मध्य पूर्व युद्ध से अप्रैल 2026 में वैश्विक हवाई यात्री मांग 3.4% गिरी: IATA
सारांश
मुख्य बातें
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में वैश्विक हवाई यात्री मांग सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत घट गई — और इस गिरावट की मुख्य वजह मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण उस क्षेत्र की एयरलाइंस में आई भारी कमी है। रेवेन्यू पैसेंजर किलोमीटर (RPK) के आधार पर यह गिरावट अप्रैल 2025 की तुलना में दर्ज की गई है।
मुख्य आंकड़े
IATA के अनुसार, उपलब्ध सीट किलोमीटर (ASK) के आधार पर मापी जाने वाली कुल वैश्विक क्षमता में 2.9 प्रतिशत की सालाना गिरावट आई। वैश्विक लोड फैक्टर 83.1 प्रतिशत रहा, जो अप्रैल 2025 की तुलना में 0.4 प्रतिशत अंक कम है।
अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात में अप्रैल के दौरान सालाना आधार पर 5.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय क्षमता में 5.1 प्रतिशत की कमी आई।
मध्य पूर्व की एयरलाइंस सबसे बुरी तरह प्रभावित
मध्य पूर्व की एयरलाइंस में यात्री मांग अप्रैल 2026 में सालाना आधार पर 48.1 प्रतिशत तक गिर गई — जो किसी भी क्षेत्र में सबसे तीव्र गिरावट है। इस क्षेत्र की क्षमता में 38.4 प्रतिशत की कमी आई, जबकि लोड फैक्टर घटकर 70.1 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले की तुलना में 13.1 प्रतिशत अंक कम है।
IATA ने बताया कि ईरान युद्ध के कारण इस क्षेत्र में हवाई यातायात लगातार प्रभावित रहा, हालांकि युद्धविराम लागू होने के बाद गिरावट की रफ्तार में कुछ कमी देखी गई है।
मध्य पूर्व को छोड़ें तो तस्वीर अलग
गौरतलब है कि यदि मध्य पूर्व क्षेत्र को आंकड़ों से अलग कर दिया जाए, तो अप्रैल में वैश्विक यात्री मांग में 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज होती। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय यात्री मांग में 1.9 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिलती। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि वैश्विक एविएशन की बाकी बाज़ारें अपेक्षाकृत स्थिर हैं — संकट एक विशेष भूगोल में केंद्रित है।
IATA महानिदेशक की चेतावनी
IATA के महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा, "मध्य पूर्व में युद्ध के कारण वहाँ की एयरलाइंस की मांग में 46.6 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जिसने कुल वैश्विक मांग को 3.4 प्रतिशत नीचे खींच दिया। फिलहाल एयर ट्रांसपोर्ट सेक्टर की स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है। अप्रैल में जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी से ज्यादा बढ़ गईं, जिससे हवाई किराए भी महंगे हो रहे हैं।"
वॉल्श ने आगे बताया कि आने वाले महीनों के शेड्यूल डेटा से संकेत मिल रहे हैं कि एयरलाइंस कमजोर मांग और बढ़ती ईंधन लागत को देखते हुए अपनी सेवाओं में कटौती कर रही हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक एविएशन उद्योग कोविड-19 के बाद की रिकवरी को मजबूत करने की कोशिश में लगा था। जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें और क्षेत्रीय अस्थिरता मिलकर एयरलाइंस के मार्जिन पर दोहरा दबाव बना रही हैं। यदि मध्य पूर्व में संघर्ष लंबा खिंचा, तो वैश्विक एविएशन की रिकवरी की गति धीमी पड़ सकती है।