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तमिलनाडु: 79% खनिज ट्रकों में GPS नहीं, मद्रास HC आदेश के बावजूद समयसीमा 31 अक्टूबर तक बढ़ी

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तमिलनाडु: 79% खनिज ट्रकों में GPS नहीं, मद्रास HC आदेश के बावजूद समयसीमा 31 अक्टूबर तक बढ़ी

सारांश

तमिलनाडु में 1.4 लाख पंजीकृत खनिज ट्रकों में से 79% अभी भी GPS-रहित हैं। मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश और दो बार की समयसीमा के बावजूद अनुपालन नहीं — और अब समयसीमा फिर 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। अधिकृत उत्पादन और माँग के बीच चार गुना का अंतर अवैध खनन की ज़मीनी हकीकत बताता है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु में 1.4 लाख पंजीकृत खनिज ट्रकों में से 30 सितंबर 2026 तक केवल 30,000 में GPS लगा — शेष 79% अनुपालन-रहित।
भूविज्ञान एवं खनन विभाग ने समयसीमा बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दी; यह मूल 31 मार्च की समयसीमा के बाद दूसरा विस्तार है।
GPS उपकरण की लागत ₹15,000 से घटकर ₹3,700 हो चुकी है; 37 अधिकृत आपूर्तिकर्ता उपलब्ध हैं।
तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की दैनिक माँग 5.25 लाख यूनिट , जबकि अधिकृत उत्पादन केवल 1.2 लाख यूनिट ।
फर्जी QR कोड वाले नकली खनिज पारगमन पास के विरुद्ध कार्रवाई जारी; शीघ्र समर्पित हेल्पलाइन शुरू होगी।

तमिलनाडु में खनिज परिवहन से जुड़े 1.4 लाख पंजीकृत ट्रकों में से 30 सितंबर 2026 तक केवल 30,000 ट्रकों में ही वाहन स्थान ट्रैकिंग (GPS) उपकरण लगाए जा सके हैं, जबकि शेष 79 प्रतिशत वाहन अभी भी इस अनिवार्यता से बाहर हैं। मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश और सरकारी घोषणाओं के बावजूद, भूविज्ञान एवं खनन विभाग ने स्थापना की समयसीमा एक बार फिर बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दी है।

मुख्य घटनाक्रम

खनिज प्रबंधन प्रणाली (Mineral Management System) पोर्टल पर दर्ज आँकड़ों के अनुसार, एम-रेत, पी-रेत और अन्य निर्माण सामग्री ढोने वाले 1.4 लाख ट्रकों में से 1.1 लाख से अधिक वाहन अभी भी GPS-रहित हैं। मूल समयसीमा 31 मार्च 2026 थी, जिसे पहले ही एक बार बढ़ाया जा चुका था। सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि 1 सितंबर 2026 से GPS-विहीन वाहनों को खनिज पारगमन पास (Mineral Transit Pass) जारी नहीं होंगे — परंतु यह नियम भी व्यवहार में प्रभावी नहीं हो सका।

परिवहन संघ और सरकारी रुख

तमिलनाडु राज्य ट्रक मालिक संघ के महासचिव जी. गणेश ने कहा कि GPS ट्रैकिंग उपकरणों की लागत ₹15,000 से घटकर अब मात्र ₹3,700 रह गई है। उन्होंने बताया कि AIS-140 मानक के अनुरूप एक लाख से अधिक उपकरण कई विक्रेताओं के पास उपलब्ध हैं, इसलिए उपलब्धता की कमी को देरी का आधार नहीं बनाया जा सकता। गणेश ने यह भी कहा कि इस आवश्यकता को लागू करने में सरकार की 'अनिच्छा' ने अवैध खनन पर अंकुश लगाने की उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दूसरी ओर, विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि लगभग 37 अधिकृत आपूर्तिकर्ताओं के पास अल्पावधि में शेष सभी वाहनों को सुसज्जित करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि यह नवीनतम विस्तार कई परिवहन संगठनों के अनुरोध पर किया गया है।

