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ECLGS 5.0 के तहत एमएसएमई को ₹1 लाख करोड़ वितरित, मध्य पूर्व संकट से राहत: सचिव भरत खेरा

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ECLGS 5.0 के तहत एमएसएमई को ₹1 लाख करोड़ वितरित, मध्य पूर्व संकट से राहत: सचिव भरत खेरा

सारांश

मध्य पूर्व संघर्ष से नकदी संकट में फँसे एमएसएमई को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने ECLGS 5.0 के तहत ₹1 लाख करोड़ वितरित कर दिए हैं। योजना का कुल लक्ष्य ₹2.55 लाख करोड़ का अतिरिक्त ऋण प्रवाह है, जो एमएसएमई को 100% और गैर-एमएसएमई को 90% गारंटी कवर देती है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने ECLGS 5.0 के तहत मध्य पूर्व संकट से प्रभावित एमएसएमई को ₹1 लाख करोड़ वितरित किए।
योजना को 5 मई को कैबिनेट की मंजूरी मिली; कुल ऋण प्रवाह लक्ष्य ₹2.55 लाख करोड़ , जिसमें एयरलाइन क्षेत्र के लिए ₹5,000 करोड़ शामिल।
NCGTC के ज़रिए एमएसएमई को 100% और गैर-एमएसएमई को 90% क्रेडिट गारंटी कवर।
एमएसएमई सचिव भरत खेरा ने CII कार्यक्रम में जानकारी दी; लॉजिस्टिक्स बाधाओं के लिए आयकर विभाग और शिपिंग अधिकारियों से समन्वय।
पश्चिम एशिया संकट के बाद उद्योग ने निर्यात के नए बाज़ार तलाशे; भारत के FTA से एमएसएमई को नए अवसर मिलने की उम्मीद।

केंद्र सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 (ECLGS 5.0) के माध्यम से मध्य पूर्व संकट से प्रभावित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा अन्य उद्योगों को राहत देने के लिए ₹1 लाख करोड़ वितरित किए हैं। यह जानकारी एमएसएमई सचिव भरत खेरा ने मंगलवार, 30 जून को नई दिल्ली में दी। यह कदम उन उद्यमों को नकदी संकट से उबारने के लिए उठाया गया है जिनके निर्यात खेप और नकद प्रवाह पर पश्चिम एशिया के चल रहे संघर्ष का सीधा असर पड़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए खेरा ने कहा, 'हमारी कोशिश यह रही है कि मुश्किल समय में एमएसएमई को बेवजह नुकसान न हो।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कुछ निर्यात खेप और नकद प्रवाह प्रभावित हुए हैं, लेकिन सरकार ने ECLGS के ज़रिए तरलता और कार्यशील पूंजी की चुनौतियों से निपटने में उद्यमों की मदद की है।

सचिव ने यह भी बताया कि लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार ने आयकर विभाग और शिपिंग अधिकारियों के साथ समन्वय किया है।

ECLGS 5.0 की संरचना और दायरा

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को ECLGS 5.0 को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व संघर्ष के कारण अल्पकालिक तरलता संकट से जूझ रहे व्यवसायों को सहारा देना है। इस योजना के तहत कुल ₹2.55 लाख करोड़ तक का अतिरिक्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने का लक्ष्य है, जिसमें एयरलाइन क्षेत्र के लिए ₹5,000 करोड़ अलग से निर्धारित हैं।

योजना के अंतर्गत नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से ऋण देने वाली संस्थाओं को गारंटी कवर प्रदान किया जाता है — एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई के लिए 90 प्रतिशत। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि संकट के दौर में रोज़गार सुरक्षित रहे।

उद्योग की प्रतिरोधक क्षमता पर ज़ोर

खेरा ने एमएसएमई क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता की सराहना करते हुए कहा, 'मेरा मानना है कि हमारा उद्योग स्वभाव से ही बहुत मजबूत और मुश्किल हालात का सामना करने में सक्षम है। चाहे कोविड-19 का समय हो या हाल ही में पश्चिमी एशिया में पैदा हुआ संकट, इसने खुद ही सुधार के उपाय ढूंढे और वैकल्पिक स्रोत तलाशे। आपूर्ति श्रृंखला में आई इन रुकावटों से सीखकर, हमारा एमएसएमई सेक्टर और भी ज़्यादा मजबूत हो गया है।'

