27 जुलाई 2026
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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता: सरकार ने उठाए 7 बड़े कदम, संसद में दी जानकारी

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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता: सरकार ने उठाए 7 बड़े कदम, संसद में दी जानकारी

सारांश

पश्चिम एशिया संघर्ष ने भारत का कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ाया, लेकिन सरकार ने शुल्क छूट, बीमा राहत, ईसीएलजीएस 5.0 और आरओडीटीईपी बहाली से मोर्चा संभाला। बास्केट कीमत 114.5 से 77.6 डॉलर पर आई — अब असली परीक्षा इन उपायों के ज़मीनी असर की है।

मुख्य बातें

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट से निपटने के उपायों की जानकारी दी।
चुनिंदा पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक पर अस्थायी सीमा शुल्क छूट और भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल रिलीफ योजना लागू की गई।
आरओडीटीईपी लाभ बहाल किए गए और ईसीएलजीएस 5.0 के तहत व्यवसायों को तरलता सहायता दी जा रही है।
भारतीय कच्चे तेल की औसत बास्केट कीमत अप्रैल 2026 के 114.5 डॉलर/बैरल से घटकर 22 जुलाई 2026 तक 77.6 डॉलर/बैरल हुई।
कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता , रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में वृद्धि और कोयला-लिग्नाइट गैसीकरण से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की जा रही है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक घरेलू मांग में निरंतर मजबूती का संकेत दे रहे हैं।

केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि पश्चिम एशिया संकट से उपजी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के बावजूद भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, इनपुट लागत नियंत्रण, व्यापार सुगमता और तरलता सहायता सहित कई ठोस उपाय लागू किए गए हैं। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर में इन उपायों का विस्तृत ब्यौरा दिया।

सरकार ने क्या-क्या कदम उठाए

सरकार ने चुनिंदा पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक पर अस्थायी रूप से सीमा शुल्क में छूट दी है, ताकि औद्योगिक इनपुट लागत का बोझ कम हो सके। इसके साथ ही कारोबारों को राहत देने के लिए भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल रिलीफ योजना शुरू की गई है।

निर्यातकों को सहारा देने के लिए निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं कर वापसी योजना (आरओडीटीईपी) के लाभ बहाल किए गए हैं — इसका उद्देश्य बढ़ी हुई माल ढुलाई, बीमा और युद्ध जोखिम लागत की भरपाई करना है। इसके अलावा, इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) 5.0 के ज़रिये व्यवसायों को तरलता सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ज़ोर

मंत्री चौधरी ने बताया कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाई गई है और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में वृद्धि की गई है। वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारतीय कच्चे तेल की औसत बास्केट कीमत अप्रैल 2026 में 114.5 डॉलर प्रति बैरल के शिखर से घटकर 22 जुलाई 2026 तक 77.6 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर ऊर्जा उपयोग को अधिक कुशल बनाने के प्रयास भी जारी हैं।

कृषि और उर्वरक आपूर्ति

सरकार ने गैस की सुनिश्चित आपूर्ति, आयात स्रोतों में विविधता, अग्रिम खरीद और बफर स्टॉक बनाए रखकर उर्वरकों तथा अन्य आवश्यक कृषि इनपुट की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संघर्ष का सबसे अधिक असर कच्चे तेल पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है, और भारत उनमें प्रमुख है।

व्यापार लचीलापन और पूंजी प्रवाह

वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौतों (सीईपीए) के नेटवर्क का विस्तार कर व्यापारिक लचीलापन मजबूत कर रही है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और सरकार द्वारा हाल में घोषित उपायों से पूंजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है, जिससे भारत की बाहरी वित्तपोषण आवश्यकताएँ पूरी होंगी।

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट, सेवा निर्यात में निरंतर वृद्धि और प्रवासी भारतीयों से मिलने वाले रेमिटेंस के संयुक्त प्रभाव से भारत के बाह्य क्षेत्र को समर्थन मिलेगा और चालू खाते पर दबाव कम होगा।

आर्थिक संकेतक सकारात्मक

चौधरी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में निरंतर मजबूती का संकेत दे रहे हैं। इन समन्वित उपायों से महंगाई के दबाव को नियंत्रित रखने और वैश्विक ऊर्जा व्यवधानों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव न्यूनतम रखने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यही सबसे बड़ा सवाल है। पेट्रोकेमिकल शुल्क छूट और ईसीएलजीएस जैसे उपकरण पहले भी आज़माए जा चुके हैं; इनका असर अल्पकालिक राहत तक सीमित रहा है। असली चुनौती यह है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा अभी भी आयात से पूरा करता है, और 'स्रोतों में विविधता' का नारा तब तक खोखला है जब तक घरेलू उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा में ठोस निवेश नहीं बढ़ता। बास्केट कीमत का 114.5 से 77.6 डॉलर पर आना राहत देने वाला है, लेकिन यह बाज़ार की चाल है, सरकारी नीति की उपलब्धि नहीं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम एशिया संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा?
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे भारत का कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ आईं। इसका सबसे अधिक असर कच्चे तेल पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा, जिनमें भारत प्रमुख है।
सरकार ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कौन-से मुख्य कदम उठाए?
सरकार ने चुनिंदा पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक पर अस्थायी सीमा शुल्क छूट, भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल रिलीफ योजना, आरओडीटीईपी लाभों की बहाली और ईसीएलजीएस 5.0 के तहत तरलता सहायता जैसे कदम उठाए। इसके अलावा एफटीए और सीईपीए नेटवर्क का विस्तार कर व्यापारिक लचीलापन भी मजबूत किया जा रहा है।
ईसीएलजीएस 5.0 क्या है और इससे किसे फायदा होगा?
इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) 5.0 सरकार की तरलता सहायता योजना का नया संस्करण है, जो पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित कारोबारों को ऋण गारंटी के माध्यम से वित्तीय सहायता देती है। इससे विशेष रूप से उन उद्योगों को राहत मिलेगी जिनकी इनपुट लागत और माल ढुलाई खर्च बढ़ा है।
भारतीय कच्चे तेल की बास्केट कीमत में कितनी गिरावट आई?
भारतीय कच्चे तेल की औसत बास्केट कीमत अप्रैल 2026 में 114.5 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 22 जुलाई 2026 तक घटकर 77.6 डॉलर प्रति बैरल रह गई। यह गिरावट सेवा निर्यात वृद्धि और प्रवासी भारतीयों के रेमिटेंस के साथ मिलकर चालू खाते के दबाव को कम करेगी।
सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या विशेष उपाय किए हैं?
सरकार ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाई है, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाए हैं और कोयला व लिग्नाइट गैसीकरण योजना को आगे बढ़ाया है। एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना भी इसी दिशा में एक कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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