APNIC 62वीं बैठक मुंबई: भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा में वैश्विक नेतृत्व की ओर
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 8 सितंबर को आयोजित एशिया पैसिफिक नेटवर्क इंफॉर्मेशन सेंटर (APNIC) की 62वीं बैठक में विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने एकमत से कहा कि भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेट सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग जगत और सरकारी अधिकारियों ने भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर गहरा भरोसा जताया और साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।
सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत दृष्टिकोण
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील पाल ने कहा कि इंटरनेट अब महज संचार का साधन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय अवसंरचना बन चुका है, जिस पर सरकार की अधिकांश सेवाएँ और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र निर्भर हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जैसे-जैसे AI और क्वांटम तकनीक का विस्तार हो रहा है, साइबर अपराधी भी उन्नत हथियारों से नए हमले करने की कोशिश कर रहे हैं।
पाल ने बताया कि सरकार इंटरनेट रूटिंग सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि रूट हाईजैकिंग और नेटवर्क व्यवधान जैसी घटनाओं को रोका जा सके। इस लक्ष्य के लिए सरकार APNIC के साथ सक्रिय तकनीकी सहयोग कर रही है।
NIXI का योगदान और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवेश त्यागी ने बताया कि करीब 12 वर्षों के अंतराल के बाद APNIC का यह सम्मेलन पुनः भारत में आयोजित हो रहा है, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंच भारतीय इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP) को वैश्विक नेटवर्क ऑपरेटरों के साथ जुड़ने और सीखने का दुर्लभ अवसर देते हैं।
त्यागी ने कहा कि इस आयोजन से वैश्विक स्तर पर यह संदेश जाता है कि भारत एक सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि 2012 में NIXI के सहयोग से भारत में IRINN (नेशनल इंटरनेट रजिस्ट्री) की स्थापना हुई थी, जिसके बाद देश में इंटरनेट विस्तार को नई रफ्तार मिली।
उद्योग जगत का नज़रिया
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISPAI) के अध्यक्ष राजेश छारिया ने कहा कि आज भारत में इंटरनेट पहुँच अभूतपूर्व स्तर पर है और दुनिया भर की कंपनियाँ भारतीय बाज़ार को नई संभावनाओं के केंद्र के रूप में देख रही हैं। उन्होंने कहा कि विशाल उपभोक्ता आधार और तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण वैश्विक कंपनियाँ भारत में निवेश और साझेदारी के अवसर सक्रिय रूप से तलाश रही हैं।
छारिया ने उम्मीद जताई कि भविष्य में APNIC जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भारत में और अधिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे, जिससे वैश्विक और भारतीय डिजिटल कंपनियों के बीच सहयोग और गहरा होगा।
एशिया-प्रशांत में भारत की उभरती भूमिका
APNIC EC के अध्यक्ष केनी हुआंग ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र इस समय वैश्विक डिजिटल विकास और तकनीकी नवाचार का सबसे सक्रिय केंद्र बन चुका है और भारत इसका प्रमुख उदाहरण है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले के भारत और आज के भारत की तुलना करने पर बदलाव बेहद उल्लेखनीय दिखाई देता है।
हुआंग ने भारत सरकार की तकनीक-समर्थक नीतियों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और AI को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की सराहना की। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक डिजिटल शासन में अपनी आवाज़ को और मुखर बना रहा है।
आगे की राह
APNIC 62 सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाएँ भारत के डिजिटल नीति-निर्माण के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करेंगी, विशेष रूप से इंटरनेट रूटिंग सुरक्षा, AI-आधारित साइबर खतरों और वैश्विक कनेक्टिविटी के क्षेत्र में। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की डिजिटल यात्रा अगले दशक में और अधिक निर्णायक मोड़ लेने वाली है।