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नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव: सीपीआई(एम) ने ऑनलाइन चंदे की अपील की, QR कोड जारी

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नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव: सीपीआई(एम) ने ऑनलाइन चंदे की अपील की, QR कोड जारी

सारांश

सीपीआई(एम) ने नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए QR कोड से ऑनलाइन चंदा माँगा — लेकिन रेजीनगर में RSP की बगावत ने फ्रंट की एकजुटता पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। 6 अक्टूबर को मतदान, 9 को नतीजे।

मुख्य बातें

सीपीआई(एम) ने नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए QR कोड के ज़रिये ऑनलाइन चंदे की अपील की।
सलीम (पोलित ब्यूरो सदस्य, राज्य सचिव) ने सोशल मीडिया पर साझा की।
मतदान 6 अक्टूबर 2026 को, मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को।
नंदीग्राम में सीपीआई के शांति गोपाल गिरी फ्रंट के सर्वसम्मत प्रत्याशी; रेजीनगर में RSP ने बगावत कर विकास चंद्र मिश्रा को उतारा।
तृणमूल कांग्रेस ने ऑनलाइन दान अभियान पर पहले भी व्यंग्य किया था, 1977–2011 के शासनकाल में कंप्यूटरीकरण-विरोध का हवाला देते हुए।

पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की अगुआ पार्टी सीपीआई(एम) ने 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले नंदीग्राम (पूर्वी मिदनापुर जिला) और रेजीनगर (मुर्शिदाबाद जिला) विधानसभा उपचुनावों के लिए सोशल मीडिया के ज़रिये ऑनलाइन चंदा जुटाने की मुहिम शुरू की है। पार्टी ने एक QR कोड जारी किया है, जिससे समर्थक सीधे चुनाव फंड में योगदान कर सकते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो के सदस्य और पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मो. सलीम ने सोशल मीडिया पर यह अपील साझा की। उन्होंने समर्थकों से आग्रह किया — 'आगामी रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा उपचुनावों के प्रचार के लिए चुनाव फंड में दान देकर जितना हो सके, मदद करें।'

मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। दोनों सीटें वर्तमान में चुनावी दृष्टि से संवेदनशील मानी जा रही हैं।

फ्रंट में आंतरिक दरार

यह अभियान ऐसे समय में सामने आया है जब लेफ्ट फ्रंट खुद अंदरूनी तनाव से जूझ रहा है, विशेषकर रेजीनगर सीट पर। नंदीग्राम में सीपीआई के शांति गोपाल गिरी फ्रंट के सर्वसम्मत उम्मीदवार हैं, परंतु रेजीनगर में स्थिति अलग है।

फ्रंट ने सीपीआई(एम) के सैयद असद अली को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया, जिसके विरोध में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने बगावत की और अपने उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा को निर्दलीय रूप से मैदान में उतार दिया। यह विभाजन फ्रंट की एकजुटता पर सवालिया निशान लगाता है।

ऑनलाइन फंडिंग की राजनीति

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सीपीआई(एम) ने डिजिटल माध्यम से चंदा माँगा हो। इस साल की शुरुआत में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान भी पार्टी ने ऐसी ही अपील की थी, जिस पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने व्यंग्य किया था।

TMC का तर्क था कि 1977 से 2011 तक अपने 34 वर्षीय शासनकाल में लेफ्ट फ्रंट ने सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटरीकरण का विरोध किया था — इसलिए ऑनलाइन दान माँगना विरोधाभासी है।

सीपीआई(एम) का पक्ष

पार्टी नेताओं ने इस आलोचना को सिरे से नकारते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म उन वामपंथी विचारधारा के मतदाताओं के लिए उपयोगी है, जो पार्टी के सक्रिय सदस्य नहीं हैं, लेकिन चुनावों में आर्थिक सहयोग देना चाहते हैं।

राज्य समिति के एक सदस्य ने कहा, 'इस ऑनलाइन दान प्रणाली का मकसद ऐसे वोटरों के लिए दान देना आसान बनाना है। याद रखें, हमारी पार्टी के पास दूसरों की तरह चुनावी बॉन्ड नहीं हैं। हमारी लीडरशिप आम लोगों से मिलने वाली मदद में भरोसा रखती है।'

आगे क्या

दोनों सीटों पर मतदान अब केवल कुछ हफ्ते दूर है। RSP के बागी उम्मीदवार के कारण रेजीनगर में वामपंथी वोट विभाजन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि डिजिटल फंडिंग अभियान पार्टी की ज़मीनी पकड़ को मज़बूत कर पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दशकों तक डिजिटल तकनीक से दूरी बनाए रखी। लेकिन असली कहानी रेजीनगर में है, जहाँ RSP की बगावत यह दिखाती है कि लेफ्ट फ्रंट की आंतरिक समन्वय-क्षमता कमज़ोर हो रही है। जब सहयोगी दल ही अलग उम्मीदवार उतारें, तो डिजिटल चंदा अभियान नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता। TMC के व्यंग्य से परे, असली सवाल यह है कि क्या वाम दल मतदाताओं में भरोसा फिर से जगा पाएगा, जब उसकी अपनी एकता दांव पर हो।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई(एम) ने ऑनलाइन चंदा क्यों माँगा है?
सीपीआई(एम) ने नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों के चुनाव प्रचार के लिए QR कोड के ज़रिये ऑनलाइन दान की अपील की है। पार्टी का कहना है कि उसके पास चुनावी बॉन्ड जैसे साधन नहीं हैं और वह आम समर्थकों के छोटे-छोटे योगदान पर निर्भर रहती है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव कब होंगे?
दोनों सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होगा और मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
रेजीनगर में लेफ्ट फ्रंट में बगावत क्यों हुई?
फ्रंट ने रेजीनगर से सीपीआई(एम) के सैयद असद अली को प्रत्याशी घोषित किया, जिसके विरोध में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने अपने उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा को अलग से मैदान में उतार दिया। यह बगावत फ्रंट की आंतरिक एकता पर सवाल उठाती है।
तृणमूल कांग्रेस ने सीपीआई(एम) के ऑनलाइन दान पर क्या कहा था?
TMC ने व्यंग्य किया था कि 1977 से 2011 तक अपने 34 वर्षीय शासनकाल में लेफ्ट फ्रंट ने सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटरीकरण का विरोध किया था, इसलिए डिजिटल माध्यम से चंदा माँगना विरोधाभासी है।
नंदीग्राम से लेफ्ट फ्रंट का उम्मीदवार कौन है?
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर लेफ्ट फ्रंट की ओर से सीपीआई के शांति गोपाल गिरी सर्वसम्मत उम्मीदवार हैं।
राष्ट्र प्रेस
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