24 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु में खनिज परिवहन पर डिजिटल नकेल: MIMAS पोर्टल से जारी होंगे QR कोड परमिट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु में खनिज परिवहन पर डिजिटल नकेल: MIMAS पोर्टल से जारी होंगे QR कोड परमिट

सारांश

तमिलनाडु सरकार फर्जी ट्रांजिट पास पर अंकुश लगाने के लिए खनिज परिवहन में QR कोड आधारित डिजिटल परमिट लागू करने जा रही है। MIMAS पोर्टल, GPS ट्रैकिंग और वेटब्रिज एकीकरण से रेत व अन्य खनिजों की सप्लाई चेन पर पहली बार व्यापक डिजिटल निगरानी स्थापित होगी।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार खनिज परिवहन के लिए QR कोड आधारित ऑनलाइन परमिट प्रणाली लागू करेगी, जो कागजी मैनुअल पास की जगह लेगी।
परमिट मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम (MIMAS) पोर्टल से जारी होंगे; पोर्टल लॉन्च की तारीख अभी घोषित नहीं।
खनिज ट्रकों को 30 सितंबर 2026 तक GPS डिवाइस लगाना अनिवार्य होगा।
वेटब्रिज को MIMAS से जोड़ा जाएगा ताकि भार का परमिट में दर्ज मात्रा से मिलान हो सके।
तिरुवल्लूर जिले में फर्जी पास पर मिट्टी ले जा रहे लगभग 14 ट्रकों को पहले हिरासत में लिया जा चुका है।
रेत लॉरी ऑपरेटरों ने डिजिटल कदम का स्वागत किया, लेकिन ठेकेदारों की जिम्मेदारी और क्रशर यूनिट निगरानी पर चिंता जताई।

तमिलनाडु सरकार ने राज्य में रेत और अन्य खनिजों के अवैध परिवहन पर लगाम लगाने के लिए क्यूआर (QR) कोड आधारित ऑनलाइन परमिट प्रणाली लागू करने की तैयारी कर ली है। प्राकृतिक संसाधन मंत्री डीके प्रभु ने पुष्टि की है कि ये डिजिटल परमिट मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम (MIMAS) पोर्टल के माध्यम से जारी किए जाएंगे और इसके सक्रिय होते ही कागजी मैनुअल पास पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।

नई प्रणाली में क्या होगा खास

प्रत्येक डिजिटल पास में खनिज की मात्रा, खदान स्रोत और परिवहन मार्ग से जुड़ी सत्यापन-योग्य जानकारी एन्कोड होगी। अधिकारी इस डेटा का मिलान वास्तविक शिपमेंट से कर सकेंगे, जिससे पूरे राज्य में रॉयल्टी और जीएसटी संग्रह पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी।

वेटब्रिज को भी MIMAS से जोड़ा जाएगा, ताकि वाहन का वास्तविक भार परमिट पर दर्ज मात्रा से तुलनात्मक रूप से जाँचा जा सके। कुछ चूना पत्थर खदानों के वेटब्रिज पहले से ही इस पोर्टल से जुड़े हुए हैं और विभाग छोटे खनिजों का उत्पादन करने वाली साइटों को भी इसमें शामिल करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

जीपीएस और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी

खनिज परिवहन में लगे ट्रकों को 30 सितंबर 2026 तक जीपीएस डिवाइस लगाने का निर्देश दिया गया है, जो यात्रा की रियल-टाइम ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त अधिकारियों ने परिवहन पर निगरानी रखने और ओवरलोड वाहनों को पकड़ने के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित करने की योजना बनाई है।

यह ऐसे समय में आया है जब तिरुवल्लूर जिले में फर्जी ट्रांजिट पास और परमिट पर मिट्टी ढो रहे लगभग 14 ट्रकों को हिरासत में लिया गया था और ड्राइवरों तथा वाहन मालिकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।

