नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव: सीपीआई(एम) ने ऑनलाइन चंदे की अपील की, QR कोड जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की अगुआ पार्टी सीपीआई(एम) ने 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले नंदीग्राम (पूर्वी मिदनापुर जिला) और रेजीनगर (मुर्शिदाबाद जिला) विधानसभा उपचुनावों के लिए सोशल मीडिया के ज़रिये ऑनलाइन चंदा जुटाने की मुहिम शुरू की है। पार्टी ने एक QR कोड जारी किया है, जिससे समर्थक सीधे चुनाव फंड में योगदान कर सकते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो के सदस्य और पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मो. सलीम ने सोशल मीडिया पर यह अपील साझा की। उन्होंने समर्थकों से आग्रह किया — 'आगामी रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा उपचुनावों के प्रचार के लिए चुनाव फंड में दान देकर जितना हो सके, मदद करें।'
मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। दोनों सीटें वर्तमान में चुनावी दृष्टि से संवेदनशील मानी जा रही हैं।
फ्रंट में आंतरिक दरार
यह अभियान ऐसे समय में सामने आया है जब लेफ्ट फ्रंट खुद अंदरूनी तनाव से जूझ रहा है, विशेषकर रेजीनगर सीट पर। नंदीग्राम में सीपीआई के शांति गोपाल गिरी फ्रंट के सर्वसम्मत उम्मीदवार हैं, परंतु रेजीनगर में स्थिति अलग है।
फ्रंट ने सीपीआई(एम) के सैयद असद अली को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया, जिसके विरोध में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने बगावत की और अपने उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा को निर्दलीय रूप से मैदान में उतार दिया। यह विभाजन फ्रंट की एकजुटता पर सवालिया निशान लगाता है।
ऑनलाइन फंडिंग की राजनीति
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सीपीआई(एम) ने डिजिटल माध्यम से चंदा माँगा हो। इस साल की शुरुआत में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान भी पार्टी ने ऐसी ही अपील की थी, जिस पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने व्यंग्य किया था।
TMC का तर्क था कि 1977 से 2011 तक अपने 34 वर्षीय शासनकाल में लेफ्ट फ्रंट ने सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटरीकरण का विरोध किया था — इसलिए ऑनलाइन दान माँगना विरोधाभासी है।
सीपीआई(एम) का पक्ष
पार्टी नेताओं ने इस आलोचना को सिरे से नकारते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म उन वामपंथी विचारधारा के मतदाताओं के लिए उपयोगी है, जो पार्टी के सक्रिय सदस्य नहीं हैं, लेकिन चुनावों में आर्थिक सहयोग देना चाहते हैं।
राज्य समिति के एक सदस्य ने कहा, 'इस ऑनलाइन दान प्रणाली का मकसद ऐसे वोटरों के लिए दान देना आसान बनाना है। याद रखें, हमारी पार्टी के पास दूसरों की तरह चुनावी बॉन्ड नहीं हैं। हमारी लीडरशिप आम लोगों से मिलने वाली मदद में भरोसा रखती है।'
आगे क्या
दोनों सीटों पर मतदान अब केवल कुछ हफ्ते दूर है। RSP के बागी उम्मीदवार के कारण रेजीनगर में वामपंथी वोट विभाजन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि डिजिटल फंडिंग अभियान पार्टी की ज़मीनी पकड़ को मज़बूत कर पाता है या नहीं।