ब्रिक्स व्यापार 21 साल में 13 गुना बढ़ा, 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर पर पहुँचा: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल

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ब्रिक्स व्यापार 21 साल में 13 गुना बढ़ा, 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर पर पहुँचा: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल

सारांश

21 साल में 13 गुना — ब्रिक्स देशों का आपसी व्यापार 84 अरब डॉलर से 1.17 ट्रिलियन डॉलर पर पहुँच गया है, फिर भी यह वैश्विक व्यापार का महज़ 5% है। गांधीनगर में सीजीईटीआई की दूसरी बैठक में भारत ने सेवा क्षेत्र और कनेक्टिविटी को अगली बड़ी छलाँग का आधार बताया।

मुख्य बातें

ब्रिक्स देशों के बीच माल व्यापार 21 वर्षों में 13 गुना बढ़ा — 2003 में 84 अरब डॉलर से 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर पर पहुँचा।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 16 मई 2026 को गांधीनगर में सीजीईटीआई की दूसरी बैठक में यह जानकारी दी।
ब्रिक्स का आपसी व्यापार अभी भी वैश्विक व्यापार का केवल 5 प्रतिशत — विस्तार की बड़ी संभावना बाकी।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का ब्रिक्स देशों को वस्तु निर्यात 82 अरब डॉलर ; सेवा निर्यात 31.3 अरब डॉलर (कैलेंडर वर्ष 2024)।
भारत ने चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है — पूर्व में 2012 , 2016 और 2021 में।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 16 मई 2026 को गांधीनगर में स्पष्ट किया कि ब्रिक्स देशों के बीच माल व्यापार (मर्चेंडाइज ट्रेड) 21 वर्षों में 13 गुना बढ़ा है — 2003 में 84 अरब डॉलर से उछलकर 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर पर पहुँच गया है। उन्होंने यह बात ब्रिक्स संपर्क समूह (सीजीईटीआई) की दूसरी बैठक में कही, जो गांधीनगर में व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर आयोजित की गई थी।

वैश्विक व्यापार से तेज़ रही ब्रिक्स की रफ़्तार

अग्रवाल के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार वृद्धि की दर वैश्विक व्यापार की औसत वृद्धि से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि इससे सदस्य देशों को व्यापारिक विविधता और आर्थिक मज़बूती दोनों हासिल हुई हैं। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई जब दुनिया भर में बढ़ते संरक्षणवाद, भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन बाधाएँ, महंगाई का दबाव और वैश्विक अनिश्चितताएँ चुनौती बनी हुई हैं।

अभी भी बड़ी संभावनाएँ बाकी

वाणिज्य सचिव ने यह भी रेखांकित किया कि ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार अभी वैश्विक व्यापार का महज़ 5 प्रतिशत है। उनके अनुसार, यह आँकड़ा संकेत देता है कि व्यापार एकीकरण, वैल्यू चेन साझेदारी और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने की बड़ी गुंजाइश मौजूद है। गौरतलब है कि ब्रिक्स अब उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की एक प्रभावशाली सामूहिक आवाज़ के रूप में स्थापित हो रहा है।

भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का वस्तु निर्यात लगभग 82 अरब डॉलर रहा। इसके अतिरिक्त, कैलेंडर वर्ष 2024 में सेवाओं का निर्यात 31.3 अरब डॉलर दर्ज किया गया। मंत्रालय का मानना है कि सेवा क्षेत्र और बेहतर कनेक्टिविटी भविष्य में व्यापार वृद्धि के दो प्रमुख आधार बन सकते हैं।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

सीजीईटीआई की यह दूसरी बैठक थी — पहली बैठक मार्च 2026 में वर्चुअल माध्यम से हुई थी। 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के निर्माण' विषय पर आयोजित इस बैठक में बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को सुदृढ़ करने, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करने, रोज़गार सृजन, वैश्विक वैल्यू चेन को विविध और मज़बूत बनाने तथा सेवा व्यापार के विस्तार पर विचार-विमर्श हुआ। यह भी चर्चा हुई कि किसानों, महिलाओं, उद्यमियों और कारोबारियों की समृद्धि के लिए आपसी व्यापार को कैसे और मज़बूत किया जाए।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता

भारत ने 2012, 2016 और 2021 के बाद चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है। इस अध्यक्षता में भारत का ज़ोर अधिक संतुलित व्यापार, सेवा क्षेत्र में नए अवसरों की तलाश और पिछले अध्यक्ष देशों द्वारा शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने पर है। आने वाले महीनों में ब्रिक्स के भीतर व्यापार ढाँचे को और ठोस आकार देने की कोशिशें जारी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स की 5% हिस्सेदारी यह भी बताती है कि समूह अभी तक अपनी सामूहिक आर्थिक ताकत को व्यापार में नहीं बदल पाया है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक पुनर्गठन ब्रिक्स देशों को एक-दूसरे के करीब धकेल रहे हैं — यानी वृद्धि आंशिक रूप से रणनीतिक विकल्प से कम और बाहरी दबाव से अधिक प्रेरित है। भारत की चौथी अध्यक्षता में MSME और सेवा व्यापार पर ज़ोर सही दिशा है, पर जब तक भुगतान तंत्र, मानकीकरण और विवाद निपटान जैसी बाधाएँ दूर नहीं होतीं, तब तक ये लक्ष्य कागज़ी ही रहेंगे।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार कितना बढ़ा है?
ब्रिक्स देशों के बीच माल व्यापार 2003 में 84 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर पर पहुँच गया है, यानी 21 वर्षों में 13 गुना की वृद्धि। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 16 मई 2026 को गांधीनगर में सीजीईटीआई बैठक में यह जानकारी दी।
ब्रिक्स का वैश्विक व्यापार में कितना हिस्सा है?
आँकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार अभी वैश्विक व्यापार का लगभग 5 प्रतिशत है। वाणिज्य सचिव ने इसे व्यापार एकीकरण और वैल्यू चेन साझेदारी के लिए बड़ी अनुपयोगी संभावना बताया।
भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार कितना है?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का ब्रिक्स सदस्य देशों को वस्तु निर्यात लगभग 82 अरब डॉलर रहा। कैलेंडर वर्ष 2024 में सेवाओं का निर्यात 31.3 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
सीजीईटीआई बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई?
गांधीनगर में 16 मई 2026 को हुई सीजीईटीआई की दूसरी बैठक में बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मज़बूत करने, MSME को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने, रोज़गार सृजन, वैश्विक वैल्यू चेन को विविध बनाने और सेवा व्यापार विस्तार पर चर्चा हुई। किसानों, महिलाओं और उद्यमियों के लिए आपसी व्यापार को मज़बूत करने के उपाय भी विचार में आए।
भारत ने कितनी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है?
भारत ने 2012, 2016 और 2021 के बाद 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है। इस अध्यक्षता में भारत का ज़ोर सेवा क्षेत्र, कनेक्टिविटी और संतुलित व्यापार वृद्धि पर है।
राष्ट्र प्रेस
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