ECLGS 5.0 के तहत एमएसएमई को ₹1 लाख करोड़ वितरित, मध्य पूर्व संकट से राहत: एमएसएमई सचिव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 (ECLGS 5.0) के अंतर्गत मध्य पूर्व संकट से प्रभावित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा अन्य उद्योगों को राहत देने के लिए ₹1 लाख करोड़ का वितरण कर दिया है। यह जानकारी एमएसएमई सचिव भरत खेरा ने मंगलवार, 30 जून को नई दिल्ली में दी।
सीआईआई कार्यक्रम में सचिव का संबोधन
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए खेरा ने कहा, "हमारी कोशिश यह रही है कि मुश्किल समय में एमएसएमई को बेवजह नुकसान न हो।" उन्होंने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से कुछ निर्यात खेप और नकदी प्रवाह पर असर पड़ा है, लेकिन सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप किया।
खेरा ने यह भी बताया कि सरकार ने संकट से उत्पन्न रसद संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए राजस्व विभाग और शिपिंग अधिकारियों के साथ समन्वय किया है।
ECLGS 5.0 की संरचना और दायरा
कैबिनेट ने 5 मई को ECLGS 5.0 को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व संघर्ष के कारण अल्पकालिक नकदी संकट झेल रहे व्यवसायों को सहारा देना है। इस योजना के तहत ₹2.55 लाख करोड़ तक का अतिरिक्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित किया जाना है, जिसमें एयरलाइन क्षेत्र के लिए ₹5,000 करोड़ अलग से निर्धारित हैं।
योजना के अंतर्गत नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से ऋण देने वाली संस्थाओं को गारंटी कवर प्रदान किया जाता है — एमएसएमई को 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई को 90 प्रतिशत। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि संकट के दौर में रोज़गार सुरक्षित रह सके।
उद्योग की लचीलापन और नए बाज़ार
खेरा ने भारतीय उद्योग की अनुकूलन क्षमता की सराहना करते हुए कहा, "चाहे कोविड-19 का समय हो या हाल ही में पश्चिमी एशिया में पैदा हुआ संकट, इसने खुद ही सुधार के उपाय ढूंढे और वैकल्पिक स्रोत तलाशे। आपूर्ति श्रृंखला में आई इन रुकावटों से सीखकर, हमारा एमएसएमई सेक्टर और भी ज्यादा मजबूत और मुश्किल हालात का सामना करने में सक्षम हो गया है।"
उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद उद्योग ने निर्यात के लिए नए बाज़ार खोजे हैं। भारत कई मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भी कर रहा है, जिससे एमएसएमई के लिए नए अवसर बनेंगे। उन्होंने कहा कि कई बाज़ार जो पहले बंद थे, वे अब उद्योग के लिए खुल गए हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठन के दौर से गुज़र रही हैं और भारत का एमएसएमई क्षेत्र निर्यात विविधीकरण की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। ECLGS 5.0 के तहत शेष ऋण वितरण और FTA वार्ताओं की प्रगति आने वाले महीनों में इस क्षेत्र की दिशा तय करेगी।