24 जुलाई 2026
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पेपर लीक पर अखिलेश प्रताप का हमला: 'पाँच साल से हो रहा है, मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं?'

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पेपर लीक पर अखिलेश प्रताप का हमला: 'पाँच साल से हो रहा है, मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं?'

सारांश

कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने लखनऊ में सरकार पर चौतरफा हमला बोला — पाँच साल से जारी पेपर लीक पर जवाबदेही की माँग, शंकराचार्य के कार्यक्रम पर अनुमति न देने को 'कायरता' और राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्तियों को 'अन्यायपूर्ण' बताया।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने 24 जुलाई को लखनऊ में सरकार पर पेपर लीक रोकने में विफलता का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पाँच वर्षों से अधिक समय से परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं और संबंधित मंत्री का इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम को अनुमति न देने को उन्होंने 'कायरतापूर्ण हरकत' बताया।
राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ नियुक्ति को 'अन्यायपूर्ण' करार देते हुए ट्रस्ट भंग कर साधु-संतों को शामिल करने की माँग की।
PM मोदी की फास्ट-ट्रैक कोर्ट घोषणा को कांग्रेस ने 'बहाना' बताया, बुनियादी सुधार की माँग की।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने 24 जुलाई को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं, शंकराचार्य के कार्यक्रम को अनुमति न देने के विवाद और राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्तियों के मुद्दे पर सरकार को घेरा।

पेपर लीक पर सरकार की विफलता

अखिलेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि देश में पाँच वर्षों से अधिक समय से परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, फिर भी सरकार ने व्यवस्थागत सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा, 'ये सब बहाने हैं। पाँच साल से ज़्यादा समय से परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं। राहुल गांधी ने बार-बार यह मुद्दा उठाया है और कहा है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पूरी प्रक्रिया में गंभीर कमियाँ हैं, जिन्हें ठीक करने की ज़रूरत है।'

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पेपर लीक के लिए सरकार से जुड़े लोग जिम्मेदार हैं, तो संबंधित मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध कर रहे छात्रों पर 'बेरहमी से लाठीचार्ज' किया गया और इन मुद्दों को उठाने पर विपक्ष को परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, जब भी विपक्ष अपनी माँगें रखना चाहता है, संसद को सुचारु रूप से चलने नहीं दिया जाता।

शंकराचार्य के कार्यक्रम पर विवाद

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम को अनुमति न दिए जाने पर कांग्रेस नेता ने सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, 'सरकार ने शंकराचार्य के कार्यक्रम को अनुमति न देकर कायरतापूर्ण हरकत की है।' उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य गौहत्या बंद करने के लिए जनजागृति अभियान चला रहे हैं और अपना धार्मिक दायित्व निभा रहे हैं।

अखिलेश प्रताप ने यह भी कहा कि वे स्वयं जब भी अवसर मिलता है — चाहे अपने जिले में हों, लखनऊ में या आस-पास — शंकराचार्य महाराज से मिलते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने कहा, 'धर्म के लिए क्या उचित है, यह शंकराचार्य से बेहतर कोई नहीं जानता। हिंदू धर्म की बात करने वाली सरकार उनके कार्यक्रम को अनुमति क्यों नहीं दे रही?'

राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्ति पर सवाल

राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नेता ने इसे 'पूरी तरह अन्यायपूर्ण' करार दिया। उनका कहना था कि राम मंदिर के पक्ष में आए न्यायालय के फैसले में शंकराचार्यों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेज़ी अभिलेखों और धार्मिक ग्रंथों की अहम भूमिका रही थी।

उन्होंने माँग की कि पूरा ट्रस्ट भंग कर साधु-संतों और शंकराचार्यों को उसमें शामिल किया जाए। उनके अनुसार, 'ट्रस्ट साधु-संतों और शंकराचार्यों का होना चाहिए — यही इसकी मूल भावना है।'

फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा पर प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर अखिलेश प्रताप ने इसे महज़ 'बहाना' बताया। उनका तर्क था कि जब तक परीक्षा प्रणाली की बुनियादी खामियाँ दूर नहीं होतीं और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ऐसी घोषणाएँ ठोस परिणाम नहीं देंगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET, UP पुलिस भर्ती सहित कई परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगे हैं और छात्र आंदोलन तेज़ हुआ है।

आगे क्या

कांग्रेस के इन आरोपों के बाद विपक्षी दलों की ओर से संसद में पेपर लीक और शंकराचार्य विवाद पर दबाव बढ़ने की संभावना है। गौरतलब है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य से सीधे जुड़ा है, जो उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में प्रभावित हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

शंकराचार्य विवाद और राम मंदिर ट्रस्ट — यह दर्शाता है कि कांग्रेस एक साथ शिक्षा, धर्म और संस्थागत जवाबदेही के मोर्चे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। पेपर लीक का मुद्दा निश्चित रूप से गंभीर है — NEET से लेकर राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं तक लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं — लेकिन विपक्ष की माँगें अभी तक ठोस वैकल्पिक नीति से रहित हैं। शंकराचार्य विवाद को धार्मिक राजनीति के कोण से उठाना कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा लगता है जो 'हिंदुत्व की असली आवाज़' पर दावा जताने की कोशिश करती है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष का यह दबाव परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में कोई ठोस विधायी पहल में बदलेगा, या केवल प्रेस वार्ताओं तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश प्रताप सिंह ने पेपर लीक पर क्या कहा?
कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि पाँच वर्षों से अधिक समय से परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं और सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने संबंधित मंत्री के इस्तीफे की माँग की और प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदा की।
शंकराचार्य के कार्यक्रम पर अनुमति विवाद क्या है?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक कार्यक्रम को सरकार द्वारा अनुमति न दिए जाने पर विवाद उठा है। कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने इसे 'कायरतापूर्ण हरकत' बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म की बात करने वाली सरकार शंकराचार्य के कार्यक्रम को अनुमति क्यों नहीं दे रही।
राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ नियुक्ति पर कांग्रेस की क्या आपत्ति है?
कांग्रेस प्रवक्ता ने राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति को 'पूरी तरह अन्यायपूर्ण' बताया। उनका कहना है कि मंदिर के पक्ष में न्यायालय का फैसला शंकराचार्यों के साक्ष्यों और धार्मिक ग्रंथों के आधार पर आया था, इसलिए ट्रस्ट में साधु-संतों और शंकराचार्यों की केंद्रीय भूमिका होनी चाहिए।
PM मोदी की फास्ट-ट्रैक कोर्ट घोषणा पर कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की PM मोदी की घोषणा को 'बहाना' करार दिया है। पार्टी का तर्क है कि जब तक परीक्षा प्रणाली की बुनियादी खामियाँ दूर नहीं होतीं और जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसी घोषणाएँ प्रभावी नहीं होंगी।
पेपर लीक मामले में विपक्ष की मुख्य माँगें क्या हैं?
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, संबंधित मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार और प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने की माँग कर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह मुद्दा बार-बार संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाया है।
राष्ट्र प्रेस
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