अवैध खनन पर असर और प्रवर्तन चुनौतियाँ

वाहन ट्रैकर्स को खनिज प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने का उद्देश्य यह है कि ट्रक किस स्थान से सामग्री लोड कर रहे हैं और किस मार्ग से जा रहे हैं — यह रिकॉर्ड हो सके। इससे अनधिकृत खदानों से आने वाली सप्लाई की पहचान और अवैध खनन की जाँच आसान हो सकती है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की औसत दैनिक आवश्यकता लगभग 5.25 लाख यूनिट है, जबकि अधिकृत खदानों से अनुमत उत्पादन केवल 1.2 लाख यूनिट है — यह चार गुना से अधिक का अंतर अवैध खनन की व्यापकता की ओर इशारा करता है।

अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि फर्जी QR कोड वाले नकली खनिज पारगमन पास बनाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई जारी है।

आम जनता और पारदर्शिता पर असर

GPS अनुपालन में यह व्यापक विफलता खनिज आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता की माँग को कमज़ोर करती है। यह ऐसे समय में आई है जब चेन्नई सहित तमिलनाडु के कई शहरों में निर्माण गतिविधियाँ तेज़ हैं और रेत की अवैध आपूर्ति को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।

क्या होगा आगे

विभाग के अनुसार, खनन उल्लंघनों की शिकायत के लिए जल्द ही एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर शुरू किया जाएगा, जिसे चेन्नई स्थित विभाग के नियंत्रण कक्ष से जोड़ा जाएगा। 31 अक्टूबर 2026 की नई समयसीमा के बाद सरकार की कार्रवाई — विशेषकर GPS-रहित वाहनों को पास देने से इनकार — यह तय करेगी कि यह नीति केवल कागज़ी घोषणा बनी रहेगी या ज़मीन पर उतरेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से घटकर ₹3,700 हो चुकी है और एक लाख से अधिक उपकरण बाज़ार में उपलब्ध हैं, तब आपूर्ति की कमी का तर्क टिकाऊ नहीं लगता। असली सवाल यह है कि क्या यह विस्तार परिवहन लॉबी के दबाव का परिणाम है — क्योंकि अधिकृत उत्पादन और वास्तविक माँग के बीच चार गुना का अंतर बताता है कि अवैध खनन एक संरचनात्मक समस्या है, न कि अपवाद। बिना कठोर प्रवर्तन के, GPS अनिवार्यता महज़ एक कागज़ी अभ्यास बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में खनिज ट्रकों में GPS क्यों अनिवार्य किया गया है?
मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देश पर खनिज परिवहन की निगरानी मज़बूत करने के लिए GPS अनिवार्य किया गया है। इससे अनधिकृत खदानों से आने वाली सप्लाई की पहचान और अवैध खनन-परिवहन उल्लंघनों की जाँच की जा सकती है।
तमिलनाडु में GPS स्थापना की नई समयसीमा क्या है?
भूविज्ञान एवं खनन विभाग ने नई समयसीमा 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की है। मूल समयसीमा 31 मार्च 2026 थी, जिसे पहले ही एक बार बढ़ाया जा चुका था।
कितने ट्रकों में अभी GPS नहीं लगा है?
खनिज प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पर पंजीकृत 1.4 लाख ट्रकों में से 30 सितंबर 2026 तक केवल 30,000 में GPS लगा था। यानी करीब 1.1 लाख यानी 79% ट्रक अभी भी अनुपालन-रहित हैं।
GPS उपकरण की लागत कितनी है और क्या यह उपलब्ध है?
तमिलनाडु राज्य ट्रक मालिक संघ के महासचिव जी. गणेश के अनुसार AIS-140 मानक के GPS उपकरण की कीमत ₹15,000 से घटकर ₹3,700 रह गई है। कई विक्रेताओं के पास एक लाख से अधिक उपकरण उपलब्ध हैं।
तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की माँग और आपूर्ति में कितना अंतर है?
तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की औसत दैनिक आवश्यकता लगभग 5.25 लाख यूनिट है, जबकि अधिकृत खदानों से अनुमत उत्पादन केवल 1.2 लाख यूनिट है। यह चार गुना से अधिक का अंतर अवैध खनन की व्यापकता को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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