10 अक्टूबर 2026
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हैदराबाद हाई-स्पीड रेल: केंद्र का स्पष्टीकरण — राज्य को जमीन अधिग्रहण का कोई अनुरोध नहीं भेजा गया

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हैदराबाद हाई-स्पीड रेल: केंद्र का स्पष्टीकरण — राज्य को जमीन अधिग्रहण का कोई अनुरोध नहीं भेजा गया

सारांश

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने एक्स पर स्पष्ट किया कि हैदराबाद के तीन प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए अभी केवल अलाइनमेंट स्टडी चल रही है — किसी राज्य को जमीन अधिग्रहण का अनुरोध नहीं भेजा गया और इस चरण में कोई भी अधिग्रहण गैर-कानूनी होगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि हैदराबाद-चेन्नई , हैदराबाद-बेंगलुरु और हैदराबाद-पुणे कॉरिडोर के लिए किसी राज्य को जमीन अधिग्रहण का अनुरोध नहीं भेजा गया।
किशन रेड्डी ने कहा — इस चरण में हाई-स्पीड रेल के नाम पर जमीन का कोई भी अधिग्रहण गैर-कानूनी है।
तीनों कॉरिडोर की अलाइनमेंट स्टडी अभी जारी है; स्टडी पूरी होने के बाद ही राज्यों और किसानों से परामर्श होगा।
भारतीय रेलवे ने जुलाई 2026 तक ₹1,14,973 करोड़ का पूँजीगत व्यय किया — 2026-27 बजट का लगभग 39% ।
स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली 'कवच' वर्शन 4.0 अब 2,633 रूट किलोमीटर पर लागू, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर शामिल।

केंद्र सरकार ने 10 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि हैदराबाद से जुड़े प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर फिलहाल केवल अलाइनमेंट अध्ययन चल रहा है और किसी भी राज्य सरकार को जमीन अधिग्रहण का कोई अनुरोध नहीं भेजा गया है। केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के बाद यह जानकारी साझा की।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'रेल मंत्री ने साफ किया है कि संबंधित राज्य सरकारों को जमीन अधिग्रहण का कोई अनुरोध नहीं भेजा गया है और इस चरण में हाई-स्पीड रेल के नाम पर जमीन का कोई भी अधिग्रहण गैर-कानूनी है।' यह बयान उन्होंने रेल मंत्री वैष्णव के साथ हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और हैदराबाद-पुणे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर हुई बैठक के बाद दिया।

रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि तीनों कॉरिडोर के लिए अलाइनमेंट स्टडी अभी जारी है। अलाइनमेंट तय होने के बाद ही संबंधित राज्य सरकारों और किसानों के साथ विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

स्पष्टीकरण की पृष्ठभूमि

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना सरकार रेल कॉरिडोर और अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में है, जिसका हैदराबाद के बाहरी इलाकों में किसान विरोध कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले साउथ सेंट्रल रेलवे ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसमें दावा किया गया था कि रेल मंत्री वैष्णव और रेड्डी के बीच हैदराबाद को तीन प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले प्रस्तावित हाई-स्पीड रूट पर विस्तृत चर्चा हुई। इस वीडियो के बाद किसानों और स्थानीय समुदायों में अधिग्रहण को लेकर आशंकाएँ और तेज हो गई थीं।

भारतीय रेलवे का पूँजीगत व्यय

इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि अगस्त में सरकार ने बताया था कि भारतीय रेलवे ने जुलाई 2026 तक ₹1.14 लाख करोड़ से अधिक का पूँजीगत व्यय किया है, जो 2026-27 के बजट में निर्धारित राशि का लगभग 39 प्रतिशत है। लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वैष्णव ने बताया था कि चालू वित्त वर्ष के लिए ₹2,93,030 करोड़ के बजट में से ₹1,14,973 करोड़ खर्च हो चुके हैं।

रेल मंत्री ने सुरक्षा व्यय में निरंतर वृद्धि का भी उल्लेख किया — यह 2013-14 में ₹39,200 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹1,20,389 करोड़ तक पहुँच गया है।

कवच सुरक्षा प्रणाली की प्रगति

स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' के बारे में वैष्णव ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक इसका वर्शन 4.0 2,633 रूट किलोमीटर पर लागू किया जा चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे अत्यधिक व्यस्त कॉरिडोर के महत्वपूर्ण खंड शामिल हैं।

आगे क्या होगा

तीनों हाई-स्पीड कॉरिडोर की अलाइनमेंट स्टडी पूरी होने के बाद ही जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है। तब राज्य सरकारों और प्रभावित किसानों के साथ परामर्श किया जाएगा। फिलहाल, केंद्र की ओर से यह संदेश साफ है कि किसी भी अधिग्रहण की कोशिश इस चरण में कानूनी आधार नहीं रखती।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि साउथ सेंट्रल रेलवे ने पहले वह वीडियो क्यों जारी किया जिसने किसानों में अनावश्यक भ्रम और आंदोलन की जमीन तैयार की। हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भारत में पहले भी विवादास्पद रही है — मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ किसान प्रतिरोध ने समयसीमा को वर्षों पीछे धकेल दिया। तेलंगाना में चल रहे किसान विरोध और केंद्र के इस खंडन के बीच का अंतर यह दर्शाता है कि केंद्र और राज्य के बीच संवाद की कमी अफवाहों को हवा देती है। जब तक अलाइनमेंट स्टडी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक नहीं की जाती, इस तरह की अस्पष्टता बार-बार सामने आती रहेगी।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर केंद्र सरकार ने क्या स्पष्ट किया?
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और हैदराबाद-पुणे कॉरिडोर के लिए अभी केवल अलाइनमेंट स्टडी चल रही है और किसी भी राज्य सरकार को जमीन अधिग्रहण का कोई अनुरोध नहीं भेजा गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह बात केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को बताई।
क्या इस समय हैदराबाद के लिए हाई-स्पीड रेल की जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है?
नहीं। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस चरण में हाई-स्पीड रेल के नाम पर जमीन का कोई भी अधिग्रहण गैर-कानूनी है। जब तक अलाइनमेंट तय नहीं होता और राज्यों-किसानों से परामर्श नहीं होता, अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती।
यह स्पष्टीकरण क्यों ज़रूरी हो गया?
साउथ सेंट्रल रेलवे द्वारा सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करने के बाद हैदराबाद के बाहरी इलाकों में किसानों में जमीन अधिग्रहण की आशंका फैल गई थी। इसी के साथ तेलंगाना सरकार द्वारा अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की चल रही कोशिशों ने भ्रम की स्थिति और बढ़ा दी थी।
भारतीय रेलवे ने 2026-27 में अब तक कितना पूँजीगत व्यय किया है?
भारतीय रेलवे ने जुलाई 2026 तक ₹1,14,973 करोड़ खर्च किए हैं, जो 2026-27 के लिए निर्धारित ₹2,93,030 करोड़ के बजट का लगभग 39 प्रतिशत है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
कवच ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की स्थिति क्या है?
स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' का वर्शन 4.0 31 जुलाई 2026 तक 2,633 रूट किलोमीटर पर लागू हो चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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