20 सितंबर 2026
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कुमारी सैलजा का केंद्र पर वार: पेपर लीक, मतदाता सूची गड़बड़ी और UPI विवाद पर सवाल

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कुमारी सैलजा का केंद्र पर वार: पेपर लीक, मतदाता सूची गड़बड़ी और UPI विवाद पर सवाल

सारांश

कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने सिरसा में एक साथ चार मोर्चों पर केंद्र को घेरा — पेपर लीक, मतदाता सूची, UPI शुल्क और रोजगार की कमी। उनका सबसे तीखा तंज: जब करोड़ों लोग 5 किलो अनाज पर जी रहे हों, तो सरकार की आर्थिक सफलता के दावे खोखले हैं।

मुख्य बातें

कुमारी सैलजा ने 20 सितंबर 2026 को सिरसा में केंद्र सरकार पर पेपर लीक, मतदाता सूची गड़बड़ी और UPI शुल्क को लेकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक से विद्यार्थियों का भविष्य और अभिभावकों की मेहनत दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने की शिकायतें, वरिष्ठ नागरिकों को भी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
UPI पर संभावित शुल्क से छोटे दुकानदारों और त्योहारी बाज़ार पर असर पड़ने की आशंका; कई व्यापारिक एसोसिएशन ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
सैलजा ने कहा कि करोड़ों लोग हर माह 5 किलो अनाज पर निर्भर हैं — सरकार को रोजगार और महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान का उल्लेख कर सैलजा ने युवाओं के मुद्दों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने 20 सितंबर 2026 को सिरसा में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला — पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतों और UPI लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों लोग हर महीने 5 किलो अनाज के लिए सरकारी वितरण पर निर्भर हैं और सरकार को रोजगार सृजन व महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

पेपर लीक पर गंभीर चिंता

सैलजा ने कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाएं पूरे परीक्षा तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करती हैं। उनके अनुसार, 'इससे न केवल विद्यार्थियों की मेहनत और भविष्य प्रभावित होता है, बल्कि अभिभावकों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।'

उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास पीजी आवास से जुड़ी एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान पहले से ही कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, और ऊपर से पेपर लीक जैसी घटनाएं इस व्यथा को और गहरा करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस तेज़ हो रही है।

मतदाता सूची से जुड़े विवाद

मतदाता सूची में अनियमितताओं पर सांसद ने कहा कि देश के कई हिस्सों से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में शिकायत दर्ज करने वाले लोग संबंधित क्षेत्र के निवासी नहीं होते, और जब उन्हें बुलाया जाता है तो वे सामने नहीं आते।

सैलजा के अनुसार, कई बार एक ही परिवार के कुछ सदस्यों के नाम सूची से काट दिए जाते हैं और नाम जुड़वाने के लिए वरिष्ठ नागरिकों सहित आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था की कमियों को दूर करने की माँग की।

UPI शुल्क और व्यापारियों पर असर

UPI से जुड़े विवाद पर सैलजा ने कहा कि व्यक्तिगत लेनदेन पर भले ही सीधा असर न पड़े, लेकिन छोटे दुकानदारों और व्यापारियों पर बढ़ने वाला खर्च अंततः ग्राहकों तक पहुँचता है। उन्होंने कहा कि कई व्यापारिक एसोसिएशन इस संबंध में लिखित रूप में अपनी चिंताएँ जता चुकी हैं।

गौरतलब है कि त्योहारी सीज़न में बाज़ार गतिविधि बढ़ती है, और ऐसे में व्यापारियों पर किसी भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ का असर व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है — यह तर्क कांग्रेस सांसद ने प्रमुखता से उठाया।

रोजगार और आर्थिक नीति पर सीधा प्रहार

सैलजा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि आयात और व्यापार नीति ऐसी होनी चाहिए जो देश के साथ-साथ गरीब और आम लोगों के आर्थिक हितों की भी रक्षा करे। उन्होंने कहा, 'नौकरियों के नाम पर धांधली, पढ़ाई के नाम पर धांधली, एग्जाम के नाम पर धांधली — हर तरफ धांधली ही धांधली चल रही है।'

उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों लोगों को हर महीने 5 किलो अनाज पर निर्भर रहने की मजबूरी इस बात का प्रमाण है कि रोजगार के मोर्चे पर सरकार विफल रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए सैलजा ने कहा कि 'छात्रों की गूंज' अभियान के ज़रिए युवाओं की समस्याओं और मांगों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

आगे क्या

सैलजा के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को रोजगार, महंगाई और परीक्षा पारदर्शिता के मुद्दों पर घेर रहा है। कांग्रेस के इस हमले के बाद केंद्र सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है, और आने वाले दिनों में संसद के भीतर तथा बाहर इन मुद्दों पर बहस तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन '5 किलो अनाज' वाला तंज सबसे धारदार है — क्योंकि यह आँकड़ा सरकारी योजना की सफलता और विपक्ष की आलोचना दोनों के लिए एक ही समय में हथियार बनता है। विपक्ष का तर्क है कि मुफ्त अनाज रोजगार का विकल्प नहीं हो सकता; सरकार इसे सामाजिक सुरक्षा की उपलब्धि बताती है। मतदाता सूची और पेपर लीक के मुद्दे नए नहीं हैं, लेकिन इन्हें एक साथ उठाना कांग्रेस की व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा लगता है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इन मुद्दों पर ठोस प्रक्रियागत सुधार लाएगी, या यह बहस केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमारी सैलजा ने पेपर लीक पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाएं विद्यार्थियों के भविष्य और अभिभावकों की मेहनत दोनों को प्रभावित करती हैं और पूरे परीक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसे विद्यार्थियों की पढ़ाई और रोजगार की परवाह नहीं है।
मतदाता सूची से नाम हटने पर सैलजा ने क्या आपत्ति जताई?
सैलजा ने कहा कि देश के कई हिस्सों में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जा रहे हैं और वरिष्ठ नागरिकों सहित आम लोगों को नाम जुड़वाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने इसे मतदाता सूची तैयार करने की व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
UPI शुल्क पर कांग्रेस सांसद की क्या चिंता है?
सैलजा ने कहा कि UPI पर किसी भी अतिरिक्त शुल्क का बोझ छोटे दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ेगा, जो अंततः ग्राहकों तक पहुँचेगा। त्योहारी सीज़न में यह बोझ व्यापक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है और कई व्यापारिक एसोसिएशन लिखित रूप में इस पर आपत्ति दर्ज करा चुकी हैं।
'5 किलो अनाज' का मुद्दा उठाकर सैलजा ने क्या कहना चाहा?
सैलजा ने कहा कि करोड़ों लोगों को हर माह 5 किलो सरकारी अनाज पर निर्भर रहना यह दर्शाता है कि रोजगार के मोर्चे पर सरकार विफल रही है। उनका मानना है कि सरकार को मुफ्त राशन बाँटने की जगह लोगों को स्थायी रोजगार और महंगाई से राहत देने पर ध्यान देना चाहिए।
'छात्रों की गूंज' अभियान क्या है जिसका सैलजा ने उल्लेख किया?
सैलजा के अनुसार, 'छात्रों की गूंज' कांग्रेस का एक अभियान है जिसके ज़रिए विद्यार्थियों की समस्याओं और माँगों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस माध्यम से युवाओं की आवाज़ उठा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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