कैबिनेट ने ECLGS 5.0 को दी मंजूरी: MSME को 100% और एयरलाइंस को ₹1,500 करोड़ तक गारंटी कवर

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कैबिनेट ने ECLGS 5.0 को दी मंजूरी: MSME को 100% और एयरलाइंस को ₹1,500 करोड़ तक गारंटी कवर

सारांश

पश्चिम एशिया संकट से नकदी की तंगी झेल रहे MSME और एयरलाइंस को राहत देने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने ECLGS 5.0 को मंजूरी दी। MSME को 100% गारंटी कवर और एयरलाइंस को ₹1,500 करोड़ तक ऋण — बिना किसी गारंटी शुल्क के। यह कोविड-काल में शुरू हुई इस योजना का सबसे नया और व्यापक संस्करण है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 5 मई 2026 को ECLGS 5.0 को मंजूरी दी, जो 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी।
MSME को 100% गारंटी कवर; गैर-MSME और एयरलाइन सेक्टर को 90% गारंटी कवर।
एयरलाइंस को पीक वर्किंग कैपिटल का 100% तक ऋण, अधिकतम सीमा ₹1,500 करोड़ प्रति उधारकर्ता ।
एमएसएमई के लिए ऋण सीमा अधिकतम ₹100 करोड़ ; 5 वर्ष की अवधि, 1 वर्ष का मोरेटोरियम।
एयरलाइंस के लिए 7 वर्ष की ऋण अवधि और 2 वर्ष का मोरेटोरियम।
योजना में कोई गारंटी शुल्क नहीं ; लाभ के लिए खाता 31 मार्च 2026 तक 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में होना जरूरी।

केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार, 5 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 को औपचारिक मंजूरी दे दी। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के कारण नकदी की तंगी से जूझ रहे एमएसएमई और एयरलाइन सेक्टर को वित्तीय राहत प्रदान करना है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋणों पर बढ़ा हुआ गारंटी कवर उपलब्ध कराया जाएगा।

ECLGS 5.0 में क्या है खास

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को इस योजना के तहत 100 प्रतिशत गारंटी कवर दिया जाएगा, जबकि गैर-एमएसएमई और एयरलाइन सेक्टर के लिए 90 प्रतिशत गारंटी कवर निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि बैंक और वित्तीय संस्थाएं डिफॉल्ट के जोखिम की चिंता किए बिना अधिक ऋण दे सकें।

योजना की एक और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें कोई गारंटी शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे उधारकर्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि ECLGS के पिछले चरणों में भी इसी सिद्धांत का पालन किया गया था।

ऋण सीमा और पात्रता

ECLGS 5.0 के तहत पात्र उधारकर्ता वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के दौरान अपने पीक वर्किंग कैपिटल उपयोग के 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण ले सकेंगे। एमएसएमई और अन्य कारोबारों के लिए यह सीमा अधिकतम ₹100 करोड़ प्रति उधारकर्ता तय की गई है।

एयरलाइन सेक्टर के लिए यह सीमा कहीं अधिक रखी गई है — योग्य एयरलाइंस अपने पीक वर्किंग कैपिटल उपयोग का 100 प्रतिशत तक ऋण ले सकती हैं, जिसकी अधिकतम सीमा ₹1,500 करोड़ प्रति उधारकर्ता होगी, बशर्ते वे निर्धारित शर्तें पूरी करें।

इस योजना का लाभ केवल वे उधारकर्ता उठा सकेंगे जिनके पास 31 मार्च 2026 तक पहले से वर्किंग कैपिटल या अन्य ऋण सुविधाएं मौजूद हों और जिनका खाता 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में हो।

ऋण चुकाने की शर्तें

एमएसएमई और अन्य कारोबारों के लिए ऋण की कुल अवधि 5 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें पहले 1 वर्ष का मोरेटोरियम होगा — इस दौरान केवल ब्याज देना होगा, मूलधन नहीं।

