केंद्र ने आयकर नियम 2026 की अधिसूचना जारी की, रिटर्न फाइलिंग हुई सरल

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केंद्र ने आयकर नियम 2026 की अधिसूचना जारी की, रिटर्न फाइलिंग हुई सरल

सारांश

केंद्र सरकार ने आयकर नियम, 2026 के लिए अधिसूचना जारी की है, जिससे रिटर्न फाइल करना और भी सरल हो गया है। ये नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे और इसमें पारदर्शिता तथा बेहतर अनुपालन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। जानें इस अधिसूचना के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।

Key Takeaways

  • नए नियम 2026 से रिटर्न फाइलिंग सरल होगी।
  • एचआरए की सीमा बढ़ाई गई है।
  • पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मकान मालिक के संबंधों का खुलासा आवश्यक होगा।
  • डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए सख्त शर्तें लागू होंगी।
  • पूंजीगत लाभ की वर्गीकरण स्पष्ट की जाएगी।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को आयकर नियम, 2026 के लिए एक नई अधिसूचना प्रस्तुत की है। यह अधिसूचना नए आयकर अधिनियम, 2025 के लिए एक आधार तैयार करेगी, जो कि 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। इसमें पारदर्शिता, सख्त डिस्क्लोजर और बेहतर अनुपालन पर जोर दिया गया है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने ई-राजपत्र में आयकर नियम, 2026 को प्रकाशित किया है, जो पूर्ववर्ती प्रावधानों को प्रतिस्थापित करेगा और आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक विस्तृत ढांचा निर्धारित करेगा।

इन नए नियमों का उद्देश्य सभी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कैपिटल गेन, स्टॉक मार्केट लेनदेन और एनआरआई टैक्स से संबंधित रिपोर्टिंग मानकों को मजबूत करना है।

ये नियम इस वर्ष की शुरुआत में जारी किए गए मसौदा प्रस्तावों के बाद आए हैं और भारत की कर प्रणाली को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।

आधिकारिक अधिसूचना में बताया गया है, “इन परिवर्तनों से कोई नया कर लागू नहीं होगा, बल्कि बेहतर निगरानी और पारदर्शिता पर जोर दिया जाएगा, जिसके लिए अधिक डिस्क्लोजर और डिजिटल ट्रैकिंग की आवश्यकता होगी।”

आयकर नियम, 2026 में सबसे महत्वपूर्ण विशेषता हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) है। नए नियमों के अनुसार, अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद के निवासी भी अपनी सैलरी के 50 प्रतिशत हिस्से पर एचआरए का दावा कर सकते हैं। पहले यह सीमा केवल मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों के निवासियों के लिए थी।

हालांकि, अन्य शहरों के लिए यह सीमा अभी भी 40 प्रतिशत बनी हुई है।

अब करदाताओं को एक निर्धारित फॉर्म में अपने मकान मालिक के साथ संबंधों का खुलासा करना आवश्यक होगा, जिससे पारदर्शिता में और सुधार होगा।

इन नियमों में स्टॉक एक्सचेंजों के लिए डेरिवेटिव ट्रेडिंग के मान्यता प्राप्त प्लेटफार्मों के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए सख्त शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

एक्सचेंजों को सेबी से अनुमोदन प्राप्त करना होगा और पैन एवं विशेष आईडी जैसे ग्राहक-स्तरीय डेटा सहित सभी लेन-देन का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा।

उन्हें सात वर्षों तक ऑडिट ट्रेल बनाए रखना होगा और ट्रेडिंग गतिविधियों पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कर विभाग को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

अतिरिक्त रूप से, सरकार ने नए आयकर नियम 2026 में यह स्पष्ट किया है कि पूंजीगत लाभ अल्पकालिक है या दीर्घकालिक, यह निर्धारित करने के लिए परिसंपत्तियों की होल्डिंग अवधि की गणना कैसे की जाएगी।

आय घोषणा योजना, 2016 के तहत घोषित परिसंपत्तियों के लिए, परिसंपत्ति के प्रकार के आधार पर अलग-अलग नियम लागू होंगे।

ये नियम कुछ संस्थाओं के लिए पूंजीगत लाभ पर कराधान को भी स्पष्ट करते हैं। अल्पकालिक परिसंपत्तियों या स्व-निर्मित परिसंपत्तियों से जुड़े लाभों को अल्पकालिक माना जाएगा, जबकि अन्य को अंतर्निहित परिसंपत्ति की प्रकृति के आधार पर दीर्घकालिक के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

Point of View

जिससे करदाताओं को अधिक सरलता के साथ अपनी आयकर रिटर्न फाइल करने में मदद मिलेगी।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

आयकर नियम 2026 का उद्देश्य क्या है?
आयकर नियम 2026 का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना और रिपोर्टिंग मानकों को मजबूत करना है।
एचआरए के लिए नई सीमा क्या है?
नए नियमों के अनुसार, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद के निवासी भी अपनी सैलरी का 50 प्रतिशत एचआरए के लिए क्लेम कर सकते हैं।
नए नियमों के तहत मकान मालिक के साथ संबंधों का खुलासा क्यों आवश्यक है?
यह पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है, जिससे करदाताओं और सरकार के बीच भरोसा बढ़े।
डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए क्या शर्तें हैं?
एक्सचेंजों को सेबी से अनुमोदन प्राप्त करना होगा और सभी लेन-देन का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा।
पूंजीगत लाभ को कैसे वर्गीकृत किया जाएगा?
पूंजीगत लाभ की वर्गीकरण अल्पकालिक या दीर्घकालिक परिसंपत्तियों की होल्डिंग अवधि के आधार पर की जाएगी।
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