3 अगस्त 2026
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तमिलनाडु में खनन नियम संशोधित: अतिरिक्त शुल्क देकर उच्च मूल्य खनिजों की बिक्री को मिली मंजूरी

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तमिलनाडु में खनन नियम संशोधित: अतिरिक्त शुल्क देकर उच्च मूल्य खनिजों की बिक्री को मिली मंजूरी

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने 23 जुलाई को लघु खनिज रियायत नियमों में बदलाव कर खनन पट्टाधारकों को उच्च मूल्य खनिजयुक्त चट्टानें बेचने की अनुमति दी — शर्त है प्रयोगशाला परीक्षण और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान। यह कदम खनन क्षेत्र में नियामक स्पष्टता और राजस्व संग्रह दोनों को साधने की कोशिश है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने 23 जुलाई 2026 को लघु खनिज रियायत नियम, 1959 में संशोधन लागू किए।
अधिकृत खनन क्षेत्रों में मिलने वाली उच्च मूल्य खनिजयुक्त प्राकृतिक चट्टानों की बिक्री अब वैध होगी।
बिक्री से पहले भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय की प्रयोगशाला में नमूना परीक्षण अनिवार्य।
उच्च दर वाले खनिज पाए जाने पर अतिरिक्त शुल्क चुकाकर सामग्री को प्राकृतिक काले पत्थर श्रेणी में बेचा जा सकेगा।
निर्माण पत्थरों के वर्गीकरण को भी विस्तृत किया गया — बोल्डर, मेटल ग्रेवल, कुचले पत्थर आदि अलग-अलग परिभाषित।

तमिलनाडु सरकार ने 23 जुलाई 2026 को राज्य के लघु खनिज रियायत नियम, 1959 में महत्वपूर्ण संशोधन लागू किए हैं, जिसके तहत अधिकृत खनन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली उच्च मूल्य खनिजयुक्त चट्टानों की बिक्री की अनुमति दी गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने इस बदलाव को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है। इसके तहत लीजहोल्डर को प्रयोगशाला परीक्षण कराना होगा और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा।

मुख्य संशोधन क्या हैं

राज्य के प्राकृतिक संसाधन विभाग द्वारा अधिसूचित इस संशोधन का आधार खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 है। इसमें निर्माण और सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थरों के वर्गीकरण को भी नए सिरे से परिभाषित किया गया है। पहले के व्यापक 'ग्रेनाइट के अलावा अन्य पत्थर' के विवरण को हटाकर अब विस्तृत श्रेणियाँ बनाई गई हैं — जिनमें प्राकृतिक रूप से घिसा हुआ काला पत्थर, पत्थर के टुकड़े, बोल्डर, टूटे और कुचले हुए पत्थर, मेटल ग्रेवल तथा सड़क निर्माण सामग्री शामिल हैं।

प्रक्रिया कैसे काम करेगी

नए नियमों के अनुसार, यदि कोई खनन पट्टाधारक (लीजहोल्डर) अपने अनुमति प्राप्त क्षेत्र में मिलने वाली प्राकृतिक आग्नेय चट्टान (नैचुरली इग्नियस रॉक) को बेचना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद चट्टान के नमूने को भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय की प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।

यदि प्रयोगशाला विश्लेषण में चट्टान में उच्च मूल्य वाले खनिजों की उपस्थिति की पुष्टि होती है, तो उनका निपटान एवं बिक्री संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जानी होगी। गौरतलब है कि यह व्यवस्था उन खनिजों के लिए एक विनियामक ढाँचा तैयार करती है, जो पहले से अनुमति प्राप्त खनिजों के साथ संयोगवश निकल आते हैं।

अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान

संशोधन में एक विशेष प्रावधान यह भी जोड़ा गया है कि यदि किसी चट्टान में ऐसे खनिज पाए जाते हैं जिनके लिए उच्च दर या मूल्य निर्धारित है, तो लीजहोल्डर अधिकारियों द्वारा तय अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने के बाद उस सामग्री को प्राकृतिक काले पत्थर की श्रेणी में बेच सकता है। यह प्रावधान खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और राजस्व संग्रह दोनों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

