सोने-चांदी का दीर्घकालिक आउटलुक सकारात्मक, ₹1,35,000 पर खरीदारी की सलाह: मोतीलाल ओसवाल रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की 5 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2026 में कीमती धातुओं में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव रहने के बावजूद, मध्यम से दीर्घ अवधि में सोने और चांदी का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि हर गिरावट निवेशकों के लिए संचय का अवसर है।
2026 में बाज़ार का उतार-चढ़ाव
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कीमती धातुओं में देखी गई एकतरफा तेजी के विपरीत, 2026 में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती अपेक्षाओं, लगातार बनी हुई महंगाई, ऊँचे बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण बाज़ार में कहीं अधिक उतार-चढ़ाव रहा। जनवरी 2026 में सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची, जिसके बाद तेज गिरावट आई और कीमत 4,000 डॉलर से नीचे चली गई। बाद में बाज़ार में आंशिक सुधार देखने को मिला। चांदी भी 100 डॉलर प्रति औंस के पार गई, लेकिन उसमें और भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
खरीदारी के लक्ष्य स्तर
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में कमोडिटीज रिसर्च के प्रमुख नवनीत दमानी ने कहा कि सोने की निकट अवधि की चाल अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की मौद्रिक नीति, महंगाई के रुझान, अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव और वास्तविक बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट में 'गिरावट पर खरीदारी' की रणनीति सुझाई गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 3,800–3,900 डॉलर प्रति औंस को खरीदारी का उचित स्तर माना गया है, जिसके लिए अल्पकालिक लक्ष्य 4,200 डॉलर और मध्यम अवधि का लक्ष्य 4,500–4,700 डॉलर निर्धारित है। भारतीय बाज़ार में ₹1,35,000 प्रति 10 ग्राम को खरीदारी का उपयुक्त स्तर बताया गया है, जिसमें अल्पकालिक लक्ष्य ₹1,48,000 और मध्यम अवधि का लक्ष्य ₹1,60,000–1,68,000 प्रति 10 ग्राम रखा गया है।
निवेश मांग और गोल्ड ETF में उछाल
दमानी ने कहा कि केंद्रीय बैंकों द्वारा निवेश में विविधता लाने, लगातार बनी हुई निवेश मांग और वित्तीय अनिश्चितताओं के कारण सोने को एक मजबूत आधार मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊँची कीमतों के बावजूद वैश्विक गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स में अगस्त–सितंबर 2026 के दौरान लगभग 187 टन की वृद्धि हुई, जिससे यह 4,256 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई। तीसरी तिमाही में इसमें 31 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश प्रवाह दर्ज किया गया। भारत में सितंबर 2026 में गोल्ड ईटीएफ में निवेश 71 प्रतिशत उछलकर ₹44.5 अरब हो गया, जबकि सिल्वर ईटीएफ में ₹19.7 अरब का निवेश आया।
दीपावली और त्योहारी मांग का असर
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत में दीपावली और धनतेरस कीमती धातुओं की खरीदारी के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में गिने जाते हैं। पारंपरिक खरीदारी, विवाह सीजन और सोने-चांदी के सांस्कृतिक महत्व के कारण इस दौरान मांग तेजी से बढ़ती है। ऐतिहासिक आँकड़े बताते हैं कि दीपावली से पहले के 30 दिनों में सोने ने दीपावली के बाद के 30 दिनों की तुलना में सामान्यतः बेहतर रिटर्न दिया है।
आगे चलकर, रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की खरीद बनी रहती है, सोने और चांदी की दीर्घकालिक संभावनाएँ मज़बूत रहेंगी।