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ एक के बाद एक झटके झेल रही हैं — पहले महामारी, फिर यूक्रेन संघर्ष और अब मध्य पूर्व तनाव। गौरतलब है कि भारत के एमएसएमई क्षेत्र में देश के कुल निर्यात में करीब 45 प्रतिशत का योगदान है।

नए बाज़ारों की तलाश और FTA का अवसर

खेरा ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद उद्योग ने निर्यात के लिए नए बाज़ार तलाशे हैं। भारत कई मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर भी बातचीत कर रहा है, जिससे एमएसएमई के लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा कि कई ऐसे बाज़ार जो पहले बंद थे, वे अब भारतीय उद्योग के लिए सुलभ हो गए हैं।

आगे चलकर, ECLGS 5.0 के तहत शेष राशि का वितरण और नए FTA की प्रगति यह तय करेगी कि भारतीय एमएसएमई इस वैश्विक उथल-पुथल को दीर्घकालिक अवसर में बदल पाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह राशि किन क्षेत्रों और किस आकार के उद्यमों तक पहुँची। पिछले ECLGS संस्करणों में भी बड़ी घोषणाएँ हुईं, लेकिन सूक्ष्म उद्यमों तक पहुँच सीमित रही और एनपीए का बोझ बैंकों पर पड़ा। ₹2.55 लाख करोड़ के कुल लक्ष्य में से अभी तक केवल ₹1 लाख करोड़ ही वितरित हुए हैं — शेष राशि की गति और पारदर्शिता पर नज़र रखना ज़रूरी है। FTA से नए बाज़ार खुलने की बात सही है, पर जब तक एमएसएमई की लॉजिस्टिक्स लागत और अनुपालन बोझ कम नहीं होता, ये अवसर कागज़ी ही रहेंगे।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ECLGS 5.0 क्या है और यह एमएसएमई की कैसे मदद करती है?
ECLGS 5.0 केंद्र सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का पाँचवाँ संस्करण है, जिसे 5 मई को कैबिनेट ने मंजूरी दी। यह मध्य पूर्व संकट से प्रभावित एमएसएमई और अन्य उद्यमों को तरलता और कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराती है, जिसमें एमएसएमई को 100% और गैर-एमएसएमई को 90% क्रेडिट गारंटी कवर दिया जाता है।
ECLGS 5.0 के तहत अब तक कितनी राशि वितरित की गई है?
एमएसएमई सचिव भरत खेरा के अनुसार, अब तक ₹1 लाख करोड़ वितरित किए जा चुके हैं। योजना का कुल लक्ष्य ₹2.55 लाख करोड़ का अतिरिक्त ऋण प्रवाह है, जिसमें एयरलाइन क्षेत्र के लिए ₹5,000 करोड़ अलग से निर्धारित हैं।
मध्य पूर्व संकट का भारतीय एमएसएमई पर क्या असर पड़ा?
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कुछ निर्यात खेप और नकद प्रवाह प्रभावित हुए हैं। लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाएँ भी उत्पन्न हुईं, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार ने आयकर विभाग और शिपिंग अधिकारियों के साथ समन्वय किया है।
ECLGS 5.0 का लाभ किन उद्यमों को मिलेगा?
यह योजना एमएसएमई के साथ-साथ गैर-एमएसएमई उद्यमों और एयरलाइन क्षेत्र को भी कवर करती है। NCGTC के ज़रिए ऋण देने वाली संस्थाओं को गारंटी दी जाती है ताकि वे योग्य उधारकर्ताओं को बिना अतिरिक्त जोखिम के ऋण दे सकें।
मध्य पूर्व संकट के बाद भारतीय एमएसएमई के लिए नए अवसर क्या हैं?
एमएसएमई सचिव के अनुसार, संकट के बाद उद्योग ने निर्यात के लिए नए बाज़ार तलाशे हैं और भारत कई मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर बातचीत कर रहा है। कई ऐसे बाज़ार जो पहले बंद थे, वे अब भारतीय उद्योग के लिए सुलभ हो गए हैं, जिससे एमएसएमई को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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