सेंसेक्स 87 अंक टूटकर 72,441 पर खुला, निफ्टी 22,665 पर; FII की ₹24,054 करोड़ की बिकवाली से बाजार दबाव में
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स बुधवार, 30 सितंबर को शुरुआती कारोबार में 87.92 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,441.15 पर खुला, जबकि NSE निफ्टी 50 51.20 अंक यानी 0.23 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,665 पर था। मिश्रित वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली के बीच भारतीय बाजार दबाव में रहे।
मुख्य घटनाक्रम: सूचकांकों का हाल
लार्जकैप की तुलना में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 219 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,585 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 99 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,300 पर कारोबार कर रहा था।
सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी आईटी, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी पीएसई, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी एफएमसीजी हरे निशान में रहे। वहीं निफ्टी मेटल, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी फार्मा लाल निशान में रहे।
गेनर्स और लूजर्स
सेंसेक्स पैक में TCS, IndiGo, HCL Tech, Tech Mahindra, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank, Trent, HUL, Maruti Suzuki, UltraTech Cement, L&T, M&M, SBI, ITC और Tata Steel बढ़त में रहे।
दूसरी ओर HDFC Bank, Sun Pharma, NTPC, Titan, Bajaj Finance, Axis Bank, Bharti Airtel और Bajaj Finserv गिरावट में रहे।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख
एशियाई बाजारों में कारोबार मिला-जुला रहा। टोक्यो, शंघाई और ताइपे हरे निशान में थे, जबकि सोल और हांगकांग लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे — डाओ जोन्स 0.26 प्रतिशत और नैस्डैक 0.09 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर माह में अब तक निफ्टी में 5.67 प्रतिशत की भारी गिरावट के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना रहा। यह ऐसे समय में आया है जब 10-साल के यूएस बॉन्ड यील्ड 5.2 प्रतिशत के आसपास बने हुए हैं।
गौरतलब है कि पिछले चार ट्रेडिंग दिनों में FII ने ₹24,054 करोड़ के शेयर बेचे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊँचे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के मद्देनजर FII की यह बिकवाली स्वाभाविक है।
आम निवेशकों के लिए संकेत
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भारतीय निवेशकों के नजरिए से बाजार में आई यह तेज गिरावट एक अवसर के रूप में देखी जा सकती है। उनके अनुसार, अच्छी वृद्धि की संभावनाओं वाली लार्जकैप कंपनियों का वैल्यूएशन अब आकर्षक स्तरों पर आ गया है। आगे बाजार की दिशा वैश्विक बॉन्ड यील्ड और FII के रुख पर निर्भर करेगी।