महाराष्ट्र में 36,211 कंपनियां बंद: फडणवीस बोले — 76% निष्क्रिय इकाइयां, औद्योगिक पलायन का दावा निराधार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 अगस्त 2026 को राज्य में पिछले पाँच वर्षों में 36,211 पंजीकृत कंपनियों के बंद होने को लेकर उठ रहे 'औद्योगिक पलायन' के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें से 76 फीसदी इकाइयाँ ऐसी थीं जो पहले से ही गैर-संचालित या 'डिफंक्ट' थीं और जिन्हें कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की नियमित नियामकीय अनुपालन प्रक्रिया के तहत आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाया गया है।
विवाद की जड़ क्या है
यह बहस तब शुरू हुई जब लोकसभा सांसद राजाभाऊ वाजे को संसद में केंद्रीय कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा की ओर से दिए गए जवाब से यह जानकारी सामने आई कि महाराष्ट्र में पिछले पाँच वर्षों में 36,211 निजी कंपनियाँ बंद हुई हैं। विपक्ष ने इन आँकड़ों को राज्य में औद्योगिक मंदी और कंपनियों के बड़े पैमाने पर पलायन का प्रमाण बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों ने भी इन आँकड़ों की व्याख्या सक्रिय कारोबारों के बड़े पैमाने पर बंद होने के रूप में की, जिससे राजनीतिक विवाद और गहरा हो गया।
फडणवीस का आँकड़ों पर विश्लेषण
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए बंद हुई कंपनियों का श्रेणी-वार विवरण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, बंद 36,211 कंपनियों में से:
76 फीसदी — डिफंक्ट यानी ऐसी इकाइयाँ जो गैर-संचालित थीं या जिन्होंने कभी व्यावसायिक गतिविधियाँ शुरू ही नहीं कीं।
12 फीसदी — बड़ी कॉरपोरेट संरचनाओं में विलय हो गईं।
2 फीसदी — औपचारिक परिसमापन के तहत कारोबार पूरी तरह बंद हुए।
10 फीसदी — अन्य नियामकीय अनुपालन कारणों से रजिस्टर से हटाई गईं।
फडणवीस ने कहा, 'आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि बंद किए गए पंजीकरणों में 76 फीसदी डिफंक्ट कंपनियों के हैं — ऐसी इकाइयाँ जो गैर-संचालित थीं या जिन्होंने कभी कारोबार शुरू ही नहीं किया।'
MCA की नियमित प्रक्रिया का संदर्भ
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि MCA समय-समय पर निष्क्रिय कारोबारों का पंजीकरण रद्द करता है। उन्होंने बताया कि 2019-20 में चलाए गए विशेष अभियानों के तहत देशभर में करीब 6 लाख डिफंक्ट कंपनियों को रजिस्टर से हटाया गया था। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में हर साल औसतन 20,000 से 22,000 इकाइयों का कॉरपोरेट डीरजिस्ट्रेशन होता है, जो इस प्रक्रिया को एक सामान्य नियामकीय गतिविधि बनाता है।
गौरतलब है कि कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया जाना सक्रिय विनिर्माण इकाइयों के राज्य छोड़ने का संकेत नहीं है — यह एक महत्वपूर्ण अंतर है जिसे आलोचकों ने नज़रअंदाज़ किया।
महाराष्ट्र की बाज़ार स्थिति
फडणवीस ने आधिकारिक आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सक्रिय कंपनियों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र 3,96,211 सक्रिय कंपनियों के साथ देशभर में पहले स्थान पर है। नए पंजीकरण के मामले में भी राज्य अग्रणी बना हुआ है — वर्ष 2025-26 में महाराष्ट्र में 41,525 नई कंपनियाँ पंजीकृत हुईं।
तुलनात्मक रूप से, नए पंजीकरण में अन्य राज्यों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा: उत्तर प्रदेश — 27,494; दिल्ली — 20,272; कर्नाटक — 17,857; तेलंगाना — 17,300; तमिलनाडु — 17,024; गुजरात — 14,666; पश्चिम बंगाल — 10,598।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में वृद्धि
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय कॉरपोरेट विकास का हवाला देते हुए बताया कि 2015-16 में देश में सक्रिय कंपनियों की संख्या 6,78,768 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 21,17,747 हो गई है — यानी एक दशक में तीन गुने से भी अधिक वृद्धि। यह आँकड़ा दर्शाता है कि भारत का कॉरपोरेट पारिस्थितिकी तंत्र समग्र रूप से विस्तार की राह पर है और महाराष्ट्र इस विस्तार में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष इन आँकड़ों पर अपना रुख किस दिशा में ले जाता है और क्या MCA की ओर से राज्यवार डिफंक्ट कंपनियों का और विस्तृत विश्लेषण सार्वजनिक किया जाता है।