अप्रैल 2026 में घरेलू हवाई यात्री यातायात 2% घटा, पश्चिम एशिया तनाव और ATF कीमतें बनीं वजह
सारांश
मुख्य बातें
भारत में अप्रैल 2026 के दौरान घरेलू हवाई यात्री यातायात सालाना आधार पर 2 प्रतिशत घटकर 1.40 करोड़ रह गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह आँकड़ा 1.43 करोड़ था। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की 29 मई 2026 को जारी ताज़ा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है, जिसमें पश्चिम एशियाई भू-राजनीतिक संघर्ष, विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों और रुपये के अवमूल्यन को मुख्य कारण बताया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
मासिक आधार पर भी यातायात में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई — मार्च 2026 में यह संख्या 1.43 करोड़ थी। एयरलाइन क्षमता तैनाती में सालाना आधार पर 0.6 प्रतिशत और मार्च 2026 की तुलना में 1.4 प्रतिशत की कमी आई।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घरेलू यात्री यातायात 16.77 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर केवल 1.4 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय यातायात पर असर
भारतीय विमानन कंपनियों का अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री यातायात वित्त वर्ष 2026 में 3.9 प्रतिशत बढ़कर 3.5 करोड़ यात्रियों तक पहुँचा। हालाँकि यह वृद्धि आईसीआरए के पहले के 7-9 प्रतिशत के अनुमान से काफी कम रही। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ एयरलाइनों ने पश्चिम एशियाई संघर्ष से जुड़ी माँग में व्यवधान और बढ़ती लागतों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती की घोषणा पहले ही कर दी है।
विमानन उद्योग का दृष्टिकोण 'नकारात्मक'
आईसीआरए ने मार्च 2026 में भारतीय विमानन उद्योग के अपने दृष्टिकोण को 'स्थिर' से संशोधित करके 'नकारात्मक' कर दिया। एजेंसी ने इसके लिए तीन कारण गिनाए — एटीएफ की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का अवमूल्यन, और पश्चिम एशियाई संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र की उपलब्धता में व्यवधान।
गौरतलब है कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दिसंबर 2025 में हवाई किराए की सीमा हटा दी है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि टिकट कीमतों में तेज़ वृद्धि होती है, तो माँग में और कमी आ सकती है।
आम यात्रियों पर असर
एजेंसी के अनुसार, आने वाले महीनों में उड़ान रद्द होने, हवाई क्षेत्र बंद होने और फ्यूल सरचार्ज के कारण हवाई किराए में वृद्धि से यात्री यातायात वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब गर्मियों की छुट्टियों के मौसम में यात्रा माँग आमतौर पर बढ़ती है।
आगे क्या होगा
आईसीआरए ने आगाह किया है कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीट क्षमता हिस्सेदारी में देखी गई वृद्धि उलट सकती है, यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहा। एटीएफ कीमतों और रुपये की स्थिरता पर नज़र रखना विमानन क्षेत्र के लिए अगले तिमाही में निर्णायक रहेगा।