भारत-ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड व्यापार: खनिज, कृषि और सेवाओं में खुल रहे नए द्वार
सारांश
मुख्य बातें
भारत के ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक संबंध तेज़ी से विस्तृत हो रहे हैं — वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, खेल, महत्वपूर्ण खनिजों और कृषि जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं उभर रही हैं। 21 अगस्त को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन साझेदारियों की गहराई और दिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
ऑस्ट्रेलिया: दोतरफा व्यापार और महत्वपूर्ण खनिजों पर जोर
मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के काउंसल जनरल पॉल मर्फी ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार को हमेशा दोतरफा रिश्ते के नज़रिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारे लिए व्यापार दोतरफा रास्ता है। हम भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद पूरकता को पहचानते हैं।"
मर्फी के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया अपनी सभी ज़रूरतों का कुशलतापूर्वक उत्पादन करने में सक्षम नहीं है, जबकि भारत की विशाल आबादी की विविध आवश्यकताएं और आकांक्षाएं हैं जिन्हें ऑस्ट्रेलियाई कंपनियां पूरा कर सकती हैं। पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़ते हुए, दोनों देश ऑस्ट्रेलिया-भारत स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप के तहत खेल क्षेत्र में भी व्यावहारिक सहयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के सीएसआईआरओ के वैज्ञानिक भारतीय शोधकर्ताओं के साथ मिलकर भारत के संसाधन आधार का आकलन कर रहे हैं और लिथियम जैसे खनिजों के उपयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं। मर्फी ने रेखांकित किया कि ऑस्ट्रेलिया विश्व का सबसे बड़ा लिथियम निर्यातक है और उसके पास अनेक अन्य महत्वपूर्ण खनिज भी हैं, जो निवेश के लिहाज़ से आकर्षक हो सकते हैं।
भारत-ब्रिटेन सीईटीए: अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौता
भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर विदेश व्यापार के अतिरिक्त महानिदेशक आर.के. मिश्रा ने कहा कि यह भारत का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौता है। उन्होंने बताया, "इस समझौते की प्रमुख विशेषता यह है कि यह भारत का सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौता है।"
मिश्रा के अनुसार, इस समझौते के तहत अब ब्रिटेन में भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों पर शून्य शुल्क लागू होगा। समझौते का दायरा केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है — इसमें निवेश, लोगों की आवाजाही और सेवाएं भी शामिल हैं, जो इसे पिछले द्विपक्षीय समझौतों से कहीं अधिक व्यापक बनाता है।
न्यूजीलैंड: कृषि क्षेत्र में पूरकता की बड़ी संभावना
भारत और दक्षिण एशिया के लिए न्यूजीलैंड के ट्रेड कमिश्नर एवं काउंसल जनरल ग्राहम राउस ने कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग की संभावना पर ज़ोर दिया। उन्होंने सेब उत्पादकता का उदाहरण देते हुए बताया कि न्यूजीलैंड में प्रति हेक्टेयर सेब की औसत उपज लगभग 50,000 टन है, जबकि भारत में यह केवल 8,000 टन प्रति हेक्टेयर है।
राउस ने यह भी बताया कि दोनों देशों के उत्पादन के मौसम एक-दूसरे के पूरक हैं, जिससे व्यापार और तकनीकी हस्तांतरण दोनों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी कृषि उत्पादकता और निर्यात क्षमता को बढ़ाने की दिशा में नीतिगत प्रयास तेज़ कर रहा है।
आम जनता और उद्योग पर असर
गौरतलब है कि ये तीनों साझेदारियां भारत की व्यापक आर्थिक कूटनीति का हिस्सा हैं। ब्रिटेन के साथ सीईटीए से भारतीय वस्त्र, फार्मा और आईटी सेवा निर्यातकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया के साथ खनिज सहयोग भारत की इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा संक्रमण नीतियों को मज़बूती दे सकता है। न्यूजीलैंड की कृषि विशेषज्ञता भारतीय किसानों की उत्पादकता सुधारने में सहायक हो सकती है।
क्या होगा आगे
तीनों देशों के अधिकारियों ने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में क्षेत्र-विशेष कार्ययोजनाओं और संयुक्त कार्यक्रमों पर काम तेज़ होगा। भारत-ऑस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिज साझेदारी और भारत-ब्रिटेन सीईटीए के क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।