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आरडीआई योजना में फंड की कमी नहीं, टीडीबी ने प्रस्ताव समीक्षा के लिए लगाई अस्थायी रोक

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आरडीआई योजना में फंड की कमी नहीं, टीडीबी ने प्रस्ताव समीक्षा के लिए लगाई अस्थायी रोक

सारांश

विज्ञान मंत्रालय ने साफ किया — आरडीआई योजना में पैसे की कमी नहीं है। ₹1 लाख करोड़ की इस योजना में टीडीबी ने प्रस्तावों की बाढ़ के बाद समीक्षा के लिए अस्थायी विराम लिया है। जल्द नई नियुक्तियों के साथ योजना का दायरा और बढ़ेगा।

मुख्य बातें

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें आरडीआई योजना में फंड की कमी का दावा था।
टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) ने प्रस्ताव आमंत्रण केवल प्रशासनिक कारणों से अस्थायी रूप से बंद किया है, 30 सितंबर 2026 तक प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा के लिए।
₹1 लाख करोड़ की आरडीआई योजना डीप-टेक, अनुसंधान और नवाचार-आधारित कंपनियों व स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता देती है।
डीएसटी और एएनआरएफ शीघ्र अतिरिक्त सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स (एसएलएफएम) नियुक्त करने की प्रक्रिया में हैं।
समीक्षा पूरी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया जल्द दोबारा शुरू होगी और योग्य परियोजनाओं को वित्तीय सहायता जारी रहेगी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि ₹1 लाख करोड़ की रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) योजना के अंतर्गत प्रस्ताव आमंत्रण प्रक्रिया धन की कमी के चलते बंद की गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) द्वारा लगाई गई यह रोक पूरी तरह प्रशासनिक है और पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं (ईटीई) को वित्तीय सहायता देने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है।

मंत्रालय का स्पष्टीकरण

मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया कि 30 सितंबर 2026 तक बड़ी संख्या में परियोजना प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद टीडीबी ने सभी आवेदनों का व्यवस्थित मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए आवेदन प्रक्रिया अस्थायी रूप से बंद की। टीडीबी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा कॉल को केवल 'एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन' के आधार पर रोका गया है। बयान में जोर देकर कहा गया कि फंड की कमी संबंधी दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

मूल्यांकन प्रक्रिया और आगे की राह

मंत्रालय के अनुसार, निवेश समिति और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के अधिकारी प्राप्त प्रस्तावों का तीव्र गति से मूल्यांकन करने में जुटे हैं, ताकि योग्य परियोजनाओं को शीघ्र मंजूरी दी जा सके। यह समीक्षा पूरी होते ही आवेदन आमंत्रण प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि यह उस योजना से जुड़ी है जो देश में डीप-टेक और नवाचार-आधारित परियोजनाओं को दीर्घकालिक वित्तपोषण देने के लिए बनाई गई है।

एसएलएफएम नियुक्ति की प्रक्रिया जारी

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) शीघ्र ही अन्य सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स (एसएलएफएम) नियुक्त करने की प्रक्रिया में हैं। इससे योजना की क्रियान्वयन क्षमता और वित्तपोषण की पहुँच और व्यापक होगी। डीएसटी और एएनआरएफ इस ₹1 लाख करोड़ की योजना के डिजाइन, वित्तपोषण एवं निगरानी के लिए जिम्मेदार शीर्ष सरकारी संस्थान हैं।

आरडीआई योजना का उद्देश्य

आरडीआई योजना मुख्य रूप से उन कंपनियों, कॉर्पोरेट संस्थाओं और स्टार्टअप्स को समर्थन देती है, जो डीप-टेक, अनुसंधान और नवाचार-आधारित तकनीकों पर काम कर रहे हैं — विशेष रूप से रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में। चयनित ईटीई को बड़े आकार के ऋण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, हालांकि टीडीबी धनराशि तभी जारी करता है जब संबंधित संस्था निजी या गैर-सरकारी स्रोतों से निर्धारित अनुपात में पूंजी जुटाने में सफल हो। यह ढाँचा सार्वजनिक-निजी वित्तपोषण के मिश्रण पर आधारित है।

आम जनता और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर असर

इस स्पष्टीकरण से उन स्टार्टअप्स और शोध-संस्थाओं को राहत मिलने की उम्मीद है जो आरडीआई फंडिंग का इंतजार कर रहे थे। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि समीक्षा के बाद योग्य परियोजनाओं को नियमानुसार वित्तीय सहायता मिलती रहेगी। भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह योजना एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानी जाती है, इसलिए इससे जुड़ी किसी भी अनिश्चितता का व्यापक असर पड़ सकता था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को अनुत्तरित छोड़ता है — ₹1 लाख करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रस्तावों का इतना भारी बोझ पहले से क्यों नहीं आँका गया? यदि बड़ी संख्या में आवेदन अप्रत्याशित थे, तो यह मूल्यांकन क्षमता की योजना में कमज़ोरी दर्शाता है। सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स की नियुक्ति अभी 'प्रक्रिया में' है — यह उस योजना के लिए देर से उठाया गया कदम लगता है जो पहले से सक्रिय बताई जा रही है। स्टार्टअप और डीप-टेक समुदाय के लिए संदेश स्पष्ट होना ज़रूरी है — अस्थायी रोक और प्रशासनिक देरी, भले ही वाजिब हों, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में अविश्वास का बीज बो सकती हैं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरडीआई योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
आरडीआई यानी रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन योजना एक ₹1 लाख करोड़ की सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य डीप-टेक, अनुसंधान एवं नवाचार-आधारित कंपनियों, स्टार्टअप्स और कॉर्पोरेट संस्थाओं को दीर्घकालिक और कम लागत वाली वित्तीय सहायता देना है। इसे डीएसटी और एएनआरएफ द्वारा डिजाइन और निगरानी किया जाता है, जबकि टीडीबी फंड मैनेजर के रूप में काम करता है।
आरडीआई योजना में प्रस्ताव आमंत्रण क्यों बंद किया गया?
मंत्रालय के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक बड़ी संख्या में परियोजना प्रस्ताव आने के बाद टीडीबी ने सभी आवेदनों का व्यवस्थित मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया अस्थायी रूप से बंद की। यह रोक प्रशासनिक है, फंड की कमी के कारण नहीं।
क्या आरडीआई योजना के लिए धन की कमी है?
नहीं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पात्र ईटीई को धनराशि जारी करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। फंड की कमी के दावे तथ्यात्मक रूप से गलत बताए गए हैं।
आरडीआई योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया कब दोबारा शुरू होगी?
मंत्रालय ने कहा है कि 30 सितंबर 2026 तक प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा पूरी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया जल्द दोबारा शुरू की जाएगी। सटीक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स (एसएलएफएम) क्या हैं और इनकी नियुक्ति क्यों जरूरी है?
एसएलएफएम वे संस्थाएँ हैं जो आरडीआई योजना के अंतर्गत टीडीबी के साथ मिलकर वित्तपोषण वितरित करती हैं। डीएसटी और एएनआरएफ अतिरिक्त एसएलएफएम नियुक्त करने की प्रक्रिया में हैं ताकि योजना की क्रियान्वयन क्षमता और पहुँच को और व्यापक बनाया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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