ईसीएमएस के तहत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी, ₹7,500 करोड़ से अधिक का निवेश; इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मिलेगी मजबूती
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के अंतर्गत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें ₹7,500 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने 6 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में यह जानकारी दी। इस निर्णय से घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई गति मिलेगी और भारत के कंपोनेंट इकोसिस्टम की नींव और मजबूत होगी।
मंजूर परियोजनाओं का दायरा
इस बार स्वीकृत आवेदनों में केवल इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स ही नहीं, बल्कि कच्ची सामग्री और कैपिटल गुड्स से जुड़ी परियोजनाएँ भी शामिल हैं। इससे ईसीएमएस का दायरा इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन के अपस्ट्रीम क्षेत्रों — यानी कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों — तक विस्तृत हो गया है।
नीति-निर्माताओं का जोर अब स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन को गहरा करने पर है, ताकि पूरी सप्लाई चेन में आयात-निर्भरता कम की जा सके। गौरतलब है कि यह बदलाव भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जो देश को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना चाहती है।
सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम और नया पोर्टल
उसी दिन सरकार ने सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत 'सेमीकॉन 2.0' वेब एप्लिकेशन पोर्टल भी लॉन्च किया। यह पोर्टल सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेशकों और आवेदकों के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में उथल-पुथल के बीच भारत अपनी चिप-निर्माण क्षमता को तेज़ी से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की बड़ी छलाँग
17 सितंबर को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ पहुँच गया है — यानी एक दशक में सात गुने से अधिक की वृद्धि।
इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ हो गया है। फैक्टशीट में कहा गया है: 'इस निरंतर विकास ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगली प्राथमिकता घरेलू स्तर पर कंपोनेंट्स का निर्माण, अधिक वैल्यू एडिशन और सप्लाई चेन को और अधिक लचीला बनाकर इस इकोसिस्टम को और गहरा करना है।'
2030 तक ₹500 अरब डॉलर का लक्ष्य
फैक्टशीट के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक $500 अरब का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करना और $150 अरब का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात हासिल करना है। इन लक्ष्यों को देखते हुए ईसीएमएस के अंतर्गत ताज़ा मंजूरियाँ उस महत्वाकांक्षी रोडमैप की एक अहम कड़ी मानी जा रही हैं।
स्मार्टफोन और ऑटोमोबाइल से लेकर टेलीकॉम नेटवर्क और औद्योगिक प्रणालियों तक, इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीकी प्रगति और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता की धुरी बन चुके हैं। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार यह तय करेगी कि भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स रेस में कितनी तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।