शहीद पथ पर 23 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर मंजूर, लखनऊ को मिलेगी ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ के शहीद पथ पर 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है, जो एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक विस्तारित होगा। 13 जुलाई 2026 को उन्नाव में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह में रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह ने यह जानकारी दी। यह फैसला राजधानी की सबसे बड़ी यातायात समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि उन्होंने कार्यक्रम की परंपरा बदलते हुए सबसे पहले संबोधन किया, ताकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने लखनऊ के विकास से जुड़े प्रस्ताव रख सकें। उन्होंने शहीद पथ पर एलिवेटेड कॉरिडोर का अनुरोध किया, जिसे गडकरी ने तत्काल मंजूरी दे दी।
इस कॉरिडोर के ऊपर मेट्रो रेल चलाने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। योजना के अनुसार, लंबी दूरी का यातायात एलिवेटेड मार्ग से संचालित होगा, जबकि स्थानीय यातायात नीचे शहीद पथ पर चलता रहेगा — जिससे जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
अन्य स्वीकृत परियोजनाएँ
एलिवेटेड कॉरिडोर के अलावा, किसान पथ पर सर्विस रोड के निर्माण और लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को छह लेन करने की मांग भी स्वीकार कर ली गई है। साथ ही, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की लंबे समय से चली आ रही मांग को भी गडकरी ने प्राथमिकता देते हुए पूरा किया है।
उन्नाव में जिन परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास हुआ, उनकी कुल लागत ₹4,850 करोड़ से अधिक है। ये तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढाँचे को और मजबूत करेंगी।
शहीद पथ का ऐतिहासिक संदर्भ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने याद दिलाया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे और वह स्वयं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री थे, तभी शहीद पथ की आधारशिला रखी गई थी। आज यह मार्ग लखनऊ की जीवनरेखा बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि शहीद पथ का निर्माण नहीं हुआ होता, तो राजधानी में यातायात की स्थिति कहीं अधिक गंभीर होती।
गौरतलब है कि शहीद पथ पर बढ़ते यातायात के कारण विशेष रूप से एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। एलिवेटेड कॉरिडोर इसी समस्या का सीधा समाधान है।
लखनऊ के औद्योगिक भविष्य पर नज़र
राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ अब केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र का भी प्रमुख केंद्र बन रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण परियोजना इसकी पहचान बन चुकी है और आने वाले महीनों में इससे भी बड़े उद्योग राजधानी में स्थापित होने जा रहे हैं, जिससे रोज़गार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और विकास की रफ्तार तेज हुई है। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी राज्य के विकास की पहली शर्त बेहतर कानून-व्यवस्था होती है, और आज उत्तर प्रदेश इसी कारण पूरे देश में चर्चा का विषय है।
आगे की राह
एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और निर्माण की समयसीमा तय करने का काम अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। मेट्रो एकीकरण की सैद्धांतिक स्वीकृति के बाद इसकी व्यावहारिक रूपरेखा तय होना भी बाकी है। लखनऊ के लाखों निवासियों और रोज़ाना एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों की नज़रें अब इस परियोजना के क्रियान्वयन पर टिकी हैं।