ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की उछाल से तय होगी शेयर बाजार की चाल, FII की बिकवाली भी अहम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह कई मोर्चों पर निर्णायक साबित हो सकता है। ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और घरेलू आर्थिक आंकड़े मिलकर दलाल स्ट्रीट की दिशा तय करेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स 2,090 अंक यानी 2.70 प्रतिशत गिरकर 75,237 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 532 अंक यानी 2.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,643 पर रहा।
ईरान-अमेरिका संघर्ष: बाजार पर सबसे बड़ा भू-राजनीतिक जोखिम
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नई योजना पेश करने की तैयारी में है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री के बयानों के बाद किसी संभावित समझौते की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जहाजों पर हमलों और जब्ती की आशंकाएं पहले से ही बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रही हैं। गौरतलब है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है।
कच्चे तेल में तेज उछाल, ब्रेंट और WTI दोनों चढ़े
भू-राजनीतिक अनिश्चितता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा। बीते सप्ताह ब्रेंट क्रूड में 7.84 प्रतिशत और WTI क्रूड में 10.48 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई। केवल शुक्रवार को ही तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें व्यापार घाटे, मुद्रास्फीति और कॉर्पोरेट मार्जिन — तीनों पर एक साथ दबाव बनाती हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि तनाव और बढ़ा तो रुपये पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
FII की भारी बिकवाली: 2026 में अब तक ₹2.31 लाख करोड़ निकाले
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली बाजार के लिए एक और चुनौती बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, FII ने मई 2026 में 16 मई तक ₹27,177 करोड़ की बिकवाली की। वर्ष 2026 में अब तक सेकेंडरी इक्विटी बाजार से कुल ₹2,31,486 करोड़ निकाले जा चुके हैं।
वहीं, प्राइमरी बाजार के माध्यम से इस वर्ष FPI का कुल निवेश मात्र ₹12,468 करोड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष FPI द्वारा की गई कुल बिक्री पिछले पूरे वर्ष की निकासी को पहले ही पार कर चुकी है — जो एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।
घरेलू आर्थिक आंकड़े: PMI से लेकर विदेशी मुद्रा भंडार तक नजर
घरेलू मोर्चे पर निवेशक कई महत्वपूर्ण आंकड़ों पर नजर रखेंगे। 21 मई को HSBC PMI (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) का डेटा जारी होगा, जो विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की सेहत का संकेत देगा। इसके अगले दिन 22 मई को बैंक लोन, बैंक डिपॉजिट और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े सामने आएंगे।
ये आंकड़े ऐसे समय में आएंगे जब बाजार पहले से ही वैश्विक अनिश्चितता के बोझ तले है। यदि PMI आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे, तो वे बाजार को कुछ सहारा दे सकते हैं।
बीते सप्ताह का प्रदर्शन: रियल्टी और IT सबसे ज्यादा प्रभावित
बीते सप्ताह लगभग सभी प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में गिरावट रही। निफ्टी रियल्टी 8.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। निफ्टी IT 5.71 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 4.71 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 4.36 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.16 प्रतिशत, निफ्टी PSU बैंक 4.12 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 3 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 2.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
तुलनात्मक रूप से कम नुकसान में निफ्टी फार्मा 2.18 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.17 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.91 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए — हालांकि ये भी नुकसान में ही रहे।
आने वाले सप्ताह में यदि ईरान-अमेरिका तनाव में नरमी आती है और घरेलू आर्थिक आंकड़े सकारात्मक रहते हैं, तो बाजार में कुछ राहत देखी जा सकती है — अन्यथा बिकवाली का दबाव जारी रह सकता है।