तमिलनाडु में खनिज परिवहन पर डिजिटल नकेल: MIMAS पोर्टल से जारी होंगे QR कोड परमिट
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने राज्य में रेत और अन्य खनिजों के अवैध परिवहन पर लगाम लगाने के लिए क्यूआर (QR) कोड आधारित ऑनलाइन परमिट प्रणाली लागू करने की तैयारी कर ली है। प्राकृतिक संसाधन मंत्री डीके प्रभु ने पुष्टि की है कि ये डिजिटल परमिट मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम (MIMAS) पोर्टल के माध्यम से जारी किए जाएंगे और इसके सक्रिय होते ही कागजी मैनुअल पास पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।
नई प्रणाली में क्या होगा खास
प्रत्येक डिजिटल पास में खनिज की मात्रा, खदान स्रोत और परिवहन मार्ग से जुड़ी सत्यापन-योग्य जानकारी एन्कोड होगी। अधिकारी इस डेटा का मिलान वास्तविक शिपमेंट से कर सकेंगे, जिससे पूरे राज्य में रॉयल्टी और जीएसटी संग्रह पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी।
वेटब्रिज को भी MIMAS से जोड़ा जाएगा, ताकि वाहन का वास्तविक भार परमिट पर दर्ज मात्रा से तुलनात्मक रूप से जाँचा जा सके। कुछ चूना पत्थर खदानों के वेटब्रिज पहले से ही इस पोर्टल से जुड़े हुए हैं और विभाग छोटे खनिजों का उत्पादन करने वाली साइटों को भी इसमें शामिल करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
जीपीएस और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
खनिज परिवहन में लगे ट्रकों को 30 सितंबर 2026 तक जीपीएस डिवाइस लगाने का निर्देश दिया गया है, जो यात्रा की रियल-टाइम ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त अधिकारियों ने परिवहन पर निगरानी रखने और ओवरलोड वाहनों को पकड़ने के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित करने की योजना बनाई है।
यह ऐसे समय में आया है जब तिरुवल्लूर जिले में फर्जी ट्रांजिट पास और परमिट पर मिट्टी ढो रहे लगभग 14 ट्रकों को हिरासत में लिया गया था और ड्राइवरों तथा वाहन मालिकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।
ऑपरेटरों का स्वागत, लेकिन चिंताएँ भी
रेत लॉरी ऑपरेटरों ने ऑनलाइन दस्तावेजीकरण की दिशा में उठाए गए इस कदम का स्वागत किया है। हालाँकि उन्होंने ठेकेदारों द्वारा फर्जी कागज दिए जाने की स्थिति में जिम्मेदारी के निर्धारण को लेकर चिंता भी जताई है।
ऑपरेटरों की माँग है कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों पर सरकारी अधिकारी की पुष्टि अनिवार्य की जाए, ताकि ड्राइवर और मालिक लोड स्वीकार करने से पहले उनकी वैधता की जाँच कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने क्रशर यूनिटों पर कड़ी निगरानी और पत्थर खदानों के वेटब्रिज को MIMAS पोर्टल से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने की भी अपील की है।
व्यापक डिजिटलीकरण अभियान का हिस्सा
गौरतलब है कि यह कदम तमिलनाडु के खनन प्रशासन को खनन स्थल से लेकर परिवहन गंतव्य तक पूरी तरह डिजिटल बनाने के व्यापक अभियान का अंग है। विभाग ने हालाँकि अभी तक MIMAS पोर्टल के पूर्ण परिचालन की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।
यदि यह प्रणाली सफलतापूर्वक लागू होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए खनिज प्रशासन के डिजिटलीकरण का एक मॉडल बन सकती है।