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APNIC 62वीं बैठक मुंबई: भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा में वैश्विक नेतृत्व की ओर

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APNIC 62वीं बैठक मुंबई: भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा में वैश्विक नेतृत्व की ओर

सारांश

12 वर्षों के अंतराल के बाद मुंबई में APNIC की 62वीं बैठक ने भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षा को वैश्विक मंच दिया। सरकारी अधिकारियों से लेकर उद्योग जगत तक — सबने माना कि भारत अब सिर्फ इंटरनेट उपभोक्ता नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार में एक उभरती वैश्विक शक्ति है।

मुख्य बातें

APNIC की 62वीं बैठक 8 सितंबर को मुंबई में आयोजित हुई — 12 वर्षों के अंतराल के बाद भारत में यह सम्मेलन लौटा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील पाल ने इंटरनेट को राष्ट्रीय सुरक्षा की रणनीतिक अवसंरचना बताया।
सरकार इंटरनेट रूट हाईजैकिंग रोकने के लिए APNIC के साथ सक्रिय तकनीकी सहयोग कर रही है।
NIXI के CEO देवेश त्यागी ने बताया कि 2012 में IRINN की स्थापना के बाद भारत में इंटरनेट विस्तार को नई गति मिली।
ISPAI अध्यक्ष राजेश छारिया ने कहा कि वैश्विक कंपनियाँ भारत में निवेश और साझेदारी के अवसर तलाश रही हैं।
APNIC EC अध्यक्ष केनी हुआंग ने भारत की तकनीक-समर्थक नीतियों और AI निवेश की सराहना की।

मुंबई में 8 सितंबर को आयोजित एशिया पैसिफिक नेटवर्क इंफॉर्मेशन सेंटर (APNIC) की 62वीं बैठक में विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने एकमत से कहा कि भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेट सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग जगत और सरकारी अधिकारियों ने भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर गहरा भरोसा जताया और साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।

सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत दृष्टिकोण

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील पाल ने कहा कि इंटरनेट अब महज संचार का साधन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय अवसंरचना बन चुका है, जिस पर सरकार की अधिकांश सेवाएँ और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र निर्भर हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जैसे-जैसे AI और क्वांटम तकनीक का विस्तार हो रहा है, साइबर अपराधी भी उन्नत हथियारों से नए हमले करने की कोशिश कर रहे हैं।

पाल ने बताया कि सरकार इंटरनेट रूटिंग सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि रूट हाईजैकिंग और नेटवर्क व्यवधान जैसी घटनाओं को रोका जा सके। इस लक्ष्य के लिए सरकार APNIC के साथ सक्रिय तकनीकी सहयोग कर रही है।

NIXI का योगदान और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवेश त्यागी ने बताया कि करीब 12 वर्षों के अंतराल के बाद APNIC का यह सम्मेलन पुनः भारत में आयोजित हो रहा है, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंच भारतीय इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP) को वैश्विक नेटवर्क ऑपरेटरों के साथ जुड़ने और सीखने का दुर्लभ अवसर देते हैं।

त्यागी ने कहा कि इस आयोजन से वैश्विक स्तर पर यह संदेश जाता है कि भारत एक सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि 2012 में NIXI के सहयोग से भारत में IRINN (नेशनल इंटरनेट रजिस्ट्री) की स्थापना हुई थी, जिसके बाद देश में इंटरनेट विस्तार को नई रफ्तार मिली।

उद्योग जगत का नज़रिया

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISPAI) के अध्यक्ष राजेश छारिया ने कहा कि आज भारत में इंटरनेट पहुँच अभूतपूर्व स्तर पर है और दुनिया भर की कंपनियाँ भारतीय बाज़ार को नई संभावनाओं के केंद्र के रूप में देख रही हैं। उन्होंने कहा कि विशाल उपभोक्ता आधार और तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण वैश्विक कंपनियाँ भारत में निवेश और साझेदारी के अवसर सक्रिय रूप से तलाश रही हैं।

