कुमारी सैलजा का केंद्र पर वार: पेपर लीक, मतदाता सूची गड़बड़ी और UPI विवाद पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने 20 सितंबर 2026 को सिरसा में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला — पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतों और UPI लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों लोग हर महीने 5 किलो अनाज के लिए सरकारी वितरण पर निर्भर हैं और सरकार को रोजगार सृजन व महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
पेपर लीक पर गंभीर चिंता
सैलजा ने कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाएं पूरे परीक्षा तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करती हैं। उनके अनुसार, 'इससे न केवल विद्यार्थियों की मेहनत और भविष्य प्रभावित होता है, बल्कि अभिभावकों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।'
उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास पीजी आवास से जुड़ी एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान पहले से ही कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, और ऊपर से पेपर लीक जैसी घटनाएं इस व्यथा को और गहरा करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस तेज़ हो रही है।
मतदाता सूची से जुड़े विवाद
मतदाता सूची में अनियमितताओं पर सांसद ने कहा कि देश के कई हिस्सों से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में शिकायत दर्ज करने वाले लोग संबंधित क्षेत्र के निवासी नहीं होते, और जब उन्हें बुलाया जाता है तो वे सामने नहीं आते।
सैलजा के अनुसार, कई बार एक ही परिवार के कुछ सदस्यों के नाम सूची से काट दिए जाते हैं और नाम जुड़वाने के लिए वरिष्ठ नागरिकों सहित आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था की कमियों को दूर करने की माँग की।
UPI शुल्क और व्यापारियों पर असर
UPI से जुड़े विवाद पर सैलजा ने कहा कि व्यक्तिगत लेनदेन पर भले ही सीधा असर न पड़े, लेकिन छोटे दुकानदारों और व्यापारियों पर बढ़ने वाला खर्च अंततः ग्राहकों तक पहुँचता है। उन्होंने कहा कि कई व्यापारिक एसोसिएशन इस संबंध में लिखित रूप में अपनी चिंताएँ जता चुकी हैं।
गौरतलब है कि त्योहारी सीज़न में बाज़ार गतिविधि बढ़ती है, और ऐसे में व्यापारियों पर किसी भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ का असर व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है — यह तर्क कांग्रेस सांसद ने प्रमुखता से उठाया।
रोजगार और आर्थिक नीति पर सीधा प्रहार
सैलजा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि आयात और व्यापार नीति ऐसी होनी चाहिए जो देश के साथ-साथ गरीब और आम लोगों के आर्थिक हितों की भी रक्षा करे। उन्होंने कहा, 'नौकरियों के नाम पर धांधली, पढ़ाई के नाम पर धांधली, एग्जाम के नाम पर धांधली — हर तरफ धांधली ही धांधली चल रही है।'
उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों लोगों को हर महीने 5 किलो अनाज पर निर्भर रहने की मजबूरी इस बात का प्रमाण है कि रोजगार के मोर्चे पर सरकार विफल रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए सैलजा ने कहा कि 'छात्रों की गूंज' अभियान के ज़रिए युवाओं की समस्याओं और मांगों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
आगे क्या
सैलजा के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को रोजगार, महंगाई और परीक्षा पारदर्शिता के मुद्दों पर घेर रहा है। कांग्रेस के इस हमले के बाद केंद्र सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है, और आने वाले दिनों में संसद के भीतर तथा बाहर इन मुद्दों पर बहस तेज़ होने की संभावना है।