वेंकट रेड्डी ने गडकरी से मांगी मंजूरी: तेलंगाना के लिए रोपवे, एलिवेटेड कॉरिडोर और हाईवे परियोजनाएं
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के सड़क एवं भवन मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राज्य की अनेक महत्त्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया। यह बैठक गुजरात के एकता नगर (नर्मदा जिला) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय राजमार्ग सम्मेलन 'चिंतन शिविर-2026' के उद्घाटन के पश्चात हुई। मंत्री के कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, बैठक में केंद्र से लंबित स्वीकृतियों, वित्त-पोषण और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
हैदराबाद में ट्रैफिक जाम से निपटने की योजना
हैदराबाद के पूर्वी हिस्से में बढ़ती यातायात समस्या का स्थायी हल निकालने के लिए वेंकट रेड्डी ने एलबी नगर से हयात नगर तक लगभग 6 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का प्रस्ताव रखा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने एनएच-65 के एलबी नगर-मलकापुर खंड को सर्विस रोड सहित 6+2 लेन राजमार्ग में बदलने हेतु पहले ही ₹545 करोड़ की स्वीकृति दे चुकी है। तेलंगाना सरकार ने मियापुर-एलबी नगर मेट्रो रेल कॉरिडोर को द्वितीय चरण में हयात नगर तक विस्तारित करने का निर्णय लिया है, इसलिए मंत्री ने इस मेट्रो परियोजना के साथ समन्वय बनाते हुए 2026-27 की वार्षिक योजना में डबल-डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर को शामिल करने का अनुरोध किया।
पर्वतमाला योजना: पाँच रोपवे परियोजनाओं की माँग
पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक बेहतर संपर्क सुनिश्चित करने के लिए मंत्री ने केंद्रीय पर्वतमाला योजना के अंतर्गत तेलंगाना में ₹1,230 करोड़ की अनुमानित लागत वाले पाँच रोपवे प्रोजेक्ट्स को स्वीकृत करने की माँग रखी। उनके अनुसार इन रोपवे से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों को सुविधा मिलेगी, साथ ही पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, 2026-27 वित्त वर्ष के लिए सेतु बंधन स्कीम के तहत तीन महत्त्वपूर्ण आरओबी/आरयूबी परियोजनाओं हेतु भी केंद्रीय मंजूरी माँगी गई।
हैदराबाद-विजयवाड़ा एनएच-65 और एनएच-765 का विस्तार
वेंकट रेड्डी ने हैदराबाद-विजयवाड़ा-मछलीपट्टनम एनएच-65 — जो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को जोड़ता है — को 6+2 लेन राजमार्ग में शीघ्र परिवर्तित करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि इस मार्ग पर यातायात का घनत्व अब 1.20 लाख पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) प्रतिदिन से अधिक हो चुका है और कई खतरनाक क्षेत्र तथा दुर्घटना ब्लैकस्पॉट विद्यमान हैं। इसके साथ ही हैदराबाद-श्रीशैलम एनएच-765 पर, विशेषकर टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में, एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की स्वीकृति भी माँगी गई। यह कदम नल्लामाला वन क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करते हुए श्रीशैलम जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएगा।
सीआरआईएफ फंड और हैदराबाद रीजनल रिंग रोड
सेंट्रल रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (सीआरआईएफ) के अंतर्गत मंत्री ने 2026-27 के लिए राज्य की 33 सड़क विकास परियोजनाओं — कुल 511.68 किलोमीटर लंबाई, अनुमानित लागत ₹1,227.75 करोड़ — हेतु फंड आवंटन का आग्रह किया। इन परियोजनाओं को सांसदों और विधायकों द्वारा प्रस्तावित बताते हुए उन्होंने कहा कि ये राज्यव्यापी संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए अनिवार्य हैं। हैदराबाद रीजनल रिंग रोड (आरआरआर) के उत्तरी हिस्से — संगारेड्डी-नरसापुर-टूप्रान-गजवेल-जगदेवपुर-भोंगिर-चौटुप्पल मार्ग पर 161.518 किलोमीटर — के लिए तत्काल वित्तीय एवं केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी माँगी गई। वेंकट रेड्डी ने बताया कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण लागत का 50 प्रतिशत वहन करने को तैयार है, 90 प्रतिशत से अधिक भूमि की स्वीकृति मिल चुकी है और एनएचएआई ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं।
हैदराबाद-अमरावती ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और आगे की राह
मंत्री ने हैदराबाद-अमरावती ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रक्रिया में तेजी लाने की माँग की। यह परियोजना तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच भविष्य की कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करेगी। उन्होंने बताया कि इस एक्सप्रेसवे को तेलंगाना के ड्राई पोर्ट से जोड़ने पर माल ढुलाई सुगम होगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी; साथ ही बंदर पोर्ट तक एक स्पर कनेक्शन की संभावना पर भी बल दिया। यह बैठक इस मायने में महत्त्वपूर्ण है कि तेलंगाना — जो कांग्रेस शासित राज्य है — ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के समक्ष इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित एजेंडा रखकर सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया है। केंद्र की प्रतिक्रिया और अनुमोदन की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।