छारिया ने उम्मीद जताई कि भविष्य में APNIC जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भारत में और अधिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जिससे वैश्विक और भारतीय डिजिटल कंपनियों के बीच सहयोग और गहरा होगा।

एशिया-प्रशांत में भारत की उभरती भूमिका

APNIC EC के अध्यक्ष केनी हुआंग ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र इस समय वैश्विक डिजिटल विकास और तकनीकी नवाचार का सबसे सक्रिय केंद्र बन चुका है और भारत इसका प्रमुख उदाहरण है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले के भारत और आज के भारत की तुलना करने पर बदलाव बेहद उल्लेखनीय दिखाई देता है।

हुआंग ने भारत सरकार की तकनीक-समर्थक नीतियों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और AI को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की सराहना की। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक डिजिटल शासन में अपनी आवाज़ को और मुखर बना रहा है।

आगे की राह

APNIC 62 सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाएँ भारत के डिजिटल नीति-निर्माण के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करेंगी, विशेष रूप से इंटरनेट रूटिंग सुरक्षा, AI-आधारित साइबर खतरों और वैश्विक कनेक्टिविटी के क्षेत्र में। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की डिजिटल यात्रा अगले दशक में और अधिक निर्णायक मोड़ लेने वाली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा नीतिगत घोषणाओं के क्रियान्वयन में है। इंटरनेट रूटिंग सुरक्षा और साइबर खतरों पर चर्चा तब तक अधूरी है जब तक CERT-In और NCIIPC जैसी संस्थाओं को पर्याप्त संसाधन और स्वायत्तता न मिले। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की विशालता — और उसकी कमज़ोरियाँ — दोनों एक साथ बढ़ रही हैं; वैश्विक मंचों पर नेतृत्व का दावा तभी विश्वसनीय होगा जब घरेलू साइबर सुरक्षा ढाँचा उसी रफ्तार से परिपक्व हो।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

APNIC की 62वीं बैठक क्या है और यह भारत में क्यों आयोजित हुई?
एशिया पैसिफिक नेटवर्क इंफॉर्मेशन सेंटर (APNIC) एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इंटरनेट संसाधनों के प्रबंधन और नीति-निर्माण का प्रमुख संगठन है। 62वीं बैठक 8 सितंबर को मुंबई में आयोजित हुई — करीब 12 वर्षों के अंतराल के बाद भारत को इस सम्मेलन की मेज़बानी मिली, जो देश की बढ़ती डिजिटल साख को दर्शाता है।
भारत सरकार इंटरनेट सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए क्या कर रही है?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील पाल के अनुसार, सरकार इंटरनेट रूटिंग सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि रूट हाईजैकिंग और नेटवर्क व्यवधान को रोका जा सके। इस दिशा में सरकार APNIC के साथ सक्रिय तकनीकी सहयोग कर रही है।
NIXI और IRINN का भारत के इंटरनेट विस्तार में क्या योगदान है?
NIXI के CEO देवेश त्यागी के अनुसार, 2012 में NIXI के सहयोग से भारत में IRINN (नेशनल इंटरनेट रजिस्ट्री) की स्थापना हुई, जिसके बाद देश में इंटरनेट विस्तार को नई गति मिली। NIXI भारतीय ISP को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ऑपरेटरों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वैश्विक कंपनियाँ भारत के डिजिटल बाज़ार में क्यों रुचि दिखा रही हैं?
ISPAI अध्यक्ष राजेश छारिया के अनुसार, भारत का विशाल उपभोक्ता आधार और तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था वैश्विक कंपनियों को निवेश और साझेदारी के लिए आकर्षित कर रही है। भारत में इंटरनेट पहुँच अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच चुकी है, जिससे यह बाज़ार नई संभावनाओं का केंद्र बन गया है।
APNIC EC अध्यक्ष केनी हुआंग ने भारत के बारे में क्या कहा?
APNIC EC अध्यक्ष केनी हुआंग ने कहा कि 10 वर्ष पहले के भारत और आज के भारत की तुलना करने पर बदलाव बेहद उल्लेखनीय है। उन्होंने भारत सरकार की तकनीक-समर्थक नीतियों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और AI को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की सराहना की।
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