ऑपरेटरों का स्वागत, लेकिन चिंताएँ भी

रेत लॉरी ऑपरेटरों ने ऑनलाइन दस्तावेजीकरण की दिशा में उठाए गए इस कदम का स्वागत किया है। हालाँकि उन्होंने ठेकेदारों द्वारा फर्जी कागज दिए जाने की स्थिति में जिम्मेदारी के निर्धारण को लेकर चिंता भी जताई है।

ऑपरेटरों की माँग है कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों पर सरकारी अधिकारी की पुष्टि अनिवार्य की जाए, ताकि ड्राइवर और मालिक लोड स्वीकार करने से पहले उनकी वैधता की जाँच कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने क्रशर यूनिटों पर कड़ी निगरानी और पत्थर खदानों के वेटब्रिज को MIMAS पोर्टल से जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने की भी अपील की है।

व्यापक डिजिटलीकरण अभियान का हिस्सा

गौरतलब है कि यह कदम तमिलनाडु के खनन प्रशासन को खनन स्थल से लेकर परिवहन गंतव्य तक पूरी तरह डिजिटल बनाने के व्यापक अभियान का अंग है। विभाग ने हालाँकि अभी तक MIMAS पोर्टल के पूर्ण परिचालन की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।

यदि यह प्रणाली सफलतापूर्वक लागू होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए खनिज प्रशासन के डिजिटलीकरण का एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती तकनीक नहीं, क्रियान्वयन है। राज्य में खनिज चोरी का इतिहास बताता है कि नकली कागजों की जगह नकली डिजिटल प्रविष्टियाँ ले सकती हैं, खासकर जब क्रशर यूनिटों और छोटी खदानों का MIMAS से एकीकरण अभी अधूरा है। GPS अनिवार्यता और वेटब्रिज लिंकेज मिलकर एक मजबूत ढाँचा बना सकते हैं — बशर्ते कंट्रोल रूम को पर्याप्त जनबल और स्वतंत्र ऑडिट का समर्थन मिले। लॉरी ऑपरेटरों की यह माँग कि दस्तावेजों पर सरकारी पुष्टि हो, दरअसल जवाबदेही की उस खाई को उजागर करती है जिसे तकनीक अकेले नहीं भर सकती।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु का QR कोड खनिज परमिट सिस्टम क्या है?
यह एक डिजिटल परमिट प्रणाली है जिसमें रेत और अन्य खनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों को MIMAS पोर्टल से जारी QR कोड युक्त ऑनलाइन पास अनिवार्य रूप से लेने होंगे। यह पुरानी कागजी ट्रांजिट दस्तावेज प्रणाली की जगह लेगा।
यह नया सिस्टम कब से लागू होगा?
प्राकृतिक संसाधन मंत्री डीके प्रभु ने पुष्टि की है कि MIMAS पोर्टल के लॉन्च होते ही मैनुअल पास बंद कर दिए जाएंगे। हालाँकि विभाग ने अभी तक पोर्टल के पूर्ण परिचालन की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।
खनिज ट्रकों के लिए GPS अनिवार्यता की समयसीमा क्या है?
खनिज परिवहन में लगे सभी ट्रकों को 30 सितंबर 2026 तक GPS डिवाइस लगाना अनिवार्य है। यह डिवाइस वाहन की यात्रा की रियल-टाइम निगरानी में सहायक होगा।
रेत लॉरी ऑपरेटरों की क्या चिंताएँ हैं?
ऑपरेटरों ने डिजिटल कदम का स्वागत किया है, लेकिन ठेकेदारों द्वारा फर्जी दस्तावेज दिए जाने पर जिम्मेदारी के निर्धारण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने माँग की है कि इलेक्ट्रॉनिक पास पर सरकारी अधिकारी की पुष्टि अनिवार्य हो और क्रशर यूनिटों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाए।
तिरुवल्लूर में फर्जी पास का मामला क्या था?
तिरुवल्लूर जिले में फर्जी ट्रांजिट पास और परमिट पर मिट्टी ले जा रहे लगभग 14 ट्रकों को हिरासत में लिया गया था। ड्राइवरों और वाहन मालिकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए, जो नई डिजिटल प्रणाली लाने की तात्कालिकता को उजागर करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले