बैंक हड़ताल 28 सितंबर: वित्त मंत्रालय ने PSB, RRB, IBA और NABARD के साथ बुलाई आपात बैठक
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 से प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल से पहले सोमवार, 20 सितंबर को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB), इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और नाबार्ड (NABARD) के मुख्य कार्यकारियों की आपात बैठक बुलाई है। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का मकसद हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाओं की निरंतरता और आकस्मिक योजनाओं की समीक्षा करना है।
बैठक की अहमियत और पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे नाजुक समय पर बुलाई गई है जब प्रस्तावित हड़ताल बैंकों की छमाही समापन अवधि के साथ टकरा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बैठक में मुख्य रूप से हड़ताल के दौरान ग्राहकों को आवश्यक बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराने और व्यवधान को न्यूनतम रखने के उपायों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने किया है — यह देश के सात प्रमुख बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी यूनियनों का संयुक्त संगठन है। UFBU का दावा है कि वह देश के करीब 90 प्रतिशत बैंकिंग कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है।
यूनियनों की प्रमुख माँगें
यूनियनों ने कई माँगें रखी हैं, जिनमें पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना सबसे प्रमुख मुद्दा है। इसके अलावा यूनियनें पेंशन लाभों में सुधार, पेंशनभोगियों के लिए समान महंगाई भत्ता (DA) फॉर्मूला और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) में वापस जाने का विकल्प देने की भी माँग कर रही हैं।
गौरतलब है कि UFBU ने 26 अगस्त 2026 को हड़ताल का नोटिस दिया था। इसके बाद यूनियन प्रतिनिधियों, IBA और सरकारी अधिकारियों के बीच कई सुलह बैठकें हुईं, परंतु पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
11 सितंबर की हड़ताल से सबक
यह ऐसे समय में आया है जब UFBU 11 सितंबर 2026 को भी इसी माँग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल आयोजित कर चुका है। उस हड़ताल के दौरान देश के कई हिस्सों में काउंटर सेवाएँ, नकद लेनदेन और चेक क्लियरेंस प्रभावित हुए थे। मुंबई में परिचालन काफी हद तक सामान्य रहा, लेकिन मध्य प्रदेश, गोवा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में — विशेषकर छोटे शहरों और कस्बों में — व्यवधान की खबरें सामने आई थीं।
आम जनता पर असर
प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल (28-30 सितंबर) का असर इस बार कहीं अधिक व्यापक हो सकता है। चूँकि 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत है, इससे 26 से 30 सितंबर तक लगातार पाँच दिनों तक सामान्य शाखा परिचालन बाधित रह सकता है। चेक प्रोसेसिंग, नकद लेनदेन और शाखाओं पर निर्भर अन्य सेवाओं को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं, खासकर उन ग्राहकों के लिए जो अभी भी भौतिक बैंकिंग पर निर्भर हैं।
आगे क्या होगा
सोमवार की बैठक के बाद सरकार की ओर से किसी आधिकारिक बयान या मध्यस्थता प्रयास की संभावना है। यदि बातचीत से कोई सफलता नहीं मिली, तो 28 सितंबर से शुरू होने वाली यह हड़ताल बैंकिंग क्षेत्र के लिए इस वर्ष की सबसे लंबी और सबसे व्यापक बाधा साबित हो सकती है।