों की अनधिकृत आवाजाही को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।

केरल सीमा पर निगरानी का महत्व

कोयंबटूर की भौगोलिक स्थिति इस पहल को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है — यह जिला केरल की सीमा से सटा है और पड़ोसी राज्य में खनिज संसाधनों के परिवहन का प्रमुख मार्ग है। कोयंबटूर-केरल सीमा पर 13 चेक पोस्ट हैं, जहाँ अधिकारी अवैध खनिज आवाजाही को रोकने के लिए सतत काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बजरी, लाल मिट्टी और अन्य खनिजों की अवैध तस्करी तमिलनाडु-केरल सीमा पर एक पुरानी समस्या रही है। जीपीएस ट्रैकिंग से वाहन की वास्तविक स्थिति, गति और मार्ग की रियल-टाइम निगरानी संभव होती है, जिससे अनधिकृत रूटों पर परिवहन को रोकना आसान हो जाता है।

विभागीय समन्वय और प्रवर्तन

खनिज संसाधन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से अनधिकृत खनिज परिवहन के विरुद्ध प्रवर्तन कार्रवाई कर रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 31 अक्टूबर 2026 तक जीपीएस न लगाने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह पहल राज्य सरकार के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खनिज संसाधनों के परिवहन की निगरानी को तकनीकी रूप से मज़बूत करना और राजस्व रिसाव को रोकना है।

आगे की राह

कोयंबटूर प्रशासन का लक्ष्य अब शेष 2,800 वाहनों में भी समय सीमा से पहले जीपीएस इंस्टॉलेशन पूरा करना है। अधिकारी ट्रक मालिक संघों के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए हैं। यदि राज्य के अन्य जिले कोयंबटूर के इस अनुपालन मॉडल को अपनाते हैं, तो तमिलनाडु में खनिज परिवहन की पारदर्शिता और राज्य राजस्व संग्रह दोनों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी अनुपालन के बाद की निगरानी होगी — क्या डेटा वास्तव में उपयोग होगा या डिवाइस केवल कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी। कोयंबटूर का 60 प्रतिशत अनुपालन प्रभावशाली है, लेकिन अन्य जिलों में 12,000 ट्रकों में से केवल 2,000 में इंस्टॉलेशन बताता है कि राज्य स्तर पर अनुपालन असमान है। सीमा पर 13 चेक पोस्ट होना पर्याप्त नहीं — जब तक जीपीएस डेटा को रियल-टाइम प्रवर्तन से नहीं जोड़ा जाता, यह ट्रैकिंग तंत्र महज़ रिकॉर्ड-कीपिंग का साधन बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोयंबटूर में खनिज परिवहन ट्रकों में जीपीएस लगाना क्यों अनिवार्य किया गया है?
तमिलनाडु सरकार ने खनिज परिवहन वाहनों की निगरानी मज़बूत करने और अवैध खनिज आवाजाही रोकने के लिए जीपीएस उपकरण अनिवार्य किए हैं। कोयंबटूर केरल सीमा से सटा जिला है, जहाँ 13 चेक पोस्ट के ज़रिए अनधिकृत परिवहन पर नज़र रखी जाती है।
जीपीएस लगाने की अंतिम समय सीमा क्या है?
राज्य सरकार के निर्देशानुसार तमिलनाडु में सभी खनिज परिवहन ट्रकों में 31 अक्टूबर 2026 तक जीपीएस उपकरण लगाना अनिवार्य है। इस समय सीमा तक अनुपालन न करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी अधिकारियों ने दी है।
कोयंबटूर में अब तक कितने ट्रकों में जीपीएस लगाए जा चुके हैं?
कोयंबटूर जिले में खनिज परिवहन में लगे लगभग 7,000 ट्रकों में से अब तक 4,200 वाहनों में जीपीएस डिवाइस स्थापित किए जा चुके हैं, जो कुल बेड़े का लगभग 60 प्रतिशत है। शेष वाहनों में इंस्टॉलेशन के लिए प्रयास जारी हैं।
तमिलनाडु के अन्य जिले जीपीएस अनुपालन में कहाँ खड़े हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ जिलों में 12,000 तक खनिज परिवहन ट्रक हैं, लेकिन उनमें से केवल लगभग 2,000 में ही जीपीएस उपकरण स्थापित हुए हैं। कोयंबटूर की 60 प्रतिशत उपलब्धि की तुलना में इन जिलों का अनुपालन काफी कम है।
जीपीएस ट्रैकिंग से अवैध खनिज परिवहन कैसे रुकेगा?
जीपीएस ट्रैकिंग वाहन की वास्तविक स्थिति, गति और मार्ग की रियल-टाइम निगरानी करती है, जिससे अनधिकृत रूटों पर परिवहन को रोकना आसान होता है। खनिज संसाधन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस मिलकर इस डेटा का उपयोग सीमा पार अवैध आवाजाही की जाँच में कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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