एयरलाइंस के लिए ऋण अवधि 7 वर्ष तय की गई है, जिसमें 2 वर्ष की राहत अवधि (मोरेटोरियम) दी जाएगी। यह एयरलाइन सेक्टर की दीर्घकालिक पूंजी आवश्यकताओं को देखते हुए विशेष रूप से अनुकूलित किया गया है।

योजना की समय-सीमा

ECLGS 5.0 NCGTC द्वारा दिशानिर्देश जारी होने की तिथि से लेकर 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। यह ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बना हुआ है।

आगे क्या होगा

सरकार को उम्मीद है कि यह योजना मध्य पूर्व संकट से उत्पन्न नकदी की समस्या से जूझ रहे कारोबारों को ठोस राहत देगी। यह ECLGS की श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है, जिसकी शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान हुई थी और जो तब से संकट-प्रतिक्रिया का एक स्थापित साधन बन चुकी है। बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि गारंटी शुल्क की अनुपस्थिति और उदार मोरेटोरियम प्रावधान इस योजना को पिछले चरणों की तुलना में अधिक सुलभ बनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ की उदार सीमा और 7 वर्षीय अवधि यह संकेत देती है कि सरकार इस क्षेत्र की दीर्घकालिक नकदी समस्या को गंभीरता से ले रही है। हालांकि, ECLGS के पिछले चरणों में NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) के जोखिम को लेकर आलोचकों ने सवाल उठाए थे — 100% सरकारी गारंटी बैंकों को उधार देने में तो प्रोत्साहित करती है, पर नैतिक जोखिम (moral hazard) की संभावना भी बढ़ाती है। असली कसौटी यह होगी कि NCGTC के दिशानिर्देश ऋण वितरण को वास्तविक कारोबारी पुनरुद्धार से कितनी मजबूती से जोड़ते हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ECLGS 5.0 क्या है और इसे क्यों लाया गया?
ECLGS 5.0 केंद्र सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का नवीनतम चरण है, जिसे 5 मई 2026 को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसे पश्चिम एशिया संकट के कारण नकदी की तंगी झेल रहे MSME और एयरलाइन सेक्टर को राहत देने के लिए लाया गया है।
ECLGS 5.0 के तहत MSME को कितना ऋण मिल सकता है?
MSME पात्र उधारकर्ता वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के पीक वर्किंग कैपिटल उपयोग का 20% तक अतिरिक्त ऋण ले सकते हैं, जिसकी अधिकतम सीमा ₹100 करोड़ प्रति उधारकर्ता है। इस पर 100% सरकारी गारंटी कवर मिलेगा और कोई गारंटी शुल्क नहीं लगेगा।
एयरलाइंस के लिए ECLGS 5.0 में क्या विशेष प्रावधान हैं?
योग्य एयरलाइंस अपने पीक वर्किंग कैपिटल उपयोग का 100% तक ऋण ले सकती हैं, जिसकी अधिकतम सीमा ₹1,500 करोड़ प्रति उधारकर्ता है। ऋण अवधि 7 वर्ष होगी जिसमें 2 वर्ष का मोरेटोरियम शामिल है।
ECLGS 5.0 का लाभ लेने के लिए क्या शर्तें हैं?
उधारकर्ता का खाता 31 मार्च 2026 तक 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में होना चाहिए और उसके पास उस तिथि तक पहले से वर्किंग कैपिटल या अन्य ऋण सुविधाएं होनी चाहिए। यह योजना NCGTC द्वारा दिशानिर्देश जारी होने की तिथि से 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी।
ECLGS 5.0 और पिछले ECLGS चरणों में क्या अंतर है?
पिछले ECLGS चरण मुख्यतः कोविड-19 से प्रभावित कारोबारों के लिए थे, जबकि ECLGS 5.0 पश्चिम एशिया भू-राजनीतिक संकट को ध्यान में रखकर बनाया गया है। एयरलाइन सेक्टर के लिए ₹1,500 करोड़ की विशेष सीमा और 7 वर्षीय ऋण अवधि इस चरण की नई विशेषताएं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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