तमिलनाडु में खनन नियम संशोधित: अतिरिक्त शुल्क देकर उच्च मूल्य खनिजों की बिक्री को मिली मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने 23 जुलाई 2026 को राज्य के लघु खनिज रियायत नियम, 1959 में महत्वपूर्ण संशोधन लागू किए हैं, जिसके तहत अधिकृत खनन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली उच्च मूल्य खनिजयुक्त चट्टानों की बिक्री की अनुमति दी गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने इस बदलाव को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है। इसके तहत लीजहोल्डर को प्रयोगशाला परीक्षण कराना होगा और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा।
मुख्य संशोधन क्या हैं
राज्य के प्राकृतिक संसाधन विभाग द्वारा अधिसूचित इस संशोधन का आधार खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 है। इसमें निर्माण और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थरों के वर्गीकरण को भी नए सिरे से परिभाषित किया गया है। पहले के व्यापक 'ग्रेनाइट के अलावा अन्य पत्थर' के विवरण को हटाकर अब विस्तृत श्रेणियाँ बनाई गई हैं — जिनमें प्राकृतिक रूप से घिसा हुआ काला पत्थर, पत्थर के टुकड़े, बोल्डर, टूटे और कुचले हुए पत्थर, मेटल ग्रेवल तथा सड़क निर्माण सामग्री शामिल हैं।
प्रक्रिया कैसे काम करेगी
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई खनन पट्टाधारक (लीजहोल्डर) अपने अनुमति प्राप्त क्षेत्र में मिलने वाली प्राकृतिक आग्नेय चट्टान (नैचुरली इग्नियस रॉक) को बेचना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद चट्टान के नमूने को भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय की प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
यदि प्रयोगशाला विश्लेषण में चट्टान में उच्च मूल्य वाले खनिजों की उपस्थिति की पुष्टि होती है, तो उनका निपटान एवं बिक्री संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जानी होगी। गौरतलब है कि यह व्यवस्था उन खनिजों के लिए एक विनियामक ढाँचा तैयार करती है, जो पहले से अनुमति प्राप्त खनिजों के साथ संयोगवश निकल आते हैं।
अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान
संशोधन में एक विशेष प्रावधान यह भी जोड़ा गया है कि यदि किसी चट्टान में ऐसे खनिज पाए जाते हैं जिनके लिए उच्च दर या मूल्य निर्धारित है, तो लीजहोल्डर अधिकारियों द्वारा तय अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने के बाद उस सामग्री को प्राकृतिक काले पत्थर की श्रेणी में बेच सकता है। यह प्रावधान खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और राजस्व संग्रह दोनों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
आम जनता और उद्योग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में खनन क्षेत्र को लेकर नियामक स्पष्टता की माँग लंबे समय से उठती रही है। नए नियम खनन पट्टाधारकों को उन खनिजों से वैध रूप से राजस्व अर्जित करने का अवसर देते हैं, जो पहले अनिश्चित कानूनी स्थिति में थे। निर्माण उद्योग के लिए पत्थर वर्गीकरण की स्पष्टता से आपूर्ति शृंखला में भी सुधार की संभावना है।
आगे क्या होगा
संशोधित नियम 23 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। अब यह देखना होगा कि भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय प्रयोगशाला परीक्षण की प्रक्रिया को कितनी कुशलता से क्रियान्वित करता है और अतिरिक्त शुल्क की दरें किस स्तर पर तय की जाती हैं — क्योंकि इन्हीं पर नई व्यवस्था की व्यावहारिक सफलता निर्भर करेगी।