पेपर लीक पर अखिलेश प्रताप का हमला: 'पाँच साल से हो रहा है, मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं?'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने 24 जुलाई को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं, शंकराचार्य के कार्यक्रम को अनुमति न देने के विवाद और राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्तियों के मुद्दे पर सरकार को घेरा।
पेपर लीक पर सरकार की विफलता
अखिलेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि देश में पाँच वर्षों से अधिक समय से परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, फिर भी सरकार ने व्यवस्थागत सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा, 'ये सब बहाने हैं। पाँच साल से ज़्यादा समय से परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं। राहुल गांधी ने बार-बार यह मुद्दा उठाया है और कहा है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पूरी प्रक्रिया में गंभीर कमियाँ हैं, जिन्हें ठीक करने की ज़रूरत है।'
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पेपर लीक के लिए सरकार से जुड़े लोग जिम्मेदार हैं, तो संबंधित मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध कर रहे छात्रों पर 'बेरहमी से लाठीचार्ज' किया गया और इन मुद्दों को उठाने पर विपक्ष को परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, जब भी विपक्ष अपनी माँगें रखना चाहता है, संसद को सुचारु रूप से चलने नहीं दिया जाता।
शंकराचार्य के कार्यक्रम पर विवाद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम को अनुमति न दिए जाने पर कांग्रेस नेता ने सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, 'सरकार ने शंकराचार्य के कार्यक्रम को अनुमति न देकर कायरतापूर्ण हरकत की है।' उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य गौहत्या बंद करने के लिए जनजागृति अभियान चला रहे हैं और अपना धार्मिक दायित्व निभा रहे हैं।
अखिलेश प्रताप ने यह भी कहा कि वे स्वयं जब भी अवसर मिलता है — चाहे अपने जिले में हों, लखनऊ में या आस-पास — शंकराचार्य महाराज से मिलते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने कहा, 'धर्म के लिए क्या उचित है, यह शंकराचार्य से बेहतर कोई नहीं जानता। हिंदू धर्म की बात करने वाली सरकार उनके कार्यक्रम को अनुमति क्यों नहीं दे रही?'
राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्ति पर सवाल
राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नेता ने इसे 'पूरी तरह अन्यायपूर्ण' करार दिया। उनका कहना था कि राम मंदिर के पक्ष में आए न्यायालय के फैसले में शंकराचार्यों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेज़ी अभिलेखों और धार्मिक ग्रंथों की अहम भूमिका रही थी।
उन्होंने माँग की कि पूरा ट्रस्ट भंग कर साधु-संतों और शंकराचार्यों को उसमें शामिल किया जाए। उनके अनुसार, 'ट्रस्ट साधु-संतों और शंकराचार्यों का होना चाहिए — यही इसकी मूल भावना है।'
फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर अखिलेश प्रताप ने इसे महज़ 'बहाना' बताया। उनका तर्क था कि जब तक परीक्षा प्रणाली की बुनियादी खामियाँ दूर नहीं होतीं और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ऐसी घोषणाएँ ठोस परिणाम नहीं देंगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET, UP पुलिस भर्ती सहित कई परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगे हैं और छात्र आंदोलन तेज़ हुआ है।
आगे क्या
कांग्रेस के इन आरोपों के बाद विपक्षी दलों की ओर से संसद में पेपर लीक और शंकराचार्य विवाद पर दबाव बढ़ने की संभावना है। गौरतलब है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य से सीधे जुड़ा है, जो उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में प्रभावित हुए हैं।