20 अगस्त 2026
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गौतम अदाणी ने परिवार संग महुडी जैन मंदिर में टेका माथा, पर्यूषण से पहले की आस्था की यात्रा

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गौतम अदाणी ने परिवार संग महुडी जैन मंदिर में टेका माथा, पर्यूषण से पहले की आस्था की यात्रा

सारांश

पर्यूषण महापर्व से ठीक पहले अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी परिवार सहित गांधीनगर के महुडी जैन मंदिर पहुँचे — यह यात्रा डीओजे मामला खारिज होने के कुछ दिनों बाद और जैन समुदाय के सबसे पवित्र पर्व की तैयारियों के बीच हुई।

मुख्य बातें

गौतम अदाणी ने 19 अगस्त 2026 को पत्नी प्रीति अदाणी , बेटे करण अदाणी और पुत्र-वधू परिधि अदाणी के साथ महुडी जैन मंदिर, गांधीनगर में दर्शन किए।
यह दौरा 8 से 15 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले पर्यूषण महापर्व की तैयारियों के बीच हुआ।
महुडी में सभी 24 जैन तीर्थंकरों के मंदिर और श्री घंटाकर्ण महावीर का पृथक मंदिर स्थित है।
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) का मामला 10 अगस्त 2026 को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के कुछ दिन बाद यह यात्रा हुई।
पर्यूषण का समापन 15 सितंबर को 'संवत्सरी' — क्षमा-याचना के पर्व — से होगा।

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को गुजरात के गांधीनगर जिले में स्थित श्वेतांबर जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल महुडी जैन मंदिर में दर्शन किए। उनके साथ पत्नी प्रीति अदाणी, बड़े बेटे करण अदाणी और पुत्र-वधू परिधि अदाणी भी मौजूद थीं। यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब जैन समुदाय 8 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले पर्यूषण महापर्व की तैयारियों में जुटा है।

मंदिर का महत्व और आस्था का संदर्भ

ऐतिहासिक रूप से मधुपुरी के नाम से जाना जाने वाला महुडी, श्वेतांबर जैन परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ है। इस तीर्थ में सभी 24 जैन तीर्थंकरों के मंदिर हैं, साथ ही श्री घंटाकर्ण महावीर का एक पृथक मंदिर भी स्थित है। घंटाकर्ण महावीर को जैन धर्म के रक्षक और संरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है — तीर्थंकरों के विपरीत, भक्त मुश्किल समय में शक्ति और बाधाओं से मुक्ति के लिए उनकी शरण में आते हैं।

गौतम अदाणी की 'सेवा' की अवधारणा

सूत्रों के अनुसार, गौतम अदाणी के लिए इस तीर्थयात्रा का 'सेवा' यानी निस्वार्थ सेवा से गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव है। उनकी विचारधारा 'सेवा ही साधना है' — अर्थात निस्वार्थ सेवा ही पूजा का सर्वोच्च रूप है — उनके सामाजिक योगदान और समुदायों के जीवन को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता को दिशा देती रही है।

डीओजे मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह दौरा अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) की उन कानूनी कार्यवाहियों के कुछ दिनों बाद हुआ, जिनमें गौतम अदाणी, उनके भतीजे व अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी और अन्य लोग शामिल थे। यह मामला 10 अगस्त 2026 को स्थायी रूप से खारिज कर दिया गया था।

पर्यूषण महापर्व: क्या है यह त्योहार

पर्यूषण महापर्व 8 से 15 सितंबर 2026 तक मनाया जाएगा और यह श्वेतांबर जैन परंपरा के सबसे पवित्र पर्वों में से एक है। प्रार्थना, उपवास, आत्म-अनुशासन और आत्म-चिंतन के इस पर्व का समापन 15 सितंबर को 'संवत्सरी' — क्षमा-याचना के पर्व — के साथ होता है। इस दिन जैन अनुयायी समस्त जीवों से क्षमा माँगते हैं, दूसरों को क्षमा करते हैं और पुरानी शिकायतों को भुला देते हैं। अदाणी परिवार की यह यात्रा उसी आध्यात्मिक तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आलोचक यह भी पूछते हैं कि क्या ऐसे कॉर्पोरेट आख्यान जवाबदेही की जगह ले सकते हैं। महुडी की यात्रा व्यक्तिगत आस्था और सार्वजनिक छवि-प्रबंधन के उस धुंधले संगम पर खड़ी है जो भारत के बड़े कारोबारी घरानों की पहचान बन चुका है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम अदाणी ने महुडी जैन मंदिर का दौरा कब किया?
गौतम अदाणी ने 19 अगस्त 2026, बुधवार को गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित महुडी जैन मंदिर का दौरा किया। उनके साथ पत्नी प्रीति अदाणी, बेटे करण अदाणी और पुत्र-वधू परिधि अदाणी भी थीं।
महुडी जैन मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
महुडी, जिसे ऐतिहासिक रूप से मधुपुरी कहा जाता था, श्वेतांबर जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यहाँ सभी 24 जैन तीर्थंकरों के मंदिर हैं और श्री घंटाकर्ण महावीर का एक अलग मंदिर भी है, जिन्हें जैन धर्म के रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है।
पर्यूषण महापर्व 2026 कब मनाया जाएगा?
पर्यूषण महापर्व 8 से 15 सितंबर 2026 तक मनाया जाएगा। इसका समापन 15 सितंबर को 'संवत्सरी' — क्षमा-याचना के पर्व — से होगा, जिसमें जैन अनुयायी सभी जीवों से क्षमा माँगते हैं।
अदाणी के खिलाफ डीओजे मामले का क्या हुआ?
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) की वह कानूनी कार्यवाही जिसमें गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और अन्य लोग शामिल थे, 10 अगस्त 2026 को स्थायी रूप से खारिज कर दी गई। महुडी की यह यात्रा उसी के कुछ दिनों बाद हुई।
'सेवा ही साधना है' से गौतम अदाणी का क्या तात्पर्य है?
'सेवा ही साधना है' गौतम अदाणी की विचारधारा का केंद्रीय सूत्र है, जिसका अर्थ है कि निस्वार्थ सेवा ही पूजा का सर्वोच्च रूप है। यह अवधारणा समुदायों की सेवा और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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