यात्री वाहन उद्योग: वित्त वर्ष 27 में 4.6% वृद्धि का अनुमान, GST कटौती और नए मॉडलों से मिलेगा बल
सारांश
मुख्य बातें
भारत के यात्री वाहन उद्योग में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 4.6 प्रतिशत की वॉल्यूम वृद्धि का अनुमान लगाया गया है — जीएसटी दरों में कटौती, गर्मियों में विस्तारित विवाह सीजन और नए मॉडलों की मजबूत माँग इस वृद्धि के प्रमुख चालक बताए जा रहे हैं। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) ने 22 मई 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में यह आकलन प्रस्तुत किया।
अप्रैल में बिक्री के आँकड़े
आईसीआरए के अनुसार, अप्रैल 2026 में यात्री वाहनों की थोक बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत बढ़कर 44 लाख यूनिट तक पहुँच गई। घरेलू माँग को पूरा करने के लिए वाहन निर्माताओं ने उत्पादन की स्थिर गति बनाए रखी, जिसका सीधा असर थोक आँकड़ों पर दिखा।
इसी अवधि में खुदरा बिक्री में भी सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में कहा गया, "अप्रैल में यात्री वाहनों की थोक और खुदरा बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में काफी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। जीएसटी दरों में कटौती, गर्मियों में शादियों के लंबे सीजन और नए लॉन्च किए गए मॉडलों की अच्छी माँग के कारण यात्री वाहनों की माँग में लगातार वृद्धि हुई।"
इन्वेंट्री और खुदरा रुझान
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के हवाले से आईसीआरए ने बताया कि डीलरशिप स्तर पर इन्वेंट्री सितंबर 2025 के 60 दिन और अप्रैल 2026 के शुरुआती 50 दिन से घटकर महीने के अंत तक 28-30 दिन रह गई। यह गिरावट खुदरा बिक्री में बेहतर पेशकशों और माँग में तेजी का संकेत है।
हालाँकि, मार्च 2026 में वर्षांत छूटों के कारण खुदरा बिक्री में क्रमिक गिरावट भी देखी गई, जो सामान्य मौसमी चक्र का हिस्सा मानी जा रही है।
निर्यात में भी उछाल
घरेलू बाज़ार के साथ-साथ निर्यात मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। आईसीआरए के आकलन के अनुसार, अप्रैल में यात्री वाहनों के निर्यात में क्रमिक रूप से 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। रिपोर्ट में इसे भारतीय OEM द्वारा आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी का संकेत बताया गया है।
वित्त वर्ष 27 का समग्र अनुमान
आईसीआरए को वित्त वर्ष 2027 में थोक बिक्री में 4 से 6 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 26 के ऊँचे आधार और कमजोर मानसून की आशंका के चलते यह वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में कुछ धीमी रह सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय ऑटो सेक्टर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला दबावों और EV संक्रमण की चुनौतियों के बीच अपनी गति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।