14 जुलाई 2026
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शहीद पथ पर 23 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर मंजूर, लखनऊ को मिलेगी ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत

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शहीद पथ पर 23 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर मंजूर, लखनऊ को मिलेगी ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत

सारांश

शहीद पथ पर 23 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की मंजूरी लखनऊ के यातायात संकट का सबसे बड़ा जवाब है — ऊपर मेट्रो, नीचे स्थानीय यातायात। राजनाथ सिंह ने उन्नाव मंच से यह प्रस्ताव रखा और गडकरी ने तत्काल हरी झंडी दी।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ के शहीद पथ पर 23 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी।
कॉरिडोर एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक विस्तारित होगा; ऊपर मेट्रो रेल चलाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति मिली।
किसान पथ पर सर्विस रोड और लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को छह लेन करने की मांग भी स्वीकृत।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को भी प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी गई।
उन्नाव में ₹4,850 करोड़ से अधिक लागत की तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास हुआ।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लखनऊ के शहीद पथ पर 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है, जो एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक विस्तारित होगा। 13 जुलाई 2026 को उन्नाव में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह में रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह ने यह जानकारी दी। यह फैसला राजधानी की सबसे बड़ी यातायात समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि उन्होंने कार्यक्रम की परंपरा बदलते हुए सबसे पहले संबोधन किया, ताकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने लखनऊ के विकास से जुड़े प्रस्ताव रख सकें। उन्होंने शहीद पथ पर एलिवेटेड कॉरिडोर का अनुरोध किया, जिसे गडकरी ने तत्काल मंजूरी दे दी।

इस कॉरिडोर के ऊपर मेट्रो रेल चलाने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। योजना के अनुसार, लंबी दूरी का यातायात एलिवेटेड मार्ग से संचालित होगा, जबकि स्थानीय यातायात नीचे शहीद पथ पर चलता रहेगा — जिससे जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

अन्य स्वीकृत परियोजनाएँ

एलिवेटेड कॉरिडोर के अलावा, किसान पथ पर सर्विस रोड के निर्माण और लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को छह लेन करने की मांग भी स्वीकार कर ली गई है। साथ ही, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की लंबे समय से चली आ रही मांग को भी गडकरी ने प्राथमिकता देते हुए पूरा किया है।

उन्नाव में जिन परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास हुआ, उनकी कुल लागत ₹4,850 करोड़ से अधिक है। ये तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढाँचे को और मजबूत करेंगी।

शहीद पथ का ऐतिहासिक संदर्भ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने याद दिलाया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे और वह स्वयं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री थे, तभी शहीद पथ की आधारशिला रखी गई थी। आज यह मार्ग लखनऊ की जीवनरेखा बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि शहीद पथ का निर्माण नहीं हुआ होता, तो राजधानी में यातायात की स्थिति कहीं अधिक गंभीर होती।

गौरतलब है कि शहीद पथ पर बढ़ते यातायात के कारण विशेष रूप से एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। एलिवेटेड कॉरिडोर इसी समस्या का सीधा समाधान है।

लखनऊ के औद्योगिक भविष्य पर नज़र

राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ अब केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र का भी प्रमुख केंद्र बन रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण परियोजना इसकी पहचान बन चुकी है और आने वाले महीनों में इससे भी बड़े उद्योग राजधानी में स्थापित होने जा रहे हैं, जिससे रोज़गार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और विकास की रफ्तार तेज हुई है। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी राज्य के विकास की पहली शर्त बेहतर कानून-व्यवस्था होती है, और आज उत्तर प्रदेश इसी कारण पूरे देश में चर्चा का विषय है।

आगे की राह

एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और निर्माण की समयसीमा तय करने का काम अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। मेट्रो एकीकरण की सैद्धांतिक स्वीकृति के बाद इसकी व्यावहारिक रूपरेखा तय होना भी बाकी है। लखनऊ के लाखों निवासियों और रोज़ाना एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों की नज़रें अब इस परियोजना के क्रियान्वयन पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा DPR से निर्माण तक की यात्रा में है — उत्तर प्रदेश में कई बड़ी परियोजनाएँ 'सैद्धांतिक स्वीकृति' के बाद वर्षों तक कागज़ों पर रहती हैं। मेट्रो एकीकरण की सैद्धांतिक स्वीकृति और व्यावहारिक क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तंत्र ज़रूरी है। लखनऊ का ब्रह्मोस-केंद्रित औद्योगिक विस्तार और बढ़ता हवाई यातायात बुनियादी ढाँचे पर दबाव और बढ़ाएगा, इसलिए यह कॉरिडोर महज़ ट्रैफिक राहत नहीं, बल्कि शहर की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता का आधार है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ शहीद पथ एलिवेटेड कॉरिडोर क्या है?
यह शहीद पथ पर एयरपोर्ट से आउटर रिंग रोड तक प्रस्तावित 23 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड (ऊपरी) सड़क मार्ग है, जिसे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंजूरी दी है। इसके ऊपर मेट्रो रेल चलाने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है।
इस कॉरिडोर से लखनऊ के ट्रैफिक जाम में कैसे राहत मिलेगी?
योजना के अनुसार लंबी दूरी का यातायात एलिवेटेड मार्ग से गुज़रेगा, जबकि स्थानीय यातायात नीचे शहीद पथ पर चलता रहेगा। इससे विशेष रूप से एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
13 जुलाई 2026 को उन्नाव में किन परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ?
उन्नाव में ₹4,850 करोड़ से अधिक लागत की तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास हुआ। इसी कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ की विकास परियोजनाओं की घोषणा की।
लखनऊ के लिए और कौन-सी परियोजनाएँ स्वीकृत हुई हैं?
किसान पथ पर सर्विस रोड, लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग को छह लेन करना और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे — ये सभी माँगें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्वीकार कर ली हैं।
शहीद पथ का निर्माण कब और किसके कार्यकाल में हुआ था?
शहीद पथ की आधारशिला तब रखी गई थी जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे और राजनाथ सिंह स्वयं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री थे। आज यह मार्ग लखनऊ की जीवनरेखा बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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