कृभको की 46वीं एजीएम: ₹825 करोड़ मुनाफा, सदस्य समितियों को 20% लाभांश का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) की 46वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें संस्था ने ₹825 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज करने और सदस्य सहकारी समितियों को 20 प्रतिशत लाभांश देने की घोषणा की। यह लाभांश संस्था के उपनियमों के तहत अधिकतम अनुमेय दर है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में मुनाफे में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
बैठक में भागीदारी और वित्तीय अनुमोदन
कृभको के प्रबंध निदेशक एस.एस. यादव ने बताया कि इस एजीएम में लगभग 90 प्रतिशत प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो संस्था के प्रति सदस्यों के विश्वास और जुड़ाव को दर्शाता है। बैठक में वार्षिक खातों और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को औपचारिक रूप से मंजूरी दी गई। पिछले वित्त वर्ष में किए गए कार्यों और उपलब्धियों का विवरण भी प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन
यादव ने कहा कि कृभको का वित्तीय प्रदर्शन इस वर्ष बेहद सकारात्मक रहा है। संस्था ने ₹825 करोड़ का मुनाफा अर्जित किया, जो पिछले वित्त वर्ष से 16 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20 प्रतिशत लाभांश की घोषणा संस्था के उपनियमों के अनुरूप की गई है और यह अधिकतम अनुमेय दर है।
सहकारिता आंदोलन और किसानों को लाभ
कृभको के उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को वर्तमान में सरकार का पूरा सहयोग प्राप्त है। उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में अधिक लोग सहकारिता आंदोलन से जुड़ रहे हैं और संस्थाओं को मजबूत बनाने के प्रयास जारी हैं। उनके अनुसार, सहकारी संस्थाओं के कारोबार विस्तार और लाभ का सीधा असर किसानों और सदस्य संस्थाओं तक पहुँच रहा है।
सरकारी पहलों से मिली नई ताकत
गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकर चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नई बहु-राज्यीय सहकारी संस्थाओं के गठन से सहकारिता आंदोलन को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि इन पहलों का असर आने वाले वर्षों में और स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
विविध क्षेत्रों में सहकारी भूमिका
चौधरी ने बताया कि उर्वरक, डेयरी, कृषि, चीनी उद्योग और बैंकिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी संस्थाएं किसानों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेष रूप से किसानों को कम ब्याज दर पर आसान ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में बड़े पैमाने पर प्रयास किए गए हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कृषि क्षेत्र में सहकारी ढाँचे को देश भर में विस्तार देने की नीतिगत कोशिशें तेज हैं। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों के ठोस परिणाम और अधिक किसानों तक पहुँचने की उम्मीद जताई जा रही है।