तमिलनाडु: टैसमैक में ₹500 से अधिक की खरीद पर डिजिटल पेमेंट अनिवार्य होगा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की सरकारी शराब बिक्री कंपनी टीएएसएमएसी (टैसमैक) राज्यभर के अपने आउटलेट्स पर ₹500 से अधिक की सभी खरीद के लिए डिजिटल पेमेंट अनिवार्य करने की योजना पर काम कर रही है। इस कदम का मकसद नकद लेन-देन में कटौती, पारदर्शिता में सुधार और वित्तीय गड़बड़ियों पर लगाम लगाना है। प्रस्ताव के अनुसार, ₹500 तक की खरीद के लिए नकद भुगतान जारी रहेगा, जबकि उससे अधिक की राशि पर डिजिटल माध्यम से भुगतान करना होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था क्या है
उम्मीद है कि टैसमैक जल्द ही रिटेल आउटलेट्स के लिए विस्तृत निर्देश जारी करेगा। ₹500 की नकद सीमा को औपचारिक रूप से लागू करने से पहले कंपनी आउटलेट्स पर मौजूदा बुनियादी ढाँचे का आकलन करेगी। टैसमैक के रिटेल कर्मचारी पहले से ही हैंडहेल्ड डिवाइस का उपयोग करते हैं, जो प्रत्येक बोतल को ग्राहक को सौंपने से पहले स्कैन करते हैं और क्यूआर कोड के ज़रिए डिजिटल पेमेंट को भी सपोर्ट करते हैं।
पृष्ठभूमि: डिजिटलीकरण की कोशिश और नकद का दबदबा
गौरतलब है कि 2024 में टैसमैक ने एक कंप्यूटराइज्ड प्रणाली शुरू की थी, जिसे सप्लाई चेन — यानी शराब निर्माण इकाइयों, वेयरहाउस और रिटेल दुकानों — को डिजिटल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। बावजूद इसके, रिपोर्टों के अनुसार आउटलेट्स पर होने वाली कुल बिक्री में अभी भी 80 प्रतिशत से अधिक लेन-देन नकद में ही होता है। यह ऐसे समय में आया है जब कंपनी डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन ऑर्डरिंग सुविधा भी दे रही है, जहाँ ग्राहक पसंदीदा ब्रांड चुनकर भुगतान कर सकते हैं और कोड के ज़रिए तय आउटलेट से बोतल ले सकते हैं।
नकद संचालन के जोखिम
टैसमैक में प्रतिदिन औसतन लगभग ₹150 करोड़ की बिक्री होती है, और वीकेंड, त्योहारों तथा सार्वजनिक छुट्टियों के दौरान यह आँकड़ा और भी अधिक हो जाता है। रिटेल आउटलेट्स आमतौर पर दिनभर का संग्रहीत नकद अगले दिन बैंक में जमा करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर नकद संभालने से कर्मचारियों को लूट और चोरी का गंभीर जोखिम रहता है, विशेषकर नकद ले जाते समय।
पारदर्शिता और एमआरपी उल्लंघन पर लगाम
प्रस्तावित डिजिटल पेमेंट व्यवस्था से आउटलेट्स को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज़्यादा कीमत वसूलने से रोकने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। डिजिटल रिकॉर्ड से प्रत्येक लेन-देन की सटीक राशि की पुष्टि और किसी भी गड़बड़ी का पता लगाना आसान होगा। इसके अलावा, अधिकारियों के अनुसार यह उपाय खुल्ले पैसे न होने को लेकर होने वाले विवादों को भी कम कर सकता है।
क्या होगा आगे
ऑनलाइन ऑर्डरिंग सुविधा के तहत कुछ ग्राहकों ने खरीदारी मिलने में देरी की शिकायतें की हैं। अधिकारियों ने इसके लिए आंशिक रूप से कुछ रिटेल कर्मचारियों की नकद लेन-देन को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति को जिम्मेदार बताया है। नई अनिवार्य डिजिटल पेमेंट नीति लागू होने के बाद इस समस्या के कम होने की संभावना है। टैसमैक के आधिकारिक निर्देश जारी होने का इंतज़ार है, जिसके बाद राज्यभर के आउटलेट्स पर यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है।