मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अप्रैल-मई में थामी आर्थिक रफ्तार, HSBC रिपोर्ट में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की 7 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अप्रैल-मई 2026 के दौरान देश की आर्थिक गति को धीमा पड़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात में तेज़ी और इन्वेंट्री में वृद्धि ने विपरीत परिस्थितियों में भी इस सेक्टर को सहारा दिया।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की जीडीपी में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एनर्जी मार्केट में बनी अनिश्चितता के चलते एहतियाती उपाय के तौर पर इन्वेंट्री बढ़ाई गई, जिसका सीधा फायदा मैन्युफैक्चरिंग को मिला। यह रुझान विशेष रूप से कंज्यूमर गुड्स सेगमेंट में देखा गया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अमेरिका में कम टैरिफ की स्थिति का लाभ उठाते हुए भारतीय कंपनियों ने संभावित 'सेक्शन 301 टैरिफ' लागू होने से पहले गैर-तेल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की, जिससे घरेलू फैक्ट्री गतिविधियों को भी गति मिली।
आर्थिक सुस्ती के संकेत
हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि 100 ग्रोथ इंडिकेटर्स का डेटाबेस अप्रैल-मई में समग्र आर्थिक रफ्तार के धीमे पड़ने की ओर संकेत करता है। इसके अलावा, प्रबल अल-नीनो की आशंका और कमज़ोर मानसून के पूर्वानुमान ने कृषि एवं ग्रामीण माँग पर जोखिम बढ़ा दिया है।
कृषि क्षेत्र पर दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, जीडीपी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला कृषि क्षेत्र इस समय गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। तापमान सामान्य से अधिक है, वर्षा सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम रही है और जलाशयों में जलस्तर पिछले वर्ष की तुलना में नीचे है।
रिपोर्ट में कहा गया, "ग्रामीण माँग में दबाव के शुरुआती संकेत पहले ही दिखने लगे हैं। शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण युवाओं की बेरोज़गारी तेज़ी से बढ़ी है। ग्रामीण इलाकों में दो-पहिया वाहनों की बिक्री और बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी की गति धीमी हुई है, और जून में घरेलू जीएसटी कलेक्शन में भी गिरावट आई है।"
सेवा क्षेत्र और वित्तीय परिदृश्य
रिपोर्ट में कृषि के अलावा दो सकारात्मक कारकों की पहचान की गई है। सर्विस सेक्टर, जो जीडीपी का 55 प्रतिशत है, में आशावाद बना हुआ है। युद्ध-पूर्व स्तर पर लौटती तेल कीमतें व्यापार और परिवहन क्षेत्र को — जो जीडीपी का लगभग 15 प्रतिशत है — बढ़ावा दे सकती हैं। वहीं, एफएक्स पैकेज से आसान वित्तीय परिस्थितियाँ वित्तीय क्षेत्र को गति दे सकती हैं, जिसकी जीडीपी में लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
आगे की राह
कुल मिलाकर, रिपोर्ट एक मिश्रित तस्वीर पेश करती है — मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र आर्थिक स्थिरता के स्तंभ बने हुए हैं, जबकि कृषि संकट और ग्रामीण माँग में नरमी आने वाले महीनों में समग्र विकास दर के लिए निर्णायक परीक्षा होगी।