MCX पर सोना ₹1,41,510 और चांदी ₹2,14,064 पर, दो सत्रों की गिरावट के बाद वापसी
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 25 जून 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में करीब दो कारोबारी सत्रों की लगातार गिरावट के बाद तेजी लौटी, और दोनों धातुओं के भाव आधा प्रतिशत तक की बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। सोना सुबह 9:45 बजे तक ₹240 यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,41,510 प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया।
MCX पर सोने का कारोबार
5 अगस्त 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछली क्लोजिंग ₹1,41,270 के मुकाबले ₹727 यानी 0.51 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹1,40,672 पर कारोबार शुरू किया। हालाँकि, शुरुआती कमज़ोरी के बाद खरीदारी का दबाव बढ़ा और भाव तेज़ी से संभल गए। दिन के कारोबार में सोने ने ₹1,40,543 का न्यूनतम और ₹1,41,989 का उच्चतम स्तर छुआ।
MCX पर चांदी का कारोबार
3 जुलाई 2026 के चांदी के कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत भी कमज़ोर रही — यह पिछली क्लोजिंग ₹2,13,075 के मुकाबले ₹2,767 यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹2,10,308 पर खुली। बाद में चांदी ने पलटवार किया और ₹989 यानी 0.46 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹2,14,064 पर पहुँच गई। दिन के दौरान चांदी ने ₹2,10,043 का न्यूनतम और ₹2,13,075 का उच्चतम स्तर दर्ज किया।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में मिलाजुला रुख
वैश्विक बाज़ारों में तस्वीर अलग रही। COMEX पर सोना 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ $4,011.65 प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 1.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ $57.388 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह अंतर दर्शाता है कि घरेलू और वैश्विक बाज़ारों के बीच रुपये की चाल और स्थानीय माँग का असर अलग तरह से पड़ रहा है।
बीते महीनों में भारी गिरावट का संदर्भ
गौरतलब है कि बुधवार की यह तेजी बड़े गिरावट के दौर के बीच एक अल्पकालिक राहत है। डॉलर में सोना बीते छह महीनों में 11.39 प्रतिशत लुढ़क चुका है। बीते तीन महीनों में यह गिरावट 12.19 प्रतिशत और बीते एक महीने में 10 प्रतिशत से अधिक रही है।
चांदी की स्थिति और भी कठिन रही है। बीते छह महीनों में चांदी 25.75 प्रतिशत, बीते तीन महीनों में 20.82 प्रतिशत, बीते एक महीने में 24 प्रतिशत से अधिक और बीते एक सप्ताह में 13 प्रतिशत से अधिक टूट चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक औद्योगिक माँग और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
आगे क्या
विश्लेषकों के अनुसार, अल्पकालिक तेजी टिकाऊ होगी या नहीं, यह वैश्विक संकेतों — विशेषकर अमेरिकी डॉलर की चाल और फेड की बैठक के नतीजों — पर निर्भर करेगा। घरेलू स्तर पर त्योहारी सीज़न से पहले सर्राफा बाज़ार में माँग का रुझान निवेशकों की निगाह में रहेगा।