6 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईसीएमएस के तहत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी, ₹7,500 करोड़ से अधिक का निवेश; इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मिलेगी मजबूती

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईसीएमएस के तहत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी, ₹7,500 करोड़ से अधिक का निवेश; इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मिलेगी मजबूती

सारांश

केंद्र सरकार ने ईसीएमएस के तहत 12 नई परियोजनाओं को हरी झंडी दी — ₹7,500 करोड़ से अधिक का निवेश और दायरे में कच्चा माल व कैपिटल गुड्स भी शामिल। साथ ही 'सेमीकॉन 2.0' पोर्टल लॉन्च — यह भारत के 2030 तक $500 अरब इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के लक्ष्य की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

कृष्णन ने 6 नवंबर 2026 को ईसीएमएस के तहत 12 नई परियोजनाओं की मंजूरी की घोषणा की।
इन परियोजनाओं में ₹7,500 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।
मंजूर परियोजनाओं में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के साथ-साथ कच्ची सामग्री और कैपिटल गुड्स भी शामिल हैं।
सरकार ने सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत 'सेमीकॉन 2.0' वेब पोर्टल भी लॉन्च किया।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ पहुँचा।
भारत का लक्ष्य 2030 तक $500 अरब का इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम और $150 अरब का निर्यात।

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के अंतर्गत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें ₹7,500 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने 6 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में यह जानकारी दी। इस निर्णय से घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई गति मिलेगी और भारत के कंपोनेंट इकोसिस्टम की नींव और मजबूत होगी।

मंजूर परियोजनाओं का दायरा

इस बार स्वीकृत आवेदनों में केवल इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स ही नहीं, बल्कि कच्ची सामग्री और कैपिटल गुड्स से जुड़ी परियोजनाएँ भी शामिल हैं। इससे ईसीएमएस का दायरा इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन के अपस्ट्रीम क्षेत्रों — यानी कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों — तक विस्तृत हो गया है।

नीति-निर्माताओं का जोर अब स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन को गहरा करने पर है, ताकि पूरी सप्लाई चेन में आयात-निर्भरता कम की जा सके। गौरतलब है कि यह बदलाव भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जो देश को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना चाहती है।

सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम और नया पोर्टल

उसी दिन सरकार ने सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत 'सेमीकॉन 2.0' वेब एप्लिकेशन पोर्टल भी लॉन्च किया। यह पोर्टल सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेशकों और आवेदकों के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में उथल-पुथल के बीच भारत अपनी चिप-निर्माण क्षमता को तेज़ी से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की बड़ी छलाँग

17 सितंबर को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ पहुँच गया है — यानी एक दशक में सात गुने से अधिक की वृद्धि।

इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ हो गया है। फैक्टशीट में कहा गया है: 'इस निरंतर विकास ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगली प्राथमिकता घरेलू स्तर पर कंपोनेंट्स का निर्माण, अधिक वैल्यू एडिशन और सप्लाई चेन को और अधिक लचीला बनाकर इस इकोसिस्टम को और गहरा करना है।'

2030 तक ₹500 अरब डॉलर का लक्ष्य

फैक्टशीट के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक $500 अरब का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करना और $150 अरब का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात हासिल करना है। इन लक्ष्यों को देखते हुए ईसीएमएस के अंतर्गत ताज़ा मंजूरियाँ उस महत्वाकांक्षी रोडमैप की एक अहम कड़ी मानी जा रही हैं।

स्मार्टफोन और ऑटोमोबाइल से लेकर टेलीकॉम नेटवर्क और औद्योगिक प्रणालियों तक, इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीकी प्रगति और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता की धुरी बन चुके हैं। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार यह तय करेगी कि भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स रेस में कितनी तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये परियोजनाएँ समयसीमा में ज़मीन पर उतरेंगी — भारत के PLI अनुभव में देरी और क्षमता-निर्माण बनाम वास्तविक उत्पादन का अंतर बार-बार सामने आया है। कैपिटल गुड्स और कच्चे माल को दायरे में शामिल करना रणनीतिक रूप से सही है, क्योंकि असेंबली-स्तर की निर्भरता तोड़े बिना 'मेड इन इंडिया' का दावा खोखला रहता है। $500 अरब का 2030 लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन ₹7,500 करोड़ की ये नई मंजूरियाँ उस विशाल लक्ष्य के सामने अभी एक छोटा हिस्सा हैं — गति बनाए रखना ही असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईसीएमएस क्या है और इसके तहत क्या मंजूरी मिली है?
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) भारत सरकार की वह योजना है जो घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण को प्रोत्साहित करती है। 6 नवंबर 2026 को इसके तहत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें ₹7,500 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।
इन 12 नई परियोजनाओं में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
मंजूर परियोजनाओं में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के साथ-साथ कच्ची सामग्री और कैपिटल गुड्स भी शामिल हैं, जिससे योजना का दायरा इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन के अपस्ट्रीम क्षेत्रों तक विस्तृत हो गया है। यह बदलाव आयात-निर्भरता कम करने और स्थानीय वैल्यू एडिशन बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
सेमीकॉन 2.0 पोर्टल क्या है?
सेमीकॉन 2.0 एक नया वेब एप्लिकेशन पोर्टल है जिसे सरकार ने सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत 6 नवंबर 2026 को लॉन्च किया। यह पोर्टल सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेशकों और आवेदकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयार किया गया है।
भारत का 2030 तक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में क्या लक्ष्य है?
एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक $500 अरब का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना और $150 अरब का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात हासिल करना है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ पहुँच चुका है।
ईसीएमएस की ताज़ा मंजूरियों का आम उपभोक्ताओं और उद्योग पर क्या असर होगा?
घरेलू कंपोनेंट उत्पादन बढ़ने से आयातित पुर्जों पर निर्भरता घटेगी, जिससे दीर्घकालिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की लागत कम हो सकती है। उद्योग के लिए यह मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को अधिक लचीला और प्रतिस्पर्धी बनाएगा, खासकर वैश्विक सप्लाई चेन व्यवधानों के संदर्भ में।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 10 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले