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ECLGS 5.0 के तहत एमएसएमई को ₹1 लाख करोड़ वितरित, मध्य पूर्व संकट से राहत: एमएसएमई सचिव

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ECLGS 5.0 के तहत एमएसएमई को ₹1 लाख करोड़ वितरित, मध्य पूर्व संकट से राहत: एमएसएमई सचिव

सारांश

मध्य पूर्व संकट से जूझ रहे एमएसएमई को केंद्र सरकार ने ECLGS 5.0 के ज़रिए ₹1 लाख करोड़ की राहत दी है। एमएसएमई सचिव भरत खेरा ने CII मंच से बताया कि योजना का कुल दायरा ₹2.55 लाख करोड़ है और उद्योग नए निर्यात बाज़ार तलाश रहा है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने ECLGS 5.0 के तहत एमएसएमई और अन्य उद्योगों को ₹1 लाख करोड़ वितरित किए।
कैबिनेट ने 5 मई को ECLGS 5.0 को मंजूरी दी थी; योजना का कुल ऋण लक्ष्य ₹2.55 लाख करोड़ , जिसमें एयरलाइन क्षेत्र के लिए ₹5,000 करोड़ शामिल।
एमएसएमई को 100% और गैर-एमएसएमई को 90% क्रेडिट गारंटी कवर, NCGTC के माध्यम से।
एमएसएमई सचिव भरत खेरा ने 30 जून को CII कार्यक्रम में यह जानकारी दी।
पश्चिम एशिया संकट के बाद उद्योग ने नए निर्यात बाज़ार खोजे; भारत के FTA से एमएसएमई को नए अवसर मिलने की उम्मीद।

केंद्र सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 (ECLGS 5.0) के अंतर्गत मध्य पूर्व संकट से प्रभावित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा अन्य उद्योगों को राहत देने के लिए ₹1 लाख करोड़ का वितरण कर दिया है। यह जानकारी एमएसएमई सचिव भरत खेरा ने मंगलवार, 30 जून को नई दिल्ली में दी।

सीआईआई कार्यक्रम में सचिव का संबोधन

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए खेरा ने कहा, "हमारी कोशिश यह रही है कि मुश्किल समय में एमएसएमई को बेवजह नुकसान न हो।" उन्होंने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से कुछ निर्यात खेप और नकदी प्रवाह पर असर पड़ा है, लेकिन सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप किया।

खेरा ने यह भी बताया कि सरकार ने संकट से उत्पन्न रसद संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए राजस्व विभाग और शिपिंग अधिकारियों के साथ समन्वय किया है।

ECLGS 5.0 की संरचना और दायरा

कैबिनेट ने 5 मई को ECLGS 5.0 को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व संघर्ष के कारण अल्पकालिक नकदी संकट झेल रहे व्यवसायों को सहारा देना है। इस योजना के तहत ₹2.55 लाख करोड़ तक का अतिरिक्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित किया जाना है, जिसमें एयरलाइन क्षेत्र के लिए ₹5,000 करोड़ अलग से निर्धारित हैं।

योजना के अंतर्गत नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से ऋण देने वाली संस्थाओं को गारंटी कवर प्रदान किया जाता है — एमएसएमई को 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई को 90 प्रतिशत। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि संकट के दौर में रोज़गार सुरक्षित रह सके।

उद्योग की लचीलापन और नए बाज़ार

खेरा ने भारतीय उद्योग की अनुकूलन क्षमता की सराहना करते हुए कहा, "चाहे कोविड-19 का समय हो या हाल ही में पश्चिमी एशिया में पैदा हुआ संकट, इसने खुद ही सुधार के उपाय ढूंढे और वैकल्पिक स्रोत तलाशे। आपूर्ति श्रृंखला में आई इन रुकावटों से सीखकर, हमारा एमएसएमई सेक्टर और भी ज्यादा मजबूत और मुश्किल हालात का सामना करने में सक्षम हो गया है।"

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद उद्योग ने निर्यात के लिए नए बाज़ार खोजे हैं। भारत कई मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भी कर रहा है, जिससे एमएसएमई के लिए नए अवसर बनेंगे। उन्होंने कहा कि कई बाज़ार जो पहले बंद थे, वे अब उद्योग के लिए खुल गए हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठन के दौर से गुज़र रही हैं और भारत का एमएसएमई क्षेत्र निर्यात विविधीकरण की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। ECLGS 5.0 के तहत शेष ऋण वितरण और FTA वार्ताओं की प्रगति आने वाले महीनों में इस क्षेत्र की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस ऋण से वास्तविक रोज़गार बचे या नहीं — यह डेटा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। ECLGS के पिछले संस्करण — जो कोविड के दौरान शुरू हुए थे — की समीक्षाओं में पाया गया कि लाभ असमान रूप से बड़े एमएसएमई तक पहुँचे, जबकि सूक्ष्म उद्यम अक्सर पात्रता की जटिलताओं में फँसे रहे। मध्य पूर्व संकट की प्रकृति कोविड से अलग है — यह माँग का नहीं, आपूर्ति श्रृंखला और नकदी प्रवाह का संकट है — इसलिए ऋण-आधारित समाधान की सीमाएँ हैं। FTA की बात उत्साहजनक है, पर जब तक वे अमल में नहीं आते, छोटे निर्यातकों के लिए वैकल्पिक बाज़ार तलाशना महँगा और जटिल बना रहेगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ECLGS 5.0 क्या है और यह एमएसएमई की कैसे मदद करता है?
ECLGS 5.0 केंद्र सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का पाँचवाँ संस्करण है, जिसे कैबिनेट ने 5 मई को मंजूरी दी। यह मध्य पूर्व संकट से प्रभावित व्यवसायों को ₹2.55 लाख करोड़ तक का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराता है, जिसमें एमएसएमई को 100% और गैर-एमएसएमई को 90% क्रेडिट गारंटी कवर मिलती है।
अब तक कितनी राशि वितरित की जा चुकी है?
एमएसएमई सचिव भरत खेरा के अनुसार, 30 जून तक ECLGS 5.0 के तहत ₹1 लाख करोड़ का वितरण किया जा चुका है। योजना का कुल लक्ष्य ₹2.55 लाख करोड़ है, यानी अभी और राशि वितरित होनी बाकी है।
मध्य पूर्व संकट का एमएसएमई पर क्या असर पड़ा?
पश्चिम एशिया संकट की वजह से कुछ निर्यात खेप और नकदी प्रवाह प्रभावित हुए हैं। रसद संबंधी कठिनाइयाँ भी सामने आईं, जिनके समाधान के लिए सरकार ने राजस्व विभाग और शिपिंग अधिकारियों से समन्वय किया।
NCGTC इस योजना में क्या भूमिका निभाता है?
नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) ऋण देने वाली संस्थाओं को गारंटी कवर प्रदान करती है। इससे बैंक और वित्तीय संस्थाएँ संकट के दौर में एमएसएमई को बिना अत्यधिक जोखिम के ऋण दे सकती हैं।
मध्य पूर्व संकट के बाद एमएसएमई के लिए आगे क्या संभावनाएँ हैं?
सरकार के अनुसार, उद्योग ने संकट के बाद नए निर्यात बाज़ार तलाशे हैं। भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से एमएसएमई के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है और कई बाज़ार जो पहले बंद थे, वे अब उद्योग के लिए सुलभ हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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