आम जनता और उद्योग पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में खनन क्षेत्र को लेकर नियामक स्पष्टता की माँग लंबे समय से उठती रही है। नए नियम खनन पट्टाधारकों को उन खनिजों से वैध रूप से राजस्व अर्जित करने का अवसर देते हैं, जो पहले अनिश्चित कानूनी स्थिति में थे। निर्माण उद्योग के लिए पत्थर वर्गीकरण की स्पष्टता से आपूर्ति शृंखला में भी सुधार की संभावना है।

आगे क्या होगा

संशोधित नियम 23 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। अब यह देखना होगा कि भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय प्रयोगशाला परीक्षण की प्रक्रिया को कितनी कुशलता से क्रियान्वित करता है और अतिरिक्त शुल्क की दरें किस स्तर पर तय की जाती हैं — क्योंकि इन्हीं पर नई व्यवस्था की व्यावहारिक सफलता निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय की प्रयोगशालाओं की क्षमता और अतिरिक्त शुल्क की दरें तय होने में देरी से यह व्यवस्था कागज़ी भी रह सकती है। खनन क्षेत्र में 'संयोगवश मिले' उच्च मूल्य खनिजों के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए स्वतंत्र निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति एक महत्वपूर्ण खामी है। यह नीति राजस्व बढ़ाने की दिशा में सही कदम है, पर पारदर्शी ऑडिट व्यवस्था के बिना यह नए विवादों की ज़मीन भी तैयार कर सकती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के नए खनन नियम संशोधन में क्या बदला है?
तमिलनाडु सरकार ने लघु खनिज रियायत नियम, 1959 में संशोधन कर अधिकृत खनन क्षेत्रों में पाई जाने वाली उच्च मूल्य खनिजयुक्त चट्टानों की बिक्री की अनुमति दी है। इसके लिए प्रयोगशाला परीक्षण और अतिरिक्त शुल्क का भुगतान अनिवार्य है। साथ ही निर्माण पत्थरों के वर्गीकरण को भी अधिक विस्तृत बनाया गया है।
ये नए नियम कब से लागू हुए हैं?
संशोधित नियम 23 जुलाई 2026 से प्रभावी हैं और इन्हें आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया जा चुका है। राज्य के प्राकृतिक संसाधन विभाग ने इस बदलाव को अधिसूचित किया है।
खनन पट्टाधारक उच्च मूल्य खनिजयुक्त चट्टान कैसे बेच सकते हैं?
लीजहोल्डर को पहले संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट देनी होगी, फिर चट्टान का नमूना भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय की प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। यदि उच्च मूल्य खनिज पाए जाते हैं, तो निर्धारित अतिरिक्त शुल्क चुकाकर सामग्री को प्राकृतिक काले पत्थर श्रेणी में बेचा जा सकता है।
इस संशोधन से खनन उद्योग को क्या फायदा होगा?
पहले ऐसे खनिज जो अनुमति प्राप्त खनन के दौरान संयोगवश निकलते थे, उनकी कानूनी स्थिति अस्पष्ट थी। नए नियमों से लीजहोल्डर इन्हें वैध रूप से बेच सकेंगे और राज्य को भी अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। निर्माण सामग्री के स्पष्ट वर्गीकरण से आपूर्ति शृंखला में भी पारदर्शिता आएगी।
इस नीति के तहत कौन-सी चट्टानें और पत्थर शामिल हैं?
संशोधन में प्राकृतिक आग्नेय चट्टान (नैचुरली इग्नियस रॉक) के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से घिसा हुआ काला पत्थर, पत्थर के टुकड़े, बोल्डर, टूटे और कुचले हुए पत्थर, मेटल ग्रेवल और सड़क निर्माण में उपयोगी पत्थर शामिल हैं। ये सभी अब विस्तृत वर्गीकरण के अंतर